Mitrephora Rashmiae नामक वृक्ष की नई प्रजाति की खोज
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संदर्भ:
हाल ही में मुंबई स्थित ठाकरे वन्यजीव फाउंडेशन (TWF) के शोधकर्ताओं ने पूर्वी हिमालय जैव विविधता हॉटस्पॉट के अंतर्गत आने वाले अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबान्सिरी जिले के जंगलों में फूलों वाले पेड़ की एक नई और अति-दुर्लभ प्रजाति ‘मिट्रेफोरा रश्मिया’ (Mitrephora rashmiae) की खोज की।
मिट्रेफोरा रश्मिया प्रजाति के बारे में:
- खोजकर्ता: यह महत्वपूर्ण वानस्पतिक खोज (Botanical Discovery) शोधकर्ता तेजस यू. ठाकरे, डॉ. नवेंदु वी. पेज और शिवम किशवान के एक संयुक्त दल द्वारा डापोरिजो (Daporijo) के निकट सुबान्सिरी घाटी के पुष्प विविधता सर्वेक्षण के दौरान की गई।
- नामकरण: इस प्रजाति का नामकरण पर्यावरणविद् तेजस ठाकरे की माता श्रीमती रश्मी ठाकरे के प्रकृति संरक्षण और वर्गीकरण विज्ञान (Taxonomy) के प्रति उनके निरंतर समर्थन को सम्मान देने के लिए ‘मिट्रेफोरा रश्मिया’ रखा गया है।
- पारिवारिक वर्गीकरण: यह वृक्ष मुख्य रूप से कस्टर्ड एप्पल या सीताफल परिवार यानी ‘एनोनेसी’ (Annonaceae) कुल से संबंधित है।
- अद्वितीय पुष्प: इस वृक्ष को इसके हल्के पीले फूलों (Pale-yellow flowers) से पहचाना जा सकता है, जिन पर सूक्ष्म बैंगनी रंग की धारियाँ (Purple stripes) होती हैं।
- इसके भीतरी पंखुड़ियों के विन्यास से एक विशिष्ट गुंबद के आकार की पुष्प संरचना (Dome-shaped floral structure) बनती है।
- वैज्ञानिक विशिष्टता: यह इस संपूर्ण वंश (Genus) की पहली ऐसी ज्ञात प्रजाति है जिसमें एक ही पेड़ पर नर (Male) और उभयलिंगी (Bisexual) दोनों प्रकार के फूल लगते हैं।
- पर्यावास: यह प्रजाति पूर्वी हिमालयी जैव विविधता हॉटस्पॉट (Eastern Himalayan Biodiversity Hotspot) से दर्ज होने वाली मिट्रेफोरा वंश की केवल दूसरी प्रजाति है।
- अत्यधिक संवेदनशीलता: वर्तमान में जंगली अवस्था (Wild) में इस प्रजाति का केवल एक ही जीवित वृक्ष खोजा जा सका है।
- यह लगभग 7 मीटर ऊँचा पेड़ एक जीर्ण-शीर्ण वन क्षेत्र में पहाड़ी धारा (Stream) के किनारे उगता हुआ पाया गया।
- संरक्षण स्थिति: अतिरिक्त नमूनों और व्यापक जनसंख्या डेटा के अभाव के कारण वैज्ञानिकों ने वर्तमान में इसे आईयूसीएन (IUCN) मानदंडों के तहत “डेटा अपर्याप्त” (Data Deficient – DD) श्रेणी में वर्गीकृत किया है।
वर्ष 2026 में खोजी गई अन्य प्रमुख पादप एवं वृक्ष प्रजातियाँ:
- एनाफालिस सह्याद्रिका (Anaphalis sahyadrica): केरल के दक्षिणी पश्चिमी घाट (अनामुडी और मीसापुलिमाला) के उच्च-ऊंचाई वाले शोला घास के मैदानों से खोजी गई सूर्यमुखी (Asteraceae) परिवार की एक नई स्थानिक (Endemic) उपझाड़ी है।
- साइफोस्टेम्मा अन्नामलाई (Cyphostemma annamalaii): तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले में पूर्वी घाट की संतीवि पहाड़ियों से खोजी गई अंगूर (Vitaceae) कुल की एक नई अनूठी पर्वतारोही (Climber) पादप प्रजाति है।
- डिक्लिप्टेरा पखालिका (Dicliptera pakhalica): तेलंगाना के पखाल वन्यजीव अभयारण्य के झरनों और पथरीले क्षेत्रों से खोजी गई एकेंथेसी (Acanthaceae) परिवार की नई स्थानिक फूलदार पादप प्रजाति है।
- एक्टिनिडिया इंडिका (Actinidia indica): भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (BSI) के वैज्ञानिकों द्वारा अरुणाचल प्रदेश की जीरो वैली (Ziro Valley) से खोजी गई जंगली कीवी की एक नई बारहमासी पर्वतारोही झाड़ीदार प्रजाति है।
- हेंकेलिया क्लार्की (Henckelia clarkei): भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (BSI) द्वारा पूर्वोत्तर भारत से विज्ञान के लिए खोजी गई गेसनेरियासी (Gesneriaceae) परिवार की एक नई आकर्षक पुष्प पादप प्रजाति है।
- हेंकेलिया जिंगनुई (Henckelia zingnui): हिमालयी पादप अनुसंधान के तहत BSI के वैज्ञानिकों द्वारा खोजी गई गेसनेरियासी कुल की ही एक अन्य सर्वथा नई तथा संकटग्रस्त पादप प्रजाति है।
FAQs:
1. Mitrephora rashmiya क्या है?
यह कस्टर्ड एप्पल (सीताफल) परिवार से संबंधित फूलों वाले वृक्ष की एक नई खोजी गई प्रजाति है।
2. इस नई वृक्ष प्रजाति की खोज कहाँ हुई?
इसकी खोज अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबान्सिरी जिले के सुदूर और दुर्गम जंगलों में हुई है।
3. इस प्रजाति की प्रमुख विशेषताएं क्या हैं?
इसके फूलों का रंग बैंगनी धारियों वाला हल्का पीला है और इसमें नर व उभयलिंगी दोनों फूल होते हैं।
4. इसका नाम Mitrephora rashmiya क्यों रखा गया?
तेजस ठाकरे की माता श्रीमती रश्मी ठाकरे के प्रकृति संरक्षण और वर्गीकरण विज्ञान के समर्थन के सम्मान में।
5. इस खोज का वैज्ञानिक महत्व क्या है?
यह पूर्वी हिमालयी हॉटस्पॉट से दर्ज होने वाली मिट्रेफोरा वंश की केवल दूसरी ज्ञात प्रजाति है।
6. क्या यह वृक्ष दुर्लभ प्रजाति है?
हाँ, वर्तमान में पूरे जंगली क्षेत्र में इसका केवल एक ही 7 मीटर ऊँचा पेड़ मिला है।
7. जैव विविधता संरक्षण में इसका क्या योगदान है?
यह खोज पूर्वी हिमालय के अज्ञात सूक्ष्म पादप पर्यावासों और उनके त्वरित इन-सिटु संरक्षण की आवश्यकता को दर्शाती है।
8. खोज किस वैज्ञानिक संस्थान ने की?
यह खोज मुंबई स्थित वन्यजीव अनुसंधान संस्थान ‘ठाकरे वन्यजीव फाउंडेशन’ (TWF) के शोधकर्ताओं ने की है।
