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UN Women Report 2025: महिला अनुदान में कटौती से मानवीय सेवाएं प्रभावित

UN Women Report 2025: महिला अनुदान में कटौती से मानवीय सेवाएं प्रभावित

UN Women Report 2025

संदर्भ:

संयुक्त राष्ट्र संघ की लैंगिक समानता विंग, UN Women द्वारा 10 जुलाई, 2026 को जारी की गई नवीनतम रिपोर्ट “बियॉन्ड द ब्रेकिंग पॉइंट” (Beyond the Breaking Point) के अनुसार दाता देशों (donor countries) द्वारा महिला संगठनों के अनुदान में भारी कटौती की गई, जिसके कारण दुनिया भर में कम से कम 10 लाख महिलाओं और लड़कियों को जीवन रक्षक मानवीय सहायता (humanitarian assistance) नहीं मिल सकी।

UN Women Report 2025 के मुख्य बिंदु:

  • सर्वेक्षण: यह रिपोर्ट 52 संकट-ग्रस्त देशों के 855 महिला-नेतृत्व वाले संगठनों (women-led organizations) के सर्वेक्षण पर आधारित है।
  • बढ़ती मांग, घटते संसाधन (Surging Demand, Shrinking Resources): वर्तमान में वैश्विक स्तर पर 12 करोड़ महिलाओं और लड़कियों को मानवीय सहायता की आवश्यकता है।
    • इसके बावजूद, रिकॉर्ड में दर्ज विदेशी सहायता (official development assistance) की सबसे बड़ी वार्षिक गिरावट के कारण वित्तीय ढांचा चरमरा गया है। 
  • सेवाओं की असमर्थता (Inability to Meet Needs): लगभग 90% महिला संगठनों ने स्वीकार किया है कि वे अब बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं हैं, और 84% संगठनों में सेवाओं की मांग जनवरी 2025 से अत्यधिक बढ़ी है। 
  • संगठनों पर बंद होने का खतरा (Risk of Closure): संकट ग्रस्त क्षेत्रों (जैसे अफगानिस्तान, हैती, और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो) में सक्रिय लगभग 40% महिला संगठन आगामी वर्ष में अस्थायी या स्थायी रूप से बंद होने की कगार पर हैं।
  • दूरदराज के क्षेत्रों पर मार (Impact on Remote Areas): वित्तीय संकट के कारण 63% संगठनों ने सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों (hard-to-reach communities) में अपनी सेवाएं बंद या कम कर दी हैं। 
  • लैंगिक हिंसा में तीव्र वृद्धि (Rise in Gender-Based Violence – GBV): रिपोर्ट के अनुसार, 86% संगठनों ने अपने क्षेत्रों में लैंगिक हिंसा बढ़ने की बात कही है।
    • चिंताजनक रूप से, संघर्ष-संबंधी यौन हिंसा (conflict-related sexual violence) के मामले लगभग दोगुने हो गए हैं, जबकि पीड़ितों को बचाने वाले 62% सुरक्षित आश्रय स्थल (safe spaces) या तो बंद हो गए हैं या बेहद सीमित हो गए हैं।
  • शिक्षा और गरीबी (Education & Poverty): अनुदान रुकने से बुनियादी ढांचे प्रभावित हुए हैं, जिसके चलते 92% महिला संगठनों ने महिलाओं में अत्यधिक गरीबी (rising poverty) और 82% ने लड़कियों के स्कूल छोड़ने (school dropout) की दरों में भारी वृद्धि दर्ज की है।
  • मानसिक स्वास्थ्य संकट (Mental Health Crisis): संसाधनों की कमी से पीड़ित महिलाओं में से आधी को प्रतीक्षा सूची (waiting lists) में डाल दिया गया है या वापस लौटाया जा रहा है। इसके कारण 88% प्रभावित महिलाओं और लड़कियों के मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट देखी गई है। 
  • बिना वेतन के काम (Unpaid Volunteering): अस्तित्व बचाने के लिए 65% संगठनों की महिला कर्मचारी बिना किसी वेतन (working without pay) के जान जोखिम में डालकर अग्रिम मोर्चे (frontlines) पर काम कर रही हैं, जिससे उनमें ‘बर्नआउट’ (burnout) की समस्या 48% तक बढ़ गई है। 
  • स्थानीयकरण (Localization) का सिद्धांत प्रभावित: स्थानीय महिला संगठन वहां काम करते हैं जहां अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां (जैसे UN या बड़ी NGOs) नहीं पहुंच पातीं। इन जमीनी संगठनों (first responders) को वित्त न मिलना वैश्विक मानवीय सहायता प्रणाली (humanitarian reform) की विफलता को दर्शाता है।
  • नेतृत्व का ह्रास: फंडिंग संकट के कारण 20% संगठनों ने महिलाओं के नेतृत्व विकास (women’s leadership) और लैंगिक समानता से जुड़े कार्यक्रमों को पूरी तरह निलंबित कर दिया है।
  • लचीला और दीर्घकालिक वित्तपोषण (Sustained Financing): दाता देशों को महिला संगठनों के लिए सीधे और निरंतर फंड आवंटित करने होंगे, ताकि वे ‘सर्वाइवल मोड’ (survival mode) से बाहर आ सकें।
  • मानवीय सुधार (Humanitarian Financing Reform): संकटकालीन फंड का कम से कम एक निश्चित प्रतिशत अनिवार्य रूप से लैंगिक प्रतिक्रिया (gender-responsive action) और GBV रोकथाम के लिए आरक्षित किया जाना चाहिए।
  • बहुपक्षीय प्रतिबद्धता (Multilateral Commitment): G20 और संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों को विदेशी सहायता में कटौती के इस खतरनाक चलन को रोकना होगा ताकि महिलाएं युद्ध और आर्थिक संकटों का दोहरा शिकार न बनें। 

यूएन विमेन (UN Women) के बारे में:

  • परिचय: यूएन विमेन (UN Women) लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण के लिए समर्पित संयुक्त राष्ट्र की एक प्रमुख अंतर-सरकारी संस्था है। 
  • स्थापना (Establishment): संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा जुलाई 2010 में इसकी स्थापना की गई। यह संयुक्त राष्ट्र सुधार एजेंडा के तहत चार पूर्ववर्ती निकायों—DAW, INSTRAW, OSAGI और UNIFEM के विलय से अस्तित्व में आई। इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क में है।
  • मुख्य अधिदेश (Core Mandate): यह मुख्य रूप से सतत विकास लक्ष्य-5 (SDG-5: लैंगिक समानता) की प्राप्ति, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, राजनीतिक नेतृत्व में समान भागीदारी, और महिलाओं के खिलाफ सभी प्रकार की हिंसा को समाप्त करने के लिए नीतिगत ढांचे तैयार करती है।
  • कार्यप्रणाली (Key Functions): यह ‘महिला स्थिति आयोग’ (CSW) जैसे अंतर-सरकारी निकायों को वैश्विक मानक और नीतियां बनाने में सहायता करती है।
    • सदस्य देशों की मांग पर यह घरेलू नीतियों, कानूनों और ‘जैंडर-रिस्पॉन्सिव बजटिंग’ (gender-responsive budgeting) के कार्यान्वयन हेतु तकनीकी व वित्तीय सहयोग देती है। 
  • प्रमुख रिपोर्ट (Flagship Reports): इसके द्वारा प्रत्येक पांच वर्ष में विकास में महिलाओं की भूमिका पर वैश्विक सर्वेक्षण (World Survey on the Role of Women in Development) तथा “प्रोग्रेस ऑफ द वर्ल्ड्स विमेन” जैसी महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की जाती हैं। 
  • महत्व: यह वैश्विक संकटों, आपदाओं, और शांति प्रक्रियाओं (UNSC Resolution 1325) में लैंगिक दृष्टिकोण को मुख्यधारा में लाने का समन्वय करती है।
    • भारत, भूटान, मालदीव और श्रीलंका के लिए इसका बहु-देशीय कार्यालय नई दिल्ली में स्थित है। 

FAQs:

1. UN Women Report 2025 क्या है?

यह दाता देशों द्वारा महिला अनुदान कटौती के संकट को उजागर करने वाली वैश्विक रिपोर्ट है।

2. महिला अनुदान में कटौती से कौन-सी सेवाएं प्रभावित होंगी?

सुरक्षित आश्रय, मानसिक स्वास्थ्य उपचार, कानूनी सहायता और बुनियादी चिकित्सा सेवाएं व्यापक रूप से प्रभावित होंगी।

3. UN Women का मुख्य उद्देश्य क्या है?

वैश्विक स्तर पर लैंगिक समानता सुनिश्चित करना और महिलाओं व लड़कियों का पूर्ण सशक्तिकरण करना है।

4. इस रिपोर्ट में कौन-सी प्रमुख बातें सामने आई हैं?

अनुदान कटौती से 10 लाख महिलाओं की जीवन रक्षक मानवीय सहायता पूरी तरह बंद हो गई।

5. महिलाओं पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?

महिलाओं में अत्यधिक गरीबी, घरेलू हिंसा, मानसिक तनाव और जबरन स्कूल छोड़ने के मामले बढ़ेंगे।

6. किन देशों में सबसे अधिक असर देखने को मिलेगा?

अफगानिस्तान, हैती, यमन और डेमोग्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो जैसे भारी संकटग्रस्त देशों में।

7. मानवीय सहायता कार्यक्रम क्या होते हैं?

संकट, युद्ध या आपदा के समय जीवन बचाने और बुनियादी ज़रूरतें पूरी करने वाले कार्यक्रम।

8. UN Women रिपोर्ट क्यों महत्वपूर्ण है?

यह वैश्विक नीति निर्माताओं को लैंगिक बजटिंग और जमीनी संकटों के प्रति सचेत करती है।

9. क्या भारत भी इस रिपोर्ट में शामिल है?

हाँ, वैश्विक संकटों के प्रभाव और सुदूर क्षेत्रों के स्थानीय संगठनों के अध्ययन में शामिल है।

10. महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए क्या सुझाव दिए गए हैं?

महिला संगठनों को सीधा, दीर्घकालिक वित्तीय अनुदान देना और संकटकालीन सुरक्षा फंड सुनिश्चित करना।

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