संसदीय समिति

संदर्भ:
हाल ही में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने वर्ष 2026-27 के कार्यकाल के लिए संसद की प्रमुख वित्तीय और महत्वपूर्ण समितियों का पुनर्गठन किया।
पुनर्गठित समितियां और उनके अध्यक्ष (2026-27):
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समिति का नाम |
अध्यक्ष |
सदस्य संख्या (लोकसभा + राज्यसभा) |
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लोक लेखा समिति (PAC) |
के. सी. वेणुगोपाल (कांग्रेस) |
22 (15 + 7) |
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प्राकलन समिति (Estimates Committee) |
डॉ. संजय जायसवाल (BJP) |
30 (केवल लोकसभा) |
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सार्वजनिक उपक्रम समिति (COPU) |
बैजयंत पांडा (BJP) |
22 (15 + 7) |
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SC और ST कल्याण समिति |
फग्गन सिंह कुलस्ते (BJP) |
30 (20 + 10) |
संसदीय समिति क्या होती हैं?
संसदीय समिति सांसदों का एक छोटा समूह या पैनल है जिसे सदन (लोकसभा या राज्यसभा) द्वारा नियुक्त या निर्वाचित किया जाता है अथवा अध्यक्ष/सभापति द्वारा नामित किया जाता है। यह समिति अध्यक्ष या सभापति के निर्देशन में कार्य करती है और अपनी रिपोर्ट सदन को सौंपती है।
- आधुनिक समय में संसद का कार्य अत्यंत जटिल और व्यापक हो गया है। संसद के पास सीमित समय होने के कारण वह हर विधेयक या नीति पर गहराई से चर्चा नहीं कर सकती। ऐसे में संसदीय समितियां ‘लघु संसद’ के रूप में कार्य करते हुए गहन जांच और विशेषज्ञता प्रदान करती हैं।
संवैधानिक आधार:
- अनुच्छेद 105: यह सांसदों और समितियों के विशेषाधिकारों तथा शक्तियों से संबंधित है।
- अनुच्छेद 118: यह संसद को अपनी प्रक्रिया और कार्य संचालन को विनियमित करने के लिए नियम बनाने का अधिकार देता है।
संसदीय समितियों का वर्गीकरण:
1. स्थायी समितियां (Standing Committees):
ये समितियां स्थायी प्रकृति की होती हैं और इनका गठन प्रतिवर्ष या समय-समय पर निरंतर आधार पर किया जाता है। इन्हें निम्नलिखित श्रेणियों में बांटा गया है:
- वित्तीय समितियां: इनमें लोक लेखा समिति (PAC), प्राक्कलन समिति और सार्वजनिक उपक्रम समिति शामिल हैं।
- विभागीय स्थायी समितियां (DRSCs): वर्तमान में इनकी संख्या 24 है। प्रत्येक समिति में 31 सदस्य होते हैं (21 लोकसभा से और 10 राज्यसभा से)।
- जांच समितियां: जैसे विशेषाधिकार समिति और आचार समिति।
- जांच और नियंत्रण के लिए समितियां: जैसे सरकारी आश्वासन समिति और अधीनस्थ विधान संबंधी समिति।
- सदन के दैनिक कार्यों से संबंधित समितियां: जैसे कार्य मंत्रणा समिति और नियम समिति।
2. तदर्थ समितियां (Ad Hoc Committees):
ये समितियां अस्थायी होती हैं और इन्हें किसी विशिष्ट कार्य या जांच के लिए गठित किया जाता है। कार्य पूरा होने और रिपोर्ट सौंपने के बाद इनका अस्तित्व समाप्त हो जाता है।
- उदाहरण: किसी विशेष विधेयक पर प्रवर या संयुक्त समितियां, या रेलवे रिज़र्वेशन जैसी विशिष्ट जांच समितियां।
संसदीय समितियों का महत्व:
- विस्तृत जांच: समितियां विधेयकों और नीतियों की बारीकी से जांच करती हैं, जो सदन की खुली बहस में संभव नहीं होता।
- विशेषज्ञता: इनमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ सांसद शामिल होते हैं, जिससे विधायी निर्णयों में गुणवत्ता आती है।
- कार्यपालिका पर नियंत्रण: ये समितियां मंत्रालयों के खर्चों और कार्यों की समीक्षा करके सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करती हैं।
- आम सहमति का मंच: समितियों की बैठकें गोपनीय (Off-camera) होती हैं, जिससे सांसद दलगत राजनीति से ऊपर उठकर निष्पक्ष चर्चा कर पाते हैं।
- समय की बचत: संसद का अधिकांश तकनीकी कार्य पर्दे के पीछे इन समितियों द्वारा किया जाता है, जिससे सदन का कीमती समय बचता है।