वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2026

संदर्भ:
हाल ही में रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) द्वारा विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2026 जारी की गई। जिसके अनुसार, भारत 180 देशों की सूची में 157वें स्थान पर खिसक गया है। यह 2025 की 151वीं रैंकिंग की तुलना में छह स्थानों की गिरावट दर्शाता है।
विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2026 मुख्य बिंदु:
- भारत की स्थिति: भारत वर्तमान में “बहुत गंभीर” (Very Serious) श्रेणी में बना हुआ है।
- वैश्विक रुझान: प्रेस स्वतंत्रता 25 वर्षों के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। दुनिया के 52.2% देशों को “कठिन” या “बहुत गंभीर” श्रेणी में रखा गया है।
- 2026 की थीम: यूनेस्को (UNESCO) द्वारा इस वर्ष की थीम “Shaping a Future of Peace” (शांति के भविष्य को आकार देना) रखी गई है।
- कानूनी संकट: इस वर्ष ‘कानूनी संकेतक’ (Legal Indicator) में सबसे तीव्र गिरावट देखी गई है। 110 देशों में पत्रकारों के खिलाफ कानूनों का दुरुपयोग बढ़ा है।
- शीर्ष प्रदर्शनकर्ता: नॉर्वे लगातार 10वें वर्ष प्रथम स्थान पर है। इसके बाद डेनमार्क, स्वीडन, एस्टोनिया और नीदरलैंड का स्थान है।
- सबसे खराब स्थिति: इरिट्रिया (180वां) अंतिम स्थान पर है। चीन (178वां), उत्तर कोरिया (179वां) और अफगानिस्तान (175वां) भी निचले पायदानों पर बने हुए हैं।
- क्षेत्रीय विश्लेषण: मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका (MENA) पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक क्षेत्र बना हुआ है, जहाँ गाजा युद्ध के कारण रिकॉर्ड संख्या में पत्रकारों की मृत्यु हुई है।
भारत की रैंकिंग में गिरावट के प्रमुख कारण:
- कानूनी दबाव (Legal Indicator): पत्रकारों के खिलाफ मानहानि, देशद्रोह (अब BNS धारा 152) और UAPA जैसे कानूनों का बढ़ता उपयोग।
- मीडिया स्वामित्व का केंद्रीकरण: कुछ बड़े व्यापारिक समूहों द्वारा मीडिया संस्थानों का अधिग्रहण, जिससे संपादकीय स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है।
- पत्रकारों की सुरक्षा: फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान शारीरिक हिंसा, ऑनलाइन उत्पीड़न और विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (जैसे कश्मीर) में काम करने वाले पत्रकारों के प्रति बढ़ते खतरे।
- राजनीतिक संरेखण: मुख्यधारा के मीडिया आउटलेट्स का सत्ता प्रतिष्ठान के साथ बढ़ता झुकाव और स्वतंत्र आवाजों का दमन।
भारत के पड़ोसी देशों की रैंकिंग:
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देश |
2026 रैंक |
स्थिति |
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नेपाल |
87 |
तुलनात्मक रूप से बेहतर |
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श्रीलंका |
134 |
कठिन |
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भूटान |
150 |
बहुत गंभीर |
|
बांग्लादेश |
152 |
बहुत गंभीर |
|
पाकिस्तान |
153 |
बहुत गंभीर |
भारत में संवैधानिक एवं कानूनी ढांचा:
- अनुच्छेद 19(1)(a): भारतीय संविधान में प्रेस की स्वतंत्रता का अलग से उल्लेख नहीं है, लेकिन इसे ‘भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ के तहत मौलिक अधिकार माना जाता है।
- उचित प्रतिबंध (Reasonable Restrictions): अनुच्छेद 19(2) के तहत राज्य संप्रभुता, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था जैसे आधारों पर प्रेस पर प्रतिबंध लगा सकता है।
- न्यायिक हस्तक्षेप: रोमेश थापर बनाम मद्रास राज्य (1950) और बेनेट कोलमैन बनाम भारत संघ (1973) जैसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने प्रेस की स्वतंत्रता को लोकतंत्र का आधार बताया है।
निष्कर्ष:
प्रेस को लोकतंत्र का “चौथा स्तंभ” कहा जाता है। रैंकिंग में सुधार के लिए स्वतंत्र पत्रकारिता को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना, मीडिया संस्थानों में विविधता सुनिश्चित करना और सूचना के अधिकार को डिजिटल युग की चुनौतियों (जैसे AI और फेक न्यूज़) से बचाना अनिवार्य है।
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विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक (World Press Freedom Index) एक वार्षिक रिपोर्ट है, जो दुनिया भर के देशों में प्रेस और पत्रकारों को मिलने वाली स्वतंत्रता के स्तर का मूल्यांकन करती है।
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