पान मसाला के लिए प्लास्टिक-मुक्त पैकेजिंग | Plastic-free packaging for pan masala

संदर्भ:
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए पान मसाला और गुटखा के लिए ‘प्लास्टिक-मुक्त पैकेजिंग’ का प्रस्ताव दिया है। 28 अप्रैल 2026 को जारी इस ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के माध्यम से खाद्य सुरक्षा और मानक (पैकेजिंग) विनियम, 2018 में महत्वपूर्ण संशोधन किए जा रहे हैं।
प्रस्ताव के मुख्य बिंदु:
- प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध: FSSAI ने पान मसाला, गुटखा और तंबाकू उत्पादों की पैकेजिंग में किसी भी प्रकार के प्लास्टिक (जैसे पॉलीथीन, पॉलीप्रोपाइलीन, पीवीसी) और सिंथेटिक पॉलीमर के उपयोग को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव दिया है।
- वर्जित सामग्री: वर्तमान में उपयोग किए जाने वाले मल्टीलेयर लैमिनेट्स (Multilayer Laminates), एल्युमिनियम फॉयल और मेटलाइज्ड लेयर्स (चमकदार परत) पर भी रोक लगाने की बात कही गई है।
- अनुमत विकल्प: पैकेजिंग के लिए अब केवल कागज (Paper), पेपरबोर्ड, सेल्युलोज या अन्य प्राकृतिक रूप से प्राप्त सामग्रियों का उपयोग किया जा सकेगा। इसके अलावा टिन के कंटेनर और कांच की बोतलों का उपयोग जारी रह सकता है।
आवश्यकता क्यों?
- प्लास्टिक कचरा प्रबंधन: भारत में सालाना लाखों टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है, जिसमें पान मसाला के छोटे सैशे (Sachets) का बड़ा योगदान है।
- ये सैशे रीसायकल करना लगभग असंभव है क्योंकि ये प्लास्टिक और एल्युमिनियम के मिश्रण से बने होते हैं।
- Microplastics का खतरा: प्लास्टिक पैकेजिंग से खाद्य पदार्थों में माइक्रोप्लास्टिक्स के मिलने का खतरा रहता है, जो मानव शरीर के लिए अत्यंत हानिकारक है।
- सतत विकास लक्ष्य (SDG): यह कदम SDG 12 (जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन) और SDG 13 (जलवायु कार्रवाई) के अनुरूप है।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य: पान मसाला और गुटखा का सेवन पहले से ही कैंसर जैसी बीमारियों का कारण है।
- प्लास्टिक पैकेजिंग पर प्रतिबंध से न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि इन उत्पादों की उपलब्धता और आकर्षण में भी कमी आने की संभावना है।
- राज्य-स्तरीय प्रतिबंध: महाराष्ट्र, बिहार, दिल्ली और तमिलनाडु सहित कई राज्यों ने पहले ही तंबाकू युक्त पान मसाला पर प्रतिबंध लगा रखा है। FSSAI का यह नया नियम पूरे देश के लिए एक समान पैकेजिंग मानक स्थापित करेगा।
उद्योग पर प्रभाव:
- उत्पादन लागत में वृद्धि: प्लास्टिक की तुलना में पेपर-आधारित पैकेजिंग महंगी हो सकती है, जिससे छोटे निर्माताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
- तकनीकी चुनौतियां: पेपर पैकेजिंग में नमी से सुरक्षा (Moisture resistance) और उत्पाद की शेल्फ लाइफ को बनाए रखना कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
महत्वपूर्ण तथ्य:
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