Pride of Hills Scheme
संदर्भ:
हाल ही में केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ‘प्राइड ऑफ हिल्स’ (Pride of Hills) योजना के तहत नौ पहाड़ी राज्यों के लिए कुल ₹25,000 करोड़ का आवंटन किया। इसमें अरुणाचल प्रदेश को ₹4,900 करोड़, हिमाचल प्रदेश को ₹3,920 करोड़ और नागालैंड को ₹3,880 करोड़ का आवंटन किया गया।
प्राइड ऑफ हिल्स योजना के बारे मे:
- परिचय: ‘प्राइड ऑफ हिल्स’ भारत सरकार की ‘राज्यों को पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता’ (SASCI) के अंतर्गत एक विशिष्ट उप-योजना (Sub-scheme) है। यह मुख्य रूप से भारत के उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों के लिए तैयार की गई है ताकि उनकी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण आने वाली विकास बाधाओं को दूर किया जा सके।
- मंत्रालय: यह योजना केंद्रीय वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) के व्यय विभाग द्वारा प्रशासित और कार्यान्वित की जा रही है।
- शुरुआत: वर्तमान स्वरूप में इसके बड़े आवंटन की घोषणा वित्त वर्ष 2024-25 के बजट के बाद और आगामी वर्षों (2026-27 तक) के रोडमैप के साथ की गई है।
मुख्य उद्देश्य:
- पूंजीगत परिसंपत्ति निर्माण: सड़क, पुल, बिजली संयंत्र और डिजिटल बुनियादी ढांचे जैसी स्थायी संपत्तियों का निर्माण करना।
- राजकोषीय अंतराल को पाटना: पहाड़ी राज्यों में कम कर राजस्व (Low Tax Revenue) के कारण होने वाली फंड की कमी को दूर करना।
- कनेक्टिविटी: दुर्गम इलाकों को मुख्यधारा के बाजारों और सेवाओं से जोड़ना।
- सतत विकास: पर्यावरण के अनुकूल बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देना जो पहाड़ों की पारिस्थितिकी के अनुरूप हो।
प्रमुख विशेषताएँ:
- अतिरिक्त सहायता: यह राज्यों को मिलने वाले सामान्य केंद्रीय हस्तांतरण और ऋण सीमा से अतिरिक्त राशि है।
- 9 राज्यों पर ध्यान: इसमें मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, नागालैंड, उत्तराखंड, त्रिपुरा, मणिपुर, मेघालय, सिक्किम और मिजोरम शामिल हैं।
- ब्याज मुक्त घटक: इस योजना के तहत दी जाने वाली सहायता अक्सर 50-वर्षीय ब्याज मुक्त ऋण या विशेष अनुदान के रूप में होती है।
उपलब्धियां:
- अरुणाचल प्रदेश: ₹4,900 करोड़ के साथ यह सबसे बड़ा लाभार्थी बना है, जहाँ ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के साथ तालमेल बिठाकर बुनियादी ढांचा विकसित किया जा रहा है।
- उत्तराखंड: ₹3,460 करोड़ के माध्यम से पर्यटन और आपदा प्रबंधन बुनियादी ढांचे में सुधार देखा गया है।
- राजस्व सृजन: कई राज्यों ने इस फंड का उपयोग ऐसी परियोजनाओं में किया है जो भविष्य में राज्य के लिए पर्यटन या ऊर्जा के माध्यम से राजस्व उत्पन्न करेंगी।
महत्व:
- रणनीतिक महत्व: सीमावर्ती पहाड़ी राज्यों (जैसे नागालैंड, अरुणाचल) में बुनियादी ढांचे का विकास राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
- आर्थिक समानता: यह योजना सुनिश्चित करती है कि ‘पहाड़ी राज्य’ अपने कठिन भूगोल के कारण विकास की दौड़ में पीछे न छूटें।
- रोजगार: बड़े पैमाने पर होने वाले निर्माण कार्यों से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं।
- आत्मनिर्भरता: राज्यों की ऋण लेने की आवश्यकता को कम कर उन्हें आर्थिक रूप से अधिक स्वतंत्र बनाना।
