प्रधानमंत्री की पांच देशों की राजनयिक यात्रा

संदर्भ:
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15-20 मई 2026 तक पांच देशों (यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली) की ऐतिहासिक राजनयिक यात्रा सम्पन्न की, जिसमें भारत ने लगभग 40 अरब डॉलर (₹3.5 लाख करोड़) का भारी निवेश सुरक्षित किया।
पांच देशों से प्राप्त प्रमुख निवेश और रणनीतिक समझौते:
1. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) — 15 मई 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पांच दिवसीय दौरे की शुरुआत 15 मई को खाड़ी क्षेत्र के अपने सबसे विश्वसनीय साझेदार यूएई से की। अबू धाबी में उन्होंने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक की।
- प्रमुख समझौते: दोनों देशों के बीच मुख्य रूप से ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। ‘इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड’ और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के बीच भारत के रणनीतिक भंडारों में कच्चे तेल के भंडारण को बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापन (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके साथ ही वित्तीय एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय मुद्राओं (INR-AED) में व्यापार निपटान को सुदृढ़ करने पर चर्चा हुई।
- व्यापारिक लक्ष्य: दोनों देशों ने गैर-तेल द्विपक्षीय व्यापार को वर्तमान स्तर से बढ़ाकर जल्द ही 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य दोहराया। बुनियादी ढांचे और डिजिटल प्रौद्योगिकी में यूएई से $5 बिलियन के नए निवेश की प्रतिबद्धता सुनिश्चित की गई।
2. नीदरलैंड (Netherlands) — 15-17 मई 2026
यात्रा के दूसरे पड़ाव पर पीएम मोदी डच प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के निमंत्रण पर नीदरलैंड पहुंचे।
- प्रमुख समझौते: इस चरण में भारत और नीदरलैंड के बीच कुल 17 महत्वपूर्ण समझौते हुए। इसमें सेमीकंडक्टर चिप्स की निर्बाध आपूर्ति के लिए वैश्विक डच कंपनियों (जैसे ASML) के साथ सहयोग, ‘ग्रीन हाइड्रोजन रोडमैप’ और सतत जल प्रबंधन (विशेष रूप से गुजरात की जल परियोजनाओं के लिए) से संबंधित रणनीतिक समझौते शामिल हैं।
- व्यापारिक लक्ष्य: नीदरलैंड यूरोप में भारत का एक प्रमुख व्यापारिक भागीदार है। दोनों देशों ने हाई-टेक विनिर्माण, कृषि-तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा के माध्यम से द्विपक्षीय व्यापार में सालाना 15% की वृद्धि का लक्ष्य रखा है।
3. स्वीडन (Sweden) — 17-18 मई 2026
पीएम मोदी 17 मई को स्वीडन के गोटेसबर्ग पहुंचे, जहां उन्होंने स्वीडिश प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन के साथ द्विपक्षीय वार्ता का नेतृत्व किया।
- प्रमुख समझौते: नवाचार को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों ने ‘रणनीतिक नवाचार साझेदारी’ (Strategic Innovation Partnership) को और आगे बढ़ाया। इसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्टार्टअप इकोसिस्टम को जोड़ने, रक्षा विनिर्माण (Defense Co-production) और भारी मशीनरी के स्वदेशीकरण को लेकर अहम रक्षा एवं तकनीकी समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।
- व्यापारिक लक्ष्य: मेक इन इंडिया (Make in India) पहल के तहत स्वीडिश कंपनियों को भारत में रक्षा और टिकाऊ विमानन (Sustainable Aviation) क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
4. नॉर्वे (Norway) — 18-19 मई 2026
प्रधानमंत्री मोदी ने 18-19 मई को ओस्लो, नॉर्वे का दौरा किया। यह यात्रा पिछले 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली नॉर्वे यात्रा होने के कारण अत्यंत ऐतिहासिक रही।
- प्रमुख समझौते: ओस्लो में पीएम मोदी ने तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन (3rd India-Nordic Summit) में भाग लिया, जहां उन्होंने नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, स्वीडन और आइसलैंड के राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात की। मुख्य समझौते हरित परिवर्तन (Green Transition), नवीकरणीय ऊर्जा, नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy) और समुद्री परिवहन गलियारों (Shipping Corridors) के विकास पर केंद्रित थे। इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी को नॉर्वे के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, ‘रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट के ग्रैंड क्रॉस’ से भी नवाजा गया।
- व्यापारिक लक्ष्य: भारत-ईएफटीए (India-EFTA) व्यापार समझौते के बाद नॉर्वे के $1.8 ट्रिलियन के सॉवरेन वेल्थ फंड द्वारा भारतीय बुनियादी ढांचे और पवन ऊर्जा (Wind Energy) क्षेत्रों में बड़े निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ।
5. इटली (Italy) — 19-20 मई 2026
अपनी पांच देशों की यात्रा के अंतिम चरण में पीएम मोदी 19 मई की रात को इटली की राजधानी रोम पहुंचे। उन्होंने इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और राष्ट्रपति सर्जियो मैटारेला के साथ व्यापक चर्चा की।
- प्रमुख समझौते: दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को आधिकारिक रूप से ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ (Special Strategic Partnership) के स्तर पर अपग्रेड किया गया। दोनों देशों के बीच ‘संयुक्त रणनीतिक कार्ययोजना 2025-2029’ के प्रभावी क्रियान्वयन पर सहमति बनी। महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), अंतरिक्ष अनुसंधान, साइबर सुरक्षा और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग जैसे क्षेत्रों में सहयोग के समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। साथ ही पीएम मोदी को प्रतिष्ठित ‘एफएओ एग्रीकोला मेडल’ (FAO Agricola Medal) से सम्मानित किया गया।
- व्यापारिक लक्ष्य: भारत और इटली ने वर्ष 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 बिलियन यूरो से पार ले जाने का कड़ा आर्थिक लक्ष्य निर्धारित किया है।
महत्व:
- भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC): इस यात्रा में ‘आईएमईसी’ (IMEC) को गति देने पर विशेष सहमति बनी। यूएई और इटली, दोनों ही इस कॉरिडोर के प्रमुख सिरे हैं। इसके लिए वर्ष 2026 में ही पहली मंत्रिस्तरीय बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया है, जो चीन के ‘बिल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) का एक मजबूत भू-राजनीतिक विकल्प पेश करता है।
- ग्लोबल वैल्यू चेन का विविधीकरण: ‘चाइना प्लस वन’ नीति के दौर में, यूरोप की अग्रणी टेक कंपनियों द्वारा भारत में ₹3.5 लाख करोड़ के निवेश की योजना यह दर्शाती है कि भारत अब केवल एक उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और विश्वसनीय वैश्विक विनिर्माण केंद्र (Trusted Manufacturing Hub) बन रहा है।
- आर्थिक कूटनीति और स्थानीय मुद्रा: यूएई के साथ स्थानीय मुद्राओं (INR-AED) में व्यापार निपटान और यूपीआई (UPI) को वहां के ‘इंस्टेंट पेमेंट प्लेटफॉर्म’ से जोड़ने की पहल से भारत की वित्तीय संप्रभुता और कूटनीतिक पहुंच और मजबूत होगी।
- सतत विकास और जलवायु प्रतिबद्धता: नॉर्डिक देशों (नॉर्वे और स्वीडन) के साथ पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों और सर्कुलर इकोनॉमी पर समझौतों से भारत को अपनी पंचामृत प्रतिबद्धताओं (2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य) को हासिल करने में तकनीकी मदद मिलेगी।