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प्रोजेक्ट उदयक (Project UDAYAK)

प्रोजेक्ट उदयक (Project UDAYAK)

Project UDAYAK

 

संदर्भ:

सीमा सड़क संगठन (BRO) ने 1 जून 2026 को असम के डूमडूमा में अपने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट उदयक (Project UDAYAK) का 37वां स्थापना दिवस मनाया। 

प्रोजेक्ट उदयक के बारे में:

  • परिचय: परियोजना उदयक, सीमा सड़क संगठन (BRO) की एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय शाखा है, जिसे पूर्वोत्तर भारत के सबसे दूरस्थ इलाकों में सुरक्षा और विकास को गति देने के लिए स्थापित किया गया है।
  • स्थापना (Establishment): प्रोजेक्ट उदयक की स्थापना 1 जून 1990 को असम के तिनसुकिया जिले के डूमडूमा में की गई थी, जिसे आधिकारिक मंजूरी 23 मई 1989 को मिली थी। 
    • इसकी दो मुख्य टास्क फोर्स—48 BRTF और 752 BRTF—को क्रमशः प्रोजेक्ट वर्तक और प्रोजेक्ट सेवक से अलग करके बनाया गया था। 
  • नामकरण:  ‘उदयक’ का अर्थ है ‘उगता हुआ सूर्य’ (The Rising Sun), क्योंकि इस प्रोजेक्ट का कार्यक्षेत्र भारत का वह सुदूर पूर्वी हिस्सा है जहां देश में सूर्य की पहली किरणें पड़ती हैं।
  • भौगोलिक कार्यक्षेत्र: प्रोजेक्ट उदयक वर्तमान में 1,457 किलोमीटर से अधिक के रणनीतिक सड़क नेटवर्क के विकास और रखरखाव के लिए जिम्मेदार है। 
    • इसका मुख्य कार्यक्षेत्र मुख्य रूप से असम के कुछ हिस्सों और अरुणाचल प्रदेश के छह सुदूर पूर्वी जिलों में फैला हुआ है: अंजॉ (Anjaw), लोहित (Lohit), दिबांग घाटी (Dibang Valley), लोंगडिंग (Longding), तिरप (Tirap) और चांगलांग (Changlang) 
  • प्रमुख इंजीनियरिंग उपलब्धियां: प्रोजेक्ट उदयक ने कई जटिल इंजीनियरिंग चुनौतियों को पार करते हुए देश को प्रमुख संपत्तियां समर्पित की हैं, जिनमें रक्षा मंत्री द्वारा 2025 में उद्घाटित 12 रणनीतिक पुल, एक मुख्य सड़क और एक हेलीपैड शामिल हैं:

  • दिगारू ब्रिज (Digaru Bridge): लोहित और दिबांग घाटी को जोड़ने वाला एक विशाल और महत्वपूर्ण पुल।
  • ब्रह्मकुंड ब्रिज (Brahmakund Bridge): लोहित नदी पर निर्मित 410 मीटर लंबा पुल।
  • पासीघाट ब्रिज (Pasighat Bridge): सियांग नदी पर 763.50 मीटर लंबा एक प्रमुख इंजीनियरिंग चमत्कार।
  • डिब्रूगढ़ एयरफील्ड का पुनरुद्धार (Dibrugarh Airfield Resurfacing): नागरिक और सैन्य विमानन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कार्य।

प्रोजेक्ट का महत्व:

  • LAC और भारत-म्यांमार सीमा सुरक्षा: यह प्रोजेक्ट वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और भारत-म्यांमार सीमा (Indo-Myanmar Border) के संवेदनशील क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को मजबूत करता है। 
  • सीमा पर बाड़ लगाना (Border Fencing): घुसपैठ और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए म्यांमार सीमा पर महत्वपूर्ण बाड़ लगाने के बुनियादी ढांचे का निर्माण इस प्रोजेक्ट के तहत जारी है। 
  • त्वरित सैन्य तैनाती (Rapid Troop Deployment): दुर्गम पहाड़ियों में बारहमासी (All-weather) सड़कों और रणनीतिक पुलों के निर्माण से भारतीय सेना और असम राइफल्स को अग्रिम चौकियों तक रसद और भारी सैन्य वाहन पहुंचाने में आसानी होती है।
  • क्षेत्रीय एकीकरण: यह बुनियादी ढांचा भारत सरकार की एक्ट ईस्ट पॉलिसी (Act East Policy) और वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम (Vibrant Villages Programme) को गति देता है, जिससे सीमावर्ती गांवों का अलगाव समाप्त हो रहा है।
  • स्थानीय जीवन में सुधार: सुदूर बस्तियों को मुख्यधारा से जोड़ने से व्यापार, कृषि और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं तक स्थानीय जनजातीय आबादी की पहुंच बढ़ी है। 

सीमा सड़क संगठन (BRO) के बारे में:

  • मंत्रालय: यह रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करता है।
  • आदर्श वाक्य (Motto): ‘श्रमेण सर्वं साध्यम्’ (Shramena Sarvam Sadhyam) – श्रम से सब कुछ हासिल किया जा सकता है।
  • बजटीय आवंटन: सरकार ने बीआरओ की महत्ता को देखते हुए इसके पूंजीगत बजट को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बढ़ाकर ₹7,146 करोड़ कर दिया है।

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