द अर्थ प्राइज 2026 (The Earth Prize 2026)

संदर्भ:
हाल ही में तीन भारतीय छात्रों विवान छावछारिया, एरियाना अग्रवाल और अव्याना मेहता ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर ‘द अर्थ प्राइज 2026’ (The Earth Prize 2026) जीतकर इतिहास रच दिया। इन तीनों छात्रों ने अपने अभूतपूर्व नवाचार ‘प्लास-स्टिक’ (Plas-Stick) के लिए यह वैश्विक पुरस्कार हासिल किया।
‘प्लास-स्टिक’ (Plas-Stick) के बारे में:
‘प्लास-स्टिक’ (Plas-Stick) पानी से हानिकारक और अदृश्य माइक्रोप्लास्टिक्स (microplastics) को बाहर निकालने की एक अभिनव, बेहद सस्ती और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक है।
मुख्य विशेषताएं:
- मुख्य सामग्री: इस तकनीक का मुख्य आधार इमली के बेकार फेंके गए बीज हैं, जो भारत में एक आम कृषि उपशिष्ट (agricultural by-product) हैं।
- इन बीजों को पीसकर एक प्राकृतिक, जैविक रूप से नष्ट होने वाला (biodegradable) पाउडर तैयार किया जाता है।
- कार्यप्रणाली: प्लास-स्टिक की कार्यप्रणाली बेहद सरल और प्रभावी है, जो तीन चरणों में पूरी होती है:
- बाइंडिंग (An All-Natural Clumping Agent): जब इस पाउडर को दूषित पानी में मिलाया जाता है, तो यह पानी में तैर रहे अदृश्य माइक्रोप्लास्टिक कणों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
- एकत्रीकरण (Clumping): पाउडर के संपर्क में आते ही प्लास्टिक के सूक्ष्म कण आपस में चिपक जाते हैं और बड़े, दृश्यमान टुकड़ों (visible clumps) में बदल जाते हैं।
- चुंबकीय निष्कासन (Magnetic Extraction): इन जमा हुए टुकड़ों को एक साधारण हैंडहेल्ड मैग्नेट (handheld magnet) यानी हाथ में पकड़े जाने वाले चुंबक की मदद से पानी से आसानी से खींचकर बाहर निकाल लिया जाता है।
- बिजली और इंफ्रास्ट्रक्चर मुक्त: इस पूरी जल शोधन प्रक्रिया के लिए किसी भी प्रकार की बिजली (electricity), महंगे फिल्टर या जटिल मशीनरी की आवश्यकता नहीं होती।
- कम लागत (Low-Cost): रसोई के कचरे और चुंबक पर आधारित होने के कारण यह पारंपरिक वाटर फिल्टर के मुकाबले बेहद किफायती है।
- अपशिष्ट से कंचन (Circular Economy): पानी से निकाले गए माइक्रोप्लास्टिक्स को प्रकृति में वापस फेंकने के बजाय टाइल्स और कोस्टर जैसे उपयोगी सामानों में बदला जाता है।
- वैज्ञानिक सहयोग: इस प्रोजेक्ट के वैज्ञानिक परीक्षण और विकास के लिए छात्रों ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहाटी (IIT Guwahati) के शोधकर्ताओं से मार्गदर्शन प्राप्त किया। [2]
- उपलब्धि: यह तकनीक अब तक 8,000 से अधिक छात्रों और शिक्षकों तक पहुंच चुकी है।
‘द अर्थ प्राइज’ (The Earth Prize) के बारे में:
- परिचय: यह पर्यावरण स्थिरता और नवाचार के क्षेत्र में किशोरों के लिए दुनिया की सबसे बड़ी वैश्विक प्रतियोगिता है। यह 13 से 19 वर्ष के माध्यमिक स्तर के छात्रों के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण स्थिरता प्रतियोगिता है।
- उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति जागरूक लीडर बनाना, उनके नवोन्मेषी विचारों को निखारना और जलवायु परिवर्तन, कचरा प्रबंधन व जैव विविधता जैसे संकटों के समाधान खोजना है।
- शुरुआत: इस पुरस्कार की घोषणा सितंबर 2021 में की गई थी और पहला पुरस्कार मार्च 2022 में दिया गया था।
- संस्थान: इसका आयोजन जिनेवा, स्विट्जरलैंड स्थित ‘द अर्थ फाउंडेशन’ (The Earth Foundation) नामक गैर-लाभकारी संगठन द्वारा किया जाता है।
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- पात्रता: दुनिया भर के केवल 13 से 19 वर्ष के किशोर छात्र ही इसमें भाग ले सकते हैं।
- छात्र व्यक्तिगत रूप से या अधिकतम 5 छात्रों की टीम बनाकर भाग ले सकते हैं। प्रत्येक टीम के साथ एक वयस्क शिक्षक का होना अनिवार्य है।
- पात्रता: दुनिया भर के केवल 13 से 19 वर्ष के किशोर छात्र ही इसमें भाग ले सकते हैं।
चयन प्रक्रिया:
- पंजीकरण व विचार प्रस्तुति: टीमें अपने नवीन विचारों (Fresh Ideas) को आधिकारिक पोर्टल पर जमा करती हैं।
- अर्थ प्राइज स्कॉलर्स: उत्कृष्ट विचारों वाली शीर्ष टीमों को ‘अर्थ प्राइज स्कॉलर्स’ के रूप में चुना जाता है।
- क्षेत्रीय विजेता: एक विशेषज्ञ जूरी दुनिया के 7 अलग-अलग क्षेत्रों (जैसे एशिया, अफ्रीका, यूरोप आदि) से 7 क्षेत्रीय विजेताओं (Regional Winners) का चयन करती है।
- सार्वजनिक मतदान (Public Vote): इन 7 क्षेत्रीय विजेताओं में से एक ग्लोबल विनर का फैसला दुनिया भर में होने वाली ‘पब्लिक वोटिंग’ के आधार पर किया जाता है।
- पुरस्कार राशि: प्रतियोगिता में कुल $100,000 से $200,000 तक के पुरस्कार और अनुदान बांटे जाते हैं।
- प्रत्येक 7 क्षेत्रीय विजेता टीमों को अपने आइडिया को लागू (scale up) करने के लिए $12,500 की अनुदान राशि मिलती है।
- इसके अतिरिक्त, वर्ष के सर्वश्रेष्ठ मेंटर्स (Mentors of the Year) को $2,500 दिए जाते हैं।