RBI Payments Vision 2028
संदर्भ:
हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भारत के डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव करने के लिए ‘पेमेंट्स विजन 2028’ (Payments Vision 2028) दस्तावेज जारी किया है। जिसका विषय “Shaping India’s Payment Frontier” रखा गया है।
- यह विजन 2025 के ‘4Es’ (Everyone, Everywhere, Every time) के सफल क्रियान्वयन के बाद अब उपभोक्ता विश्वास (Trust), लचीलापन (Resilience) और वैश्विक प्रभुत्व (Global Dominance) पर केंद्रित है।
RBI पेमेंट्स विजन 2028 की प्रमुख विशेषताएं:
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- भुगतान स्विचिंग सेवा (PaSS): यह एक केंद्रीकृत प्रणाली है जो ग्राहकों को बैंक बदलते समय या विलय (Merger) के दौरान अपने आवर्ती भुगतान निर्देशों (Recurring Instructions) को निर्बाध रूप से स्थानांतरित करने की अनुमति देगी।
- उपयोगकर्ता नियंत्रण और सुरक्षा:
- स्विच ऑन/ऑफ सुविधा: अब कार्ड्स की तरह सभी डिजिटल भुगतान माध्यमों (जैसे UPI, IMPS) के लिए लेनदेन को सक्रिय या निष्क्रिय करने की सुविधा उपलब्ध होगी।
- साझा उत्तरदायित्व ढांचा (Shared Responsibility Framework): अनधिकृत लेनदेन के मामले में अब केवल जारीकर्ता बैंक नहीं, बल्कि लाभार्थी बैंक भी जिम्मेदारी साझा करेगा।
- MSME और व्यावसायिक सुगमता:
- TReDS इंटरऑपरेबिलिटी: एमएसएमई (MSMEs) के लिए तरलता सुनिश्चित करने हेतु ‘ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम’ के विभिन्न प्लेटफार्मों के बीच एकीकरण किया जाएगा।
- इलेक्ट्रॉनिक चेक: पारंपरिक चेक की विश्वसनीयता को डिजिटल गति के साथ जोड़ने के लिए ई-चेक की अवधारणा तलाशी जाएगी।
- वैश्विक और तकनीकी एकीकरण:
- सीमा पार भुगतान: अंतरराष्ट्रीय लेनदेन की लागत कम करने और दक्षता बढ़ाने के लिए PSS अधिनियम और FEMA के तहत ‘सिंगल-विंडो ऑथराइजेशन’ प्रस्तावित है।
- AI और डेटा: अनुसंधान-आधारित नीति निर्माण के लिए एआई-सक्षम भुगतान डेटा भंडार (Repository) का निर्माण किया जाएगा।
महत्व:
- डिजिटल संप्रभुता: विजन 2028 साइबर सुरक्षा के लिए केआरआई (Cyber Key Risk Indicators) ढांचे के माध्यम से गैर-बैंक प्रदाताओं की निगरानी को सुदृढ़ करता है।
- वित्तीय समावेशन: यह विजन ‘अंतिम छोर तक पहुंच’ से आगे बढ़कर भुगतान प्रणालियों में ‘गुणवत्ता’ और ‘भरोसे’ को प्राथमिकता देता है, जो वित्तीय समावेशन के लिए आवश्यक है।
- नियामक सैंडबॉक्स: छोटे नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए लघु भुगतान प्रणाली प्रदाताओं (SPSPs) को सतत नियामक सैंडबॉक्स के तहत मान्यता दी जाएगी।
