संसद रत्न पुरस्कार 2026

संदर्भ:
हाल ही में संसद रत्न पुरस्कार 2026 की घोषणा कर दी गई है, जिसमें इस वर्ष 12 सांसदों (10 लोकसभा और 2 राज्यसभा) तथा 4 संसदीय समितियों को उनकी उत्कृष्ट विधायी कार्यप्रणाली के लिए चुना गया है। यह इस नागरिक सम्मान का 16वां संस्करण है, जिसका मुख्य समारोह जुलाई 2026 में नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।
संसद रत्न पुरस्कार क्या है?
- परिचय: संसद रत्न पुरस्कार (Sansad Ratna Award) भारत में संसद के उन उत्कृष्ट सदस्यों (सांसदों) को दिया जाने वाला एक प्रतिष्ठित सम्मान है, जो संसद में अपने प्रदर्शन, सक्रियता, उपस्थिति, बहस में भागीदारी और जनहित के मुद्दों को उठाने में सर्वश्रेष्ठ रहते हैं।
- प्रेरणा: इस पुरस्कार की स्थापना वर्ष 2010 में भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के सुझाव पर की गई थी।
- उन्होंने इच्छा व्यक्त की थी कि सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले भारतीय सांसदों को सम्मानित करने के लिए नागरिक समाज की ओर से एक मंच होना चाहिए।
- संस्थापक निकाय: इसे चेन्नई स्थित गैर-सरकारी संगठन (NGO) ‘प्राइम पॉइंट फाउंडेशन’ (Prime Point Foundation) और ई-पत्रिका ‘प्रीसेंस’ द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान किया जाता है।
- मुख्य उद्देश्य: सांसदों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना, विधायी जवाबदेही सुनिश्चित करना और लोकतंत्र के सर्वोच्च सदन में जनहित के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने के लिए उन्हें प्रेरित करना।
- चयन प्रक्रिया: संसद रत्न पुरस्कार पूरी तरह से गैर-पक्षपातपूर्ण और वस्तुनिष्ठ डेटा (Objective Data) पर आधारित होता है। इसके लिए चयन समिति निम्नलिखित मानदंडों का मूल्यांकन करती है:
- सदन में उपस्थिति (Attendance): सत्रों के दौरान सांसद की भौतिक उपस्थिति का प्रतिशत।
- प्रश्नों की संख्या (Questions Raised): तारांकित और अतारांकित प्रश्नों के माध्यम से कार्यपालिका की जवाबदेही तय करना।
- बहस में भागीदारी (Participation in Debates): विधायी विधेयकों और बजट वार्ताओं में सक्रिय योगदान।
- निजी विधेयक (Private Members’ Bills): गैर-सरकारी सदस्यों द्वारा पेश किए गए नीतिगत कानून।
- अंतिम चयन: यह डेटा मुख्य रूप से लोकसभा/राज्यसभा सचिवालय और पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च (PRS Legislative Research) से प्राप्त किया जाता है।
- विजेताओं का अंतिम चयन शीर्ष राजनेताओं, पूर्व न्यायाधीशों और नागरिक समाज के प्रतिष्ठित सदस्यों की एक जूरी (Jury Committee) द्वारा किया जाता है।
संसद रत्न पुरस्कार 2026: विजेताओं की संपूर्ण सूची
1. व्यक्तिगत श्रेणी में विजेता सांसद (Individual Category):
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क्र.सं. |
सांसद का नाम |
सदन |
राज्य / निर्वाचन क्षेत्र |
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1 |
जगदंबिका पाल (पूर्व मुख्यमंत्री) |
लोकसभा |
उत्तर प्रदेश |
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2 |
पी.पी. चौधरी |
लोकसभा |
राजस्थान |
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3 |
निशिकांत दुबे |
लोकसभा |
झारखंड |
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4 |
डॉ. श्रीकांत एकनाथ शिंदे |
लोकसभा |
महाराष्ट्र (कल्याण) |
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5 |
नरेश गणपत म्हस्के |
लोकसभा |
महाराष्ट्र (ठाणे) |
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6 |
प्रवीण पटेल |
लोकसभा |
उत्तर प्रदेश |
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7 |
बिद्युत बरन महातो |
लोकसभा |
झारखंड |
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8 |
लुम्बाराम चौधरी |
लोकसभा |
राजस्थान |
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9 |
डॉ. हेमंत विष्णू सावरा |
लोकसभा |
महाराष्ट्र (पालघर) |
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10 |
स्मिता उदय वघ |
लोकसभा |
महाराष्ट्र (जळगाव) |
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11 |
डॉ. मेधा विश्राम कुलकर्णी |
राज्यसभा |
महाराष्ट्र |
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12 |
नरहरी अमीन (पूर्व उपमुख्यमंत्री) |
राज्यसभा |
गुजरात |
2. सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली संसदीय समितियाँ (Parliamentary Committees):
संसदीय लोकतंत्र में समितियों को ‘लघु संसद’ (Mini-Parliament) कहा जाता है। इस वर्ष 4 स्थायी समितियों को उनके उत्कृष्ट विधायी निरीक्षण और रिपोर्ट गुणवत्ता के लिए चुना गया है:
- कृषि समिति (Committee on Agriculture): अध्यक्षता – डॉ. चरणजितसिंग चन्नी
- वित्त समिति (Finance Committee): अध्यक्षता – भर्तृहरी महताब
- ग्रामीण विकास और पंचायती राज समिति: अध्यक्षता – सप्तगिरी शंकर उलाका
- कोळसा और खाण समिति (Coal and Mines Committee): अध्यक्षता – अनुराग ठाकुर
महत्व:
- विधायी प्रदर्शन में सुधार: अक्सर भारतीय संसद में व्यवधान (Disruptions) और कम बैठकों की आलोचना होती है। ऐसे समय में, नागरिक समाज द्वारा दिया जाने वाला यह पुरस्कार सांसदों को रचनात्मक कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।
- संसदीय समितियों का सुदृढ़ीकरण: समितियां दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विधेयकों की सूक्ष्म समीक्षा करती हैं। इन समितियों को पुरस्कृत करना संसदीय लोकतंत्र के संस्थागत ढांचे को मजबूती देता है।
- नागरिक समाज और लोकतंत्र का अंतर्संबंध: यह पुरस्कार इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि कैसे सिविल सोसायटियाँ (NGOs) देश की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सुधार के लिए ‘वॉचडॉग’ और उत्प्रेरक दोनों की भूमिका निभा सकती हैं।