यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चिंग सिस्टम सूर्यास्त्र

संदर्भ:
हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने महाराष्ट्र के शिरडी में भारत के पहले स्वदेशी 300-किमी ‘यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चिंग सिस्टम’ (Universal Rocket Launching System) ‘सूर्यास्त्र’ (Suryastra) को हरी झंडी दिखाकर राष्ट्र को समर्पित किया।
सूर्यास्त्र के बारे में:
सूर्यास्त्र एक अत्याधुनिक यूनिवर्सल मल्टी-कैलिबर गाइडेड रॉकेट और मिसाइल लॉन्चिंग प्लेटफॉर्म है। ‘यूनिवर्सल’ का अर्थ है कि यह एकल प्लेटफॉर्म बिना किसी बड़े हार्डवेयर बदलाव के अलग-अलग व्यास (Calibres) और प्रकार के रॉकेटों, गाइडेड मिसाइलों तथा आधुनिक ड्रोन्स को फायर करने में सक्षम है।
- ‘सूर्यास्त्र’ (Suryastra) भारत का पहला स्वदेशी, बहु-कैलिबर (Multi-Calibre) और लॉन्ग-रेंज यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चिंग सिस्टम है।
मुख्य उद्देश्य:
- डीप-स्ट्राइक क्षमता: दुश्मन के नियंत्रण केंद्रों, रडार प्रतिष्ठानों, वायुसेना ठिकानों और रसद केंद्रों (Logistics Hubs) को सीमा पार दूर से ही नष्ट करना।
- सामरिक प्रतिरोध (Deterrence): वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और नियंत्रण रेखा (LoC) पर चीन और पाकिस्तान के खिलाफ पारंपरिक रक्षा प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ करना।
- लागत प्रभावी गोलाबारी: सुखोई या लड़ाकू विमानों को जोखिम में डाले बिना, सतह-से-सतह पर भारी मारक क्षमता (Stand-off Firepower) प्रदान करना।
विकास एवं निर्माणकर्ता:
- सार्वजनिक-निजी साझेदारी (PPP): सूर्यास्त्र का निर्माण पुणे स्थित निजी रक्षा फर्म NIBE लिमिटेड द्वारा किया गया है।
- तकनीकी सहयोग: इसे इजरायल की वैश्विक रक्षा कंपनी एल्बिट सिस्टम्स (Elbit Systems) के प्रसिद्ध PULS (Precise & Universal Launching System) आर्किटेक्चर के आधार पर भारत में ही विकसित किया गया है। जुलाई 2025 में इसके लिए ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (ToT) समझौता हुआ था।
- फास्ट-ट्रैक खरीद: भारतीय सेना ने रणनीतिक जरूरतों को देखते हुए जनवरी 2026 में ₹293 करोड़ के अनुबंध के तहत ‘आपातकालीन खरीद’ (Emergency Procurement) शक्तियों का उपयोग कर इसका ऑर्डर दिया था।
तकनीकी विशेषताएं:
- विस्तारित मारक रेंज: यह मुख्य रूप से दो वैरिएंट्स में काम करता है: 150 किलोमीटर (EXTRA रॉकेट) और 300 किलोमीटर (Predator Hawk मिसाइल)।
- अचूक सटीकता (High Precision): ओडिशा के चांदीपुर एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) में हुए सफल परीक्षणों में इसके 150 किमी वेरिएंट ने 1.5 मीटर और 300 किमी वेरिएंट ने 2 मीटर का सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) हासिल किया। इसका अर्थ है कि यह लंबी दूरी पर भी पिन-पॉइंट निशाना लगा सकता है।
- मल्टी-कैलिबर पॉड्स: यह एक ही लॉन्चर से 122mm (Grad), 160mm (LAR), और 306mm जैसी विभिन्न श्रेणियों के रॉकेटों को दाग सकता है।
- लोइटरिंग मूनिशन क्षमता: यह प्रणाली 100 किलोमीटर तक की रेंज वाले सुसाइड ड्रोन (Kamikaze Drones) और लोइटरिंग मूनिशन्स भी हवा में लॉन्च कर सकती है।
- शूट-एंड-स्कूट तकनीक: 6×6 या 8×8 अत्यधिक गतिशील बख्तरबंद पहिये वाले वाहनों (जैसे टाटा या टाट्रा चेसिस) पर माउंट होने के कारण यह हमला करने के तुरंत बाद अपनी स्थिति बदलने में सक्षम है, जिससे यह दुश्मन के जवाबी रडार हमलों से बच जाता है।
रणनीतिक महत्व:
- स्वदेशी रक्षा विनिर्माण: अभी तक भारत में रॉकेट और मिसाइल निर्माण मुख्य रूप से DRDO और OFB/BDL जैसे सार्वजनिक उपक्रमों तक सीमित था। सूर्यास्त्र पहली ऐसी रणनीतिक प्रणाली है जिसे भारतीय निजी क्षेत्र ने बड़े पैमाने पर तैयार किया है। यह ‘मेक इन इंडिया’ का मील का पत्थर है।
- सैन्य गोलाबारी में अंतर को पाटना: यह प्रणाली भारतीय तोपखाने (Artillery) की स्वदेशी पिनाका (Pinaka – रेंज 40 से 90 किमी) और भारी बैलिस्टिक मिसाइल (जैसे प्रलय – रेंज 150-500 किमी) के बीच के खाली स्थान को सटीकता के साथ पूर्ण करती है।
- आधुनिक युद्धनीति के अनुकूल: रूस-यूक्रेन युद्ध ने यह साबित किया है कि लंबी दूरी की अत्यधिक सटीक रॉकेट प्रणालियां (जैसे अमेरिका की HIMARS) युद्ध का पासा पलट सकती हैं। सूर्यास्त्र भारतीय सेना को वैसी ही सटीक और लचीली मारक क्षमता प्रदान करता है।
- वैश्विक निर्यात की संभावनाएं: लागत प्रभावी विनिर्माण और कम सीईपी (<2m CEP) के कारण, भारत आने वाले समय में वैश्विक रक्षा बाजार में मित्र देशों को इसका निर्यात कर सकेगा, जिससे भारत ‘रक्षा आयातक’ से ‘रक्षा निर्यातक’ बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।