शुक्रयान मिशन

संदर्भ:
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वीडन (गॉथेनबर्ग) यात्रा के दौरान स्वीडन ने भारत के आगामी ‘शुक्रयान’ (वीनस ऑर्बिटर मिशन – VOM) के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
- स्वीडिश इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस फिजिक्स (IRF) इस मिशन के लिए ‘वीनसियन न्यूट्रल्स एनालाइज़र’ (Venusian Neutrals Analyser – VNA) विकसित करेगा।
- इससे पहले 2008-09 में भारत के चंद्रयान-1 मिशन पर स्वीडन का ‘SARA’ (Sub-keV Atom Reflecting Analyser) पेलोड भेजा गया था, जिसने चंद्रमा पर सौर प्लाज्मा के प्रभावों का अध्ययन किया था।
शुक्रयान मिशन के बारे में:
शुक्रयान मिशन (वीनस ऑर्बिटर मिशन – VOM) भारत का पहला और इसरो (ISRO) का दूसरा अंतर-ग्रह (Interplanetary) मिशन है।
- केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा सितंबर 2024 में ₹1,236 करोड़ के कुल बजट के साथ स्वीकृत इस महत्वाकांक्षी मिशन का उद्देश्य ‘पृथ्वी की जुड़वां बहन’ कहे जाने वाले शुक्र ग्रह के रहस्यों को उजागर करना है।
- अप्रैल 2026 में इसके प्रारंभिक डिजाइन रिव्यू (PDR) के सफल समापन के बाद, यह मिशन अपने निर्धारित समय पर आगे बढ़ रहा है।
मिशन की समयरेखा:
- प्रक्षेपण तिथि (Launch Date): इसरो ने आधिकारिक तौर पर 29 मार्च 2028 को प्रक्षेपण का लक्ष्य रखा है।
- प्रक्षेपण यान (Rocket): मिशन को भारत के सबसे शक्तिशाली रॉकेट LVM-3 (Launch Vehicle Mark-3) द्वारा प्रक्षेपित किया जाएगा।
- यात्रा अवधि: अंतरिक्ष यान 112 दिनों की यात्रा के बाद 19 जुलाई 2028 को शुक्र की कक्षा में प्रवेश (Venus Orbit Insertion) करेगा।
- कक्षा और एयरोब्रेकिंग तकनीक: शुरुआत में यान 500 किमी × 60,000 किमी की दीर्घवृत्ताकार कक्षा में स्थापित होगा।
- इसके बाद, इसरो 6 से 8 महीनों तक ‘एयरोब्रेकिंग’ (Aerobraking) तकनीक का उपयोग करके इसे विज्ञान संचालन के लिए 200 किमी × 600 किमी की निचली ध्रुवीय कक्षा में लाएगा। मिशन का परिचालन जीवनकाल 5 वर्ष प्रस्तावित है।
वैज्ञानिक पेलोड और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग:
शुक्रयान अपने साथ कुल 19 वैज्ञानिक उपकरण (Payloads) ले जाएगा, जिसमें 16 भारतीय, 2 सहयोगात्मक और 1 पूर्णतः अंतर्राष्ट्रीय पेलोड शामिल हैं. प्रमुख पेलोड इस प्रकार हैं:
- VSAR (Venus Synthetic Aperture Radar): यह नासा के पुराने मैगलन मिशन की तुलना में 4 गुना अधिक रिज़ॉल्यूशन के साथ बादलों के पार देखकर शुक्र की सतह की मैपिंग करेगा।
- ग्राउंड पेनिट्रेटिंग राडार (Sub-surface Radar): विश्व में पहली बार शुक्र ग्रह की सतह के नीचे (Sub-surface) कई सौ मीटर तक की परतों और ज्वालामुखी संरचनाओं का अध्ययन किया जाएगा।
- VIRAL (फ्रांस-रूस सहयोग): यह उपकरण शुक्र के वायुमंडल में फॉस्फीन (Phosphine) गैस और अन्य सूक्ष्म जैविक जीवन (Microscopic Life) के संभावित संकेतों की खोज करेगा।
- VNA (वीनसियन न्यूट्रल्स एनालाइज़र – स्वीडन): यह सौर हवाओं और शुक्र के प्लाज्मा वातावरण के बीच होने वाली अंतःक्रियाओं का गहन अध्ययन करेगा।
मिशन के मुख्य उद्देश्य:
- वायुमंडलीय रसायन विज्ञान: शुक्र के सघन, विषैले और सल्फ्यूरिक एसिड से बने बादलों की रासायनिक संरचना और वायुमंडलीय गतिशीलता को समझना।
- भूवैज्ञानिक और विवर्तनिक गतिविधि: ग्रह पर सक्रिय ज्वालामुखियों (Active Volcanoes) और भूकंपीय गतिविधियों (Seismic Activity) की खोज करना।
- जलवायु परिवर्तन का मॉडल: यह समझना कि कैसे एक समय रहने योग्य (Habitable) माना जाने वाला ग्रह तीव्र ‘रनवे ग्रीनहाउस प्रभाव’ के कारण अत्यधिक गर्म (460°C) पिंड में बदल गया। यह डेटा पृथ्वी के भविष्य के जलवायु मॉडलिंग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
महत्व:
- बजट विभाजन: कुल ₹1,236 करोड़ के बजट में से ₹824 करोड़ विशेष रूप से अंतरिक्ष यान के विकास, पेलोड और ग्राउंड स्टेशन सपोर्ट के लिए आवंटित हैं, जबकि शेष राशि प्रक्षेपण यान के लिए है। यह वैश्विक स्तर पर सबसे किफायती अंतर-ग्रह मिशनों में से एक है।
- स्वदेशी क्षमता व रोजगार: मिशन के माध्यम से भारतीय शैक्षणिक संस्थानों और निजी उद्योगों की भागीदारी बढ़ेगी, जिससे उन्नत विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार और तकनीकी नवाचार (Technology Spin-off) को बढ़ावा मिलेगा।