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SIPRI रिपोर्ट 2026

SIPRI रिपोर्ट 2026 | SIPRI Report 2026

SIPRI Report 2026

संदर्भ:

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) द्वारा जारी की गई नवीनतम रिपोर्ट “Trends in World Military Expenditure, 2025” के अनुसार, भारत वैश्विक सैन्य खर्च के मामले में दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा देश बन गया है। 

वर्ष 2025 में भारत का सैन्य व्यय 92.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹7.66 – ₹8.66 लाख करोड़) रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.9% की वृद्धि दर्शाता है। 

SIPRI रिपोर्ट 2026 के प्रमुख वैश्विक बिंदु:

  • रिकॉर्ड वैश्विक खर्च: वर्ष 2025 में दुनिया का कुल सैन्य खर्च 2,887 बिलियन डॉलर (2.89 ट्रिलियन डॉलर) के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया। यह वैश्विक जीडीपी का लगभग 2.5% है。
  • लगातार वृद्धि: यह वैश्विक सैन्य व्यय में वृद्धि का लगातार 11वां वर्ष है。
  • शीर्ष 5 देश: वैश्विक सैन्य खर्च का 58% हिस्सा केवल पांच देशों—अमेरिका, चीन, रूस, जर्मनी और भारत का है。
  • अमेरिका और चीन का दबदबा: अमेरिका ($954 बिलियन) पहले स्थान पर बना हुआ है, हालांकि उसके खर्च में 7.5% की गिरावट आई है। वहीं चीन ($336 बिलियन) ने लगातार 31वें वर्ष अपने खर्च में वृद्धि की है। [1, 2, 4, 6, 7, 8]

भारत के संदर्भ में विस्तृत विश्लेषण:

  1. खर्च में वृद्धि के मुख्य कारण:
  • क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियां: रिपोर्ट के अनुसार, मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ एक संक्षिप्त लेकिन तीव्र संघर्ष (जिसमें ड्रोन, विमान और मिसाइलों का उपयोग हुआ) भारत के बढ़े हुए खर्च का एक प्राथमिक कारण रहा।
  • ऑपरेशन सिंदूर: इस ऑपरेशन के बाद भारत ने अपनी रक्षा तैयारियों, विशेषकर ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम को आधुनिक बनाने पर अधिक ध्यान केंद्रित किया है।
  • आधुनिकीकरण: भारतीय सशस्त्र बलों को नवीनतम तकनीक, लड़ाकू विमानों और मिसाइल प्रणालियों से लैस करने के लिए बजट का एक बड़ा हिस्सा आवंटित किया गया है। 
  1. आयात-निर्यात और आत्मनिर्भरता:
  • आयात में गिरावट: रिपोर्ट के अनुसार, 2021-25 की अवधि में भारत के वैश्विक हथियार आयात में 4% की गिरावट दर्ज की गई है, जो रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ की ओर बढ़ते कदमों को दर्शाता है।
  • निर्यात लक्ष्य: भारत अब केवल आयातक नहीं, बल्कि एक निर्यातक बनने की ओर अग्रसर है, जिसका लक्ष्य 2025 तक ₹35,000 करोड़ का रक्षा निर्यात हासिल करना है।
  1. चुनौतियां:
  • पेंशन का बोझ: रक्षा बजट का लगभग 23-24% हिस्सा केवल पेंशन भुगतान में चला जाता है, जो आधुनिकीकरण के लिए उपलब्ध पूंजीगत परिव्यय (Capital Outlay) को सीमित करता है।
  • विकास बनाम सुरक्षा: कुछ अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि सैन्य खर्च में यह वृद्धि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे सामाजिक कल्याण क्षेत्रों के बजट की कीमत पर हो सकती है।

4. रणनीतिक निहितार्थ:

SIPRI 2026 की यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) बनाए रखने और दोहरे मोर्चे (Two-front war) की चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी सैन्य शक्ति को निरंतर सुदृढ़ कर रहा है। रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहल भविष्य में आयात पर निर्भरता को और कम कर सकती हैं। 

पड़ोसी देशों की स्थिति:

  • चीन: $336 बिलियन के साथ दूसरे स्थान पर, जो भारत के खर्च से लगभग 3.6 गुना अधिक है।
  • पाकिस्तान: सैन्य खर्च 11% बढ़कर $11.9 बिलियन हो गया है, जिसका मुख्य कारण चीन से नए विमानों और मिसाइलों की खरीद है। 

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