RBI ने खराब ऋणों की पहचान को सख्त किया | RBI tightens identification of bad loans

संदर्भ:
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने हाल ही में अपनी नई मास्टर डायरेक्शन जारी की है, जिसका उद्देश्य भारत के खराब लोन संबंधी नियमों को वैश्विक मानकों (जैसे कि IFRS 9) के अनुरूप बनाना है। ये नए नियम 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होंगे।
RBI की नई मास्टर डायरेक्शन के मुख्य बिंदु:
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- प्रमुख बदलाव: अब तक भारतीय बैंक ‘Incurred Loss’ मॉडल पर काम करते थे, जिसमें प्रावधान (Provisioning) तब किया जाता था जब कर्ज वास्तव में डिफॉल्ट (90 दिन से अधिक बकाया) हो जाता था।
- अब बैंकों को ऋण देने के समय से ही भविष्य के संभावित नुकसान का आकलन करना होगा और उसके अनुसार अग्रिम प्रावधान रखने होंगे।
- प्रमुख बदलाव: अब तक भारतीय बैंक ‘Incurred Loss’ मॉडल पर काम करते थे, जिसमें प्रावधान (Provisioning) तब किया जाता था जब कर्ज वास्तव में डिफॉल्ट (90 दिन से अधिक बकाया) हो जाता था।
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एसेट वर्गीकरण के नए कड़े मानदंड: RBI ने ‘एक डिफ़ॉल्ट, सभी डिफ़ॉल्ट’ की नीति को कड़ा किया है:
- समग्र वर्गीकरण: यदि किसी उधारकर्ता का एक भी ऋण खाता NPA (Non-Performing Asset) घोषित होता है, तो बैंक के पास मौजूद उसके सभी ऋण खातों को NPA माना जाएगा।
- अपग्रेडेशन नियम: किसी उधारकर्ता को फिर से ‘Standard Asset’ की श्रेणी में तभी लाया जाएगा जब वह अपने सभी ऋण सुविधाओं के पूरे बकाया और ब्याज का भुगतान कर दे।
- 90-दिन का नियम: NPA वर्गीकरण के लिए 90 दिनों की ओवरड्यू अवधि का मानक वैश्विक मानदंडों के अनुसार यथावत रखा गया है।
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प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग (परियोजना वित्तपोषण) के लिए नए नियम: RBI ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (Infrastructure Projects) के लिए विशेष रूप से सख्त प्रावधान प्रस्तावित किए हैं:
- प्रोजेक्ट चरण प्रावधान: निर्माण चरण के दौरान बैंकों को ऋण राशि का 5% प्रावधान के रूप में अलग रखना होगा (जो पहले केवल 0.4% था)।
- परिचालन चरण: एक बार जब परियोजना चालू हो जाती है और नकद प्रवाह (Cash Flow) सकारात्मक हो जाता है, तो इस प्रावधान को घटाकर 1% से 2.5% किया जा सकता है।
- NPV मूल्यांकन: ऋण देने से पहले परियोजना का Net Present Value (NPV) सकारात्मक होना अनिवार्य है।
वर्तमान स्थिति:
- ऐतिहासिक सुधार: दिसंबर 2025 तक भारत का Gross NPA अनुपात 2% के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुँच गया है।
- पूंजी पर्याप्तता (Capital Adequacy): दिसंबर 2025 तक बैंकों का CRAR (Capital to Risk Weighted Assets Ratio) 16.91% रहा, जो नियामक आवश्यकता से काफी अधिक है।