Small Hydro Power Development Scheme

संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘लघु जल विद्युत (Small Hydro Power – SHP) विकास योजना’ को मंजूरी दी है। यह योजना भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने और ग्रामीण क्षेत्रों में विकेंद्रीकृत ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
लघु जलविद्युत विकास योजना के बारे मे:
- लघु जलविद्युत विकास योजना भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा तैयार किया गया एक व्यापक वित्तीय और रणनीतिक प्रोत्साहन ढांचा है।
- यह एक सहायता कार्यक्रम है जिसे 1 मेगावाट से 25 मेगावाट क्षमता की छोटी जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण, पुनरुद्धार और विस्तार को गति देने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- इसका प्रबंधन नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा किया जाएगा।
मुख्य उद्देश्य:
- ऊर्जा सुरक्षा: दूरदराज के ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना।
- नवीकरणीय लक्ष्य: 2030 तक भारत के 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा लक्ष्य में योगदान देना।
- निजी निवेश: इस क्षेत्र में लगभग ₹15,000 करोड़ के निजी निवेश को आकर्षित करना।
- स्वदेशी विनिर्माण: ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत 100% घरेलू मशीनरी और उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा देना।
- रोजगार: परियोजना अवधि के दौरान 51 लाख श्रम दिवसों का सृजन करना।
मुख्य विशेषताएं:
- वित्तीय परिव्यय: योजना के लिए ₹2,584.60 करोड़ का कुल बजट आवंटित किया गया है।
- समयावधि: यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक प्रभावी रहेगी।
- लक्ष्य क्षमता: 5 वर्षों में 1,500 मेगावाट की नई क्षमता जोड़ना।
- वित्तीय सहायता (CFA):
- उत्तर-पूर्वी और सीमावर्ती जिले: अधिकतम ₹30 करोड़ प्रति परियोजना (या लागत का 30%)।
- अन्य क्षेत्र: अधिकतम ₹20 करोड़ प्रति परियोजना (या लागत का 20%)।
- DPR सहायता: भविष्य की परियोजनाओं के लिए 200 विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने हेतु ₹30 करोड़ का प्रावधान।
- निगरानी: मंत्रालय द्वारा एक समर्पित पोर्टल के माध्यम से परियोजनाओं की प्रगति की रियल-टाइम ट्रैकिंग की जाएगी।
- तकनीकी मॉडल: यह योजना ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ (Run-of-the-river) मॉडल पर आधारित है। इसमें बड़े बांधों के निर्माण की आवश्यकता नहीं होती।
महत्त्व:
- पर्यावरणीय स्थिरता: रन-ऑफ-द-रिवर तकनीक प्राकृतिक नदी प्रवाह का उपयोग करती है, जिससे वनों की कटाई और पारिस्थितिक असंतुलन का जोखिम कम होता है।
- आत्मनिर्भर भारत: इस योजना के तहत संयंत्रों में 100% स्वदेशी मशीनरी और उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे घरेलू विनिर्माण क्षेत्र (MSMEs) को बल मिलेगा।
- क्षेत्रीय विकास: हिमालयी राज्यों (जैसे हिमाचल, उत्तराखंड) और उत्तर-पूर्व (अरुणाचल प्रदेश) में जल संसाधनों की अपार क्षमता है। यह योजना इन दुर्गम क्षेत्रों में ‘ग्रिड’ की निर्भरता कम कर स्थानीय ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाएगी।
भारत में लघु जल विद्युत की स्थिति
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