सर्वोच्च न्यायालय बार एसोसिएशन

संदर्भ:
हाल ही में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय बार एसोसिएशन (SCBA) में 2027-28 के सत्र से एक स्थायी ‘महिला-विशिष्ट’ उपाध्यक्ष (Vice-President) पद का प्रस्ताव रखा।
सर्वोच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के बारे मे:
सर्वोच्च न्यायालय बार एसोसिएशन (Supreme Court Bar Association – SCBA) भारत की एक प्रमुख और प्रभावशाली कानूनी संस्था है, जो देश के सर्वोच्च न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों का प्रतिनिधित्व करती है।
- SCBA की स्थापना भारत के सर्वोच्च न्यायालय के अस्तित्व में आने (26 जनवरी 1950) के साथ ही हुई थी।
- इसके पहले अध्यक्ष श्री एम.सी. सीतलवाड़ थे, जो भारत के पहले महान्यायवादी (Attorney General) भी थे।
- स्थापना के समय से ही इसमें एम.सी. सीतलवाड़, सी.के. दफ्तरी और के.एम. मुंशी जैसे दिग्गज कानूनविद शामिल रहे हैं।
- 1951 में, इसकी कार्यकारी समिति ने संविधान के पहले संशोधन का कड़ा विरोध किया था, जो मौलिक अधिकारों की रक्षा के प्रति इसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
संरचना और प्रबंधन:
SCBA का प्रबंधन एक निर्वाचित कार्यकारी समिति (Executive Committee) द्वारा किया जाता है। इसकी संरचना निम्नलिखित है:
- अध्यक्ष (President): वर्तमान में वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह (2025-26) इस पद पर हैं।
- उपाध्यक्ष (Vice-President): वर्तमान में राहुल कौशिक इस पद पर कार्यरत हैं।
- मानद सचिव (Honorary Secretary): वर्तमान में प्रज्ञा बघेल इस पद की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
- समिति के सदस्य: इसमें 15 अन्य सदस्य होते हैं, जिनमें से कम से कम 6 सदस्य वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocates) होने अनिवार्य हैं।
सदस्यता के प्रकार:
- निवासी सदस्य (Resident Members): वे जो नियमित रूप से दिल्ली में अभ्यास करते हैं।
- गैर-निवासी सदस्य (Non-resident Members): वे वकील जो दिल्ली से बाहर अभ्यास करते हैं लेकिन सर्वोच्च न्यायालय में मामलों के लिए आते हैं।
- सहयोगी सदस्य (Associate Members): वे वकील जो सीधे अभ्यास नहीं करते लेकिन संस्था से जुड़े हैं।
- गैर-सक्रिय सदस्य (Non-Active Members): वे सदस्य जो वर्तमान में सक्रिय वकालत नहीं कर रहे हैं।
SCBA के प्रमुख कार्य:
- वकीलों का प्रतिनिधित्व: यह बार और बेंच (न्यायाधीशों) के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता है और वकीलों के हितों एवं विशेषाधिकारों की रक्षा करता है।
- कानूनी सुधार: यह संस्थान नीतिगत बदलावों और कानूनी सुधारों पर न्यायपालिका और सरकार को मार्गदर्शन प्रदान करता है।
- कल्याणकारी योजनाएं: सदस्यों के लिए चिकित्सा सहायता, पुस्तकालय सुविधाएं और वित्तीय सहायता जैसी कल्याणकारी गतिविधियां संचालित की जाती हैं।
- व्यावसायिक विकास: समय-समय पर सेमिनार, कार्यशालाएं और ‘लेक्चर सीरीज’ का आयोजन किया जाता है ताकि वकीलों के ज्ञान को अद्यतन रखा जा सके।
हालिया ऐतिहासिक बदलाव (2024-2026):
- महिलाओं के लिए आरक्षण (2024-25): कोर्ट ने कार्यकारी समिति में महिलाओं के लिए 1/3 आरक्षण अनिवार्य किया है। इसके तहत 2026-27 के लिए सचिव का पद महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया है [पिछला डेटा]।
- स्थायी महिला उपाध्यक्ष (2026): मई 2026 में, सुप्रीम कोर्ट ने बार एसोसिएशन में महिलाओं के नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए 2027-28 के सत्र से एक स्थायी महिला उपाध्यक्ष पद बनाने का प्रस्ताव दिया है।
SCBA बनाम बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI):
- प्रकृति: SCBA एक स्वैच्छिक व्यावसायिक संघ है जो ‘सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860’ के तहत पंजीकृत है, जबकि BCI एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) है जो ‘अधिवक्ता अधिनियम, 1961’ के तहत स्थापित है।
- अधिकार क्षेत्र: BCI पूरे भारत के वकीलों के लिए पेशेवर आचरण के नियम बनाता है और उनके लाइसेंस को निलंबित कर सकता है। SCBA का अधिकार क्षेत्र केवल सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों और उनके पेशेवर सहयोग तक सीमित है।