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सर्वोच्च न्यायालय के सड़क सुरक्षा दिशा-निर्देश 2026

सर्वोच्च न्यायालय के सड़क सुरक्षा दिशा-निर्देश 2026 | Supreme Court Road Safety Guidelines 2026

Supreme Court Road Safety Guidelines 2026

संदर्भ:

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने सड़क सुरक्षा पर व्यापक फैसला सुनाते हुए देश भर के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 21 के तहत ‘गरिमा के साथ जीने का अधिकार’ में सुरक्षित सड़कों पर यात्रा करना भी शामिल है। 

नवीनतम दिशा-निर्देशों के मुख्य बिंदु:

  • अवैध पार्किंग पर पूर्ण प्रतिबंध: नेशनल हाईवे के मुख्य मार्ग (कैरिजवे) या पक्के शोल्डर पर भारी और व्यावसायिक वाहनों का रुकना या पार्क होना पूरी तरह प्रतिबंधित है। वाहन केवल निर्धारित पार्किंग स्थलों या ‘ले-बाय’ (lay-by) पर ही रुक सकेंगे।
  • अवैध निर्माणों पर कार्रवाई: हाईवे के ‘राइट ऑफ वे’ (Right of Way) के भीतर आने वाले सभी अवैध ढाबों, दुकानों और व्यावसायिक संरचनाओं को 60 दिनों के भीतर हटाने का आदेश दिया गया है।
  • हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स: हर जिले में एक ‘हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स’ का गठन किया जाएगा, जिसमें प्रशासन, पुलिस और NHAI के अधिकारी शामिल होंगे।
  • आपातकालीन चिकित्सा सुविधा: हर 75 किलोमीटर पर एम्बुलेंस और क्रेन की तैनाती सुनिश्चित करनी होगी ताकि ‘गोल्डन ऑवर’ में पीड़ितों को मदद मिल सके।
  • तकनीकी निगरानी: नियमों का प्रवर्तन एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS), कैमरों और GPS ट्रैकिंग के माध्यम से किया जाएगा। 
  • लाइसेंस और NOC: राजमार्ग सुरक्षा जोन के भीतर किसी भी नई व्यावसायिक गतिविधि के लिए NHAI या PWD की पूर्व मंजूरी अनिवार्य कर दी गई है। मौजूदा लाइसेंसों की 30 दिनों के भीतर समीक्षा की जाएगी।
  • ब्लैकस्पॉट सुधार: दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (Blackspots) की पहचान कर अगले 45 दिनों के भीतर वहां उचित प्रकाश व्यवस्था, संकेत और गति प्रवर्तन प्रणाली लगानी होगी।
  • कार्यान्वयन: अदालत ने सभी संबंधित एजेंसियों को इन निर्देशों पर विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) 75 दिनों के भीतर पेश करने का आदेश दिया है।

अक्टूबर 2025 के पूरक दिशा-निर्देश:

इससे पहले अक्टूबर 2025 में, न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला की पीठ ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 6 महीने के भीतर नियम बनाने के निर्देश दिए थे, जिनमें शामिल हैं: 

  • पैदल यात्री सुरक्षा: फुटपाथों और पैदल पार पथों (pedestrian crossings) का ऑडिट और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • हेलमेट की अनिवार्यता: दोपहिया वाहनों पर चालक और पीछे बैठने वाले (pillion rider), दोनों के लिए हेलमेट अनिवार्य है।
  • लाइट्स और हूटर्स: सफेद चकाचौंध वाली LED हेडलाइट्स के उपयोग और अनधिकृत हूटर या लाल-नीली बत्ती की बिक्री पर रोक। 

सड़क सुरक्षा का महत्व:

सांख्यिकीय डेटा

भारत में नेशनल हाईवे कुल सड़क नेटवर्क का केवल 2% हैं, लेकिन कुल मौतों में इनका हिस्सा 30% है।

संवैधानिक आधार

सड़क सुरक्षा को अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) के तहत एक मौलिक अधिकार माना गया है।

कानूनी प्रावधान

मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 138(1A) और 210-D के तहत राज्यों को नियम बनाने का अधिकार है।

राज्य की जिम्मेदारी

कोर्ट ने कहा कि टाले जा सकने वाले खतरों (जैसे गड्ढे या अवैध पार्किंग) के कारण होने वाली मौत ‘राज्य की विफलता’ है।

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