विक्रम सोढ़ी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस | Vikram Sodhi Centre of Excellence

निंग-नेटिव एआई सिस्टम (mining-native AI systems) विकसित करना है।
वर्तमान में खनन क्षेत्र में डिजिटल उपकरणों का उपयोग खंडित है, जिसे यह केंद्र एक एकीकृत ढांचे के माध्यम से दूर करने का प्रयास करेगा।
इसकी विशेषताएं:
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- वित्त पोषण: इस केंद्र को ‘मिनेरोस एसए’ (Mineros SA) के वाइस चेयरमैन और ‘सन वैली इन्वेस्टमेंट्स’ (Sun Valley Investments) के मैनेजिंग पार्टनर विक्रम सोढ़ी द्वारा 5 वर्षों में 15 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
- सहयोग: केंद्र की स्थापना के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
- सम्मान: यह केंद्र विक्रम सोढ़ी के पिता और संस्थान के विशिष्ट पूर्व छात्र कर्नल मंजीत सोढ़ी (M.Tech 1977) के सम्मान में नामित किया गया है।
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कार्यप्रणाली: यह केंद्र आईआईटी मद्रास के रॉबर्ट बॉश सेंटर के समान एक संस्थागत मॉडल पर काम करेगा। इसमें छात्रों को लाइव प्रोजेक्ट्स और उद्योग के वास्तविक डेटा के साथ काम करने का अनुभव मिलेगा।
अनुसंधान के पांच प्रमुख क्षेत्र:
- खोज (Exploration): खनिजों की सटीक पहचान के लिए एआई का उपयोग।
- खदान योजना (Mine Planning): परिचालन क्षमता बढ़ाने के लिए डेटा-संचालित योजनाएं।
- प्रसंस्करण (Processing): खनिज निष्कर्षण प्रक्रियाओं का अनुकूलन।
- भविष्य कहनेवाला रखरखाव (Predictive Maintenance): मशीनों की खराबी का पहले से अनुमान लगाना।
- ईएसजी एनालिटिक्स (ESG Analytics): पर्यावरण, सामाजिक और शासन संबंधी मानकों की निगरानी।
महत्व:
- उद्योग-अकादमिक सहयोग: यह केंद्र उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग का एक बेहतरीन उदाहरण है, जो अनुसंधान को सीधे व्यावहारिक उपयोग (application-driven research) से जोड़ता है।
- राष्ट्रीय चुनौतियां: भारत के ‘आत्मनिर्भर’ बनने के लक्ष्य में खनन क्षेत्र का कुशल होना अनिवार्य है। यह केंद्र ‘ग्रैंड चैलेंजेस प्रोग्राम’ के माध्यम से वास्तविक दुनिया के डेटासेट का उपयोग कर राष्ट्रीय चुनौतियों का समाधान करेगा।
- संसाधन दक्षता: एआई के माध्यम से खनन को सुरक्षित, अधिक कुशल और पर्यावरण के अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी।