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Swachh Vayu Survekshan 2026- अधिक आबादी वाले शहरों में लखनऊ ने पाया पहला स्थान

Swachh Vayu Survekshan 2026- अधिक आबादी वाले शहरों में लखनऊ ने पाया पहला स्थान

Swachh Vayu Survekshan 2026

संदर्भ:

हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 7 सितंबर 2026 (नीले आकाश के लिए स्वच्छ वायु के अंतर्राष्ट्रीय दिवस / स्वच्छ वायु दिवस) के अवसर पर स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 (Swachh Vayu Survekshan 2026) रैंकिंग जारी की। इस वार्षिक मूल्यांकन में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में लखनऊ ने देश भर में पहला स्थान प्राप्त किया।

(Swachh Vayu Survekshan 2026) स्वच्छ वायु सर्वेक्षण क्या है?

  • परिचय: Swachh Vayu Survekshan एक वार्षिक मूल्यांकन कार्यक्रम (Annual Assessment) है, जो राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme – NCAP) के तहत संचालित किया जाता है।
    • इसका मुख्य उद्देश्य शहरों द्वारा वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और वायु गुणवत्ता प्रबंधन (Air Quality Management) के लिए किए गए ठोस विधिक एवं प्रशासनिक प्रयासों का आकलन करना है।
  • नोडल मंत्रालय: यह सर्वेक्षण पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा आयोजित किया जाता है।
    • डेटा का तकनीकी मूल्यांकन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board – CPCB) द्वारा किया जाता है। 
  • मूल्यांकन पद्धति: यह ध्यान रखना आवश्यक है कि यह रैंकिंग केवल किसी शहर के वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आधार पर तय नहीं होती। बल्कि, यह शहरों द्वारा विभिन्न स्रोतों जैसे—सड़क की धूल (Road Dust), ठोस कचरा प्रबंधन (Solid Waste Management), निर्माण गतिविधियों, वाहनों से उत्सर्जन (Vehicular Emissions) और औद्योगिक प्रदूषण को रोकने के लिए किए गए ढांचागत सुधारों और क्रियान्वयन के आधार पर अंकों (कुल 200 अंक) से तय होती है। 
  • मानक श्रेणियां: सभी 130 गैर-प्राप्ति शहरों (Non-Attainment Cities) को उनकी जनसंख्या (2011 की जनगणना) के आधार पर तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है: 
  • श्रेणी-1 (Category-I): 10 लाख से अधिक आबादी वाले बड़े शहर (कुल 47 शहर)।
  • श्रेणी-2 (Category-II): 3 लाख से 10 लाख के बीच की आबादी वाले मध्यम शहर (कुल 43 शहर)। 
  • श्रेणी-3 (Category-III): 3 लाख से कम आबादी वाले छोटे शहर। 

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 के मुख्य निष्कर्ष:

  • संस्करण: इस वर्ष इस सर्वेक्षण का 5वां संस्करण (5th Edition) आयोजित किया गया।
    • नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में पर्यावरण मंत्रालय ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले शहरों और वार्डों को राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया।
  • राष्ट्रीय स्तर पर सुधार:
    • PM10 में बड़ी गिरावट: राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP India) के तहत शामिल 130 शहरों में से 108 शहरों ने अपने 2017-18 के बेसलाइन स्तर की तुलना में PM10 प्रदूषण नियंत्रण (PM10 Pollution Control India) में व्यापक सुधार दर्ज किया है।
    • लक्ष्य प्राप्ति: कुल 72 शहरों ने PM10 सांद्रता में 20% से अधिक की कमी दर्ज की, जबकि 26 शहरों ने 40% से अधिक की भारी कमी हासिल की है। इसके अतिरिक्त, 14 शहरों ने राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) को पूर्ण रूप से प्राप्त कर लिया है।
श्रेणी-अनुसार प्रदर्शन एवं शीर्ष शहर
श्रेणी (Category)प्रथम स्थान (Rank 1)द्वितीय स्थान (Rank 2)तृतीय स्थान (Rank 3)
श्रेणी-1 (>10 लाख आबादी)लखनऊ (उत्तर प्रदेश)स्कोर: 198 अंकइंदौर (मध्य प्रदेश)स्कोर: 197 अंकजबलपुर (मध्य प्रदेश)स्कोर: 195 अंक
श्रेणी-2 (3-10 लाख आबादी)राउरकेला (ओडिशा)स्कोर: 198.5 अंकफिरोजाबाद (उत्तर प्रदेश)गुंटूर (आंध्र प्रदेश)अमरावती (महाराष्ट्र)
श्रेणी-3 (<3 लाख आबादी)कलिंगा नगर (ओडिशा)स्कोर: 198.5 अंकअंगुल (ओडिशा)तालचेर (ओडिशा)
  • पहली बार शामिल ‘वार्ड-स्तरीय रैंकिंग’: इस वर्ष एक अनूठी ‘बॉटम-अप एप्रोच’ अपनाते हुए देश के 7,400 से अधिक म्युनिसिपल वार्डों का भी मूल्यांकन किया गया।
    • 30 हजार से अधिक आबादी वाले वार्डों (Category-1 Wards) में लखनऊ नगर निगम के वार्ड नंबर 70 ने देश भर में पहला स्थान प्राप्त किया।
    • मध्यम श्रेणी के वार्डों में ओडिशा के भुवनेश्वर का वार्ड 36 और 30 शीर्ष पर रहे। 
  • प्रमुख महानगरों की स्थिति: इस Swachh Vayu Survekshan 2026 Results में बड़े महानगरों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत पीछे रहा:
  • दिल्ली की रैंकिंग: दिल्ली इस बार 21वें स्थान (172 अंक) पर रही, हालांकि पिछले वर्षों की तुलना में इसकी स्थिति में आंशिक सुधार देखा गया है।
  • मुंबई और बेंगलुरु: मुंबई को रैंकिंग में 28वां स्थान (160.8 अंक) मिला है, जबकि बेंगलुरु भी शीर्ष 20 में स्थान बनाने में असफल रहा। 

लखनऊ के शीर्ष पर पहुंचने के मुख्य कारण (Why did Lucknow top the Clean Air Survey 2026?)

पिछले वर्ष की 22वीं रैंक से छलांग लगाकर लखनऊ ने इंदौर को पछाड़ते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया है। लखनऊ नगर निगम (LMC) द्वारा लागू किए गए प्रमुख प्रशासनिक एवं तकनीकी सुधार निम्नलिखित हैं:

  • ईवी फ्लीट का विस्तार (EV Fleet Expansion): लखनऊ में डोर-टू-डोर कचरा संग्रह करने वाले 90 प्रतिशत वाहनों को इलेक्ट्रिक (EV) कर दिया गया है, जिससे डीजल उत्सर्जन में बड़ी कमी आई है। सार्वजनिक परिवहन के लिए भारी मात्रा में इलेक्ट्रिक बसें चलाई गई हैं।
  • सड़क की धूल पर नियंत्रण: नगर निगम द्वारा बड़े पैमाने पर मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनों (Mechanised Sweeping) का उपयोग, नियमित जल छिड़काव (Water Sprinkling) और सड़कों के किनारों को पक्का (Paved Shoulders) किया गया।
  • कचरा प्रसंस्करण: पुराने पड़े कचरों के डंपसाइट्स (Legacy Dumpsites) का वैज्ञानिक तरीके से बायो-रेमेडिएशन और निस्तारण किया गया।
  • शहरी हरियाली (Urban Greenery): शहर में बड़े पैमाने पर जापानी मियावाकी पद्धति (Miyawaki Plantation) से सघन वनों और वर्टिकल गार्डन्स का विकास किया गया।
  • परिणाम: लखनऊ ने अपना वार्षिक PM10 संकेंद्रण बेसलाइन वर्ष के 250 µg/m³ से घटाकर 137 µg/m³ करने में सफलता पाई। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. Swachh Vayu Survekshan 2026 में कौन सा शहर पहले स्थान पर रहा?

    10 लाख से अधिक आबादी वाले बड़े शहरों की श्रेणी-1 में लखनऊ (उत्तर प्रदेश) देश भर में पहले स्थान (Lucknow Cleanest City 2026) पर रहा।

  2. लखनऊ को Clean Air Ranking में नंबर 1 क्यों मिला?

    लखनऊ को ई-कचरा वाहनों के उपयोग, मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग, विरासत कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन और मियावाकी शहरी वनीकरण के सफल क्रियान्वयन के कारण यह स्थान मिला।

  3. Swachh Vayu Survekshan 2026 में दिल्ली की ranking क्या रही?

    इस वर्ष के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली 21वें स्थान पर रही, जिसने कुल 172 अंक हासिल किए।

  4. Lucknow ने Clean Air Survey में कितने points हासिल किए?

    लखनऊ ने वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों के कड़े क्रियान्वयन की बदौलत 200 में से 198 अंक (Points) हासिल कर सर्वोच्च रैंक प्राप्त की।

  5. Swachh Vayu Survekshan में cities की ranking कैसे तय होती है?

    यह रैंकिंग केवल वायु गुणवत्ता (AQI) से नहीं, बल्कि ठोस कचरा प्रबंधन, वाहनों के धुएं पर नियंत्रण, सड़क धूल शमन और जनभागीदारी जैसे ठोस प्रशासनिक कार्यों के स्व-मूल्यांकन और CPCB द्वारा भौतिक सत्यापन से तय होती है।

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