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यूनेस्को पीपल एंड नेचर रिपोर्ट 2026

यूनेस्को पीपल एंड नेचर रिपोर्ट 2026 | UNESCO People and Nature Report 2026

UNESCO People and Nature Report 2026

संदर्भ:

यूनेस्को (UNESCO) द्वारा हाल ही में “पीपल एंड नेचर रिपोर्ट 2026” (People and Nature in UNESCO-designated sites: Global and local contributions) जारी की, जो पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के अंतर्संबंधों पर एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। 

रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष:

    • अध्ययन: इस रिपोर्ट में दुनिया भर के 2,260 जीवित स्थलों (Living Sites) का अध्ययन किया गया है, जहाँ मनुष्य और प्रकृति एक साथ निवास करते हैं। 
    • विरासत पर संकट: रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 90% यूनेस्को स्थल (जो चीन और भारत के संयुक्त क्षेत्रफल से भी बड़े हैं) अत्यधिक पर्यावरणीय दबाव का सामना कर रहे हैं।
    • जलवायु परिवर्तन का प्रभाव: लगभग 98% यूनेस्को स्थल पहले से ही जलवायु संकट (अत्यधिक गर्मी, वाइल्ड फायर आदि) की चपेट में हैं।
  • जंगल की आग: विश्व धरोहर स्थलों में जंगल की आग वनों के विनाश का प्रमुख कारक बन गई है। वर्ष 2000 से अब तक 300,000 वर्ग किमी से अधिक वन क्षेत्र नष्ट हो चुका है।
  • 2050 का जोखिम: एक-चौथाई (25%) से अधिक स्थल 2050 तक गंभीर और अपरिवर्तनीय (irreversible) पारिस्थितिक परिवर्तनों के मुहाने पर हैं।
  • जनसंख्या प्रभाव: दुनिया की लगभग 10% आबादी (करीब 90 करोड़ लोग) इन स्थलों में या इनके आसपास रहती है और अपनी आजीविका के लिए इन पर निर्भर है।
  • जैव विविधता का गढ़: जहाँ 1970 के बाद से दुनिया भर में वन्यजीवों की आबादी में 73% की गिरावट आई है, वहीं UNESCO स्थलों के भीतर यह आबादी तुलनात्मक रूप से स्थिर रही है।
  • कार्बन सिंक: ये स्थल लगभग 240 गीगाटन कार्बन जमा रखते हैं, जो वर्तमान वैश्विक उत्सर्जन के लगभग दो दशकों के बराबर है।
  • वित्तीय असंतुलन: वैश्विक स्तर पर, प्रकृति के विनाशकारी कार्यों पर संरक्षण की तुलना में 30:1 का अनुपात है—यानी हर $1 निवेश के बदले $30 विनाश पर खर्च हो रहे हैं।
  • सांस्कृतिक विविधता: इन स्थलों में 1,000 से अधिक भाषाएँ बोली जाती हैं और लगभग 25% स्थल स्वदेशी लोगों की भूमि के साथ ओवरलैप करते हैं (अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में यह आंकड़ा 50% तक है)।
  • समावेशी शासन: रिपोर्ट ने ‘इनक्लूसिव गवर्नेंस’ पर जोर दिया है, जिसका अर्थ है कि संरक्षण नीतियों में स्थानीय समुदायों और उनके पारंपरिक ज्ञान को प्राथमिक भागीदारी मिलनी चाहिए। 
  • राष्ट्रीय जलवायु योजना (NDC): वर्तमान में केवल 5% राष्ट्रीय जलवायु योजनाओं में UNESCO स्थलों का उल्लेख है। रिपोर्ट इसे बढ़ाने का आह्वान करती है।
  • पारिस्थितिकी तंत्र बहाली: आपदाओं के प्रति लचीलापन (Resilience) बनाने के लिए बड़े पैमाने पर इकोसिस्टम रेस्टोरेशन की आवश्यकता है।

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