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अर्बन चैलेंज फंड

अर्बन चैलेंज फंड | Urban Challenge Fund

Urban Challenge Fund

संदर्भ:

हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अर्बन चैलेंज फंड (Urban Challenge Fund – UCF) के लिए परिचालन दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं, जो भारत के शहरी बुनियादी ढांचे के विकास में एक क्रांतिकारी बदलाव का संकेत है। 

अर्बन चैलेंज फंड (UCF) क्या हैं?

यह एक केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) है, जो शहरी विकास को ‘अनुदान-आधारित’ मॉडल से हटाकर ‘बाजार-जुड़े और सुधार-संचालित’ मॉडल की ओर ले जाने के लिए बनाई गई है। इसका उद्देश्य अगले पांच वर्षों में लगभग 4 लाख करोड़ रुपये का कुल निवेश आकर्षित करना है। 

  • कुल परिव्यय: ₹1 लाख करोड़ (केंद्रीय सहायता)。
  • परिचालन अवधि: वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक (3 वर्ष के संभावित विस्तार के साथ)।
  • नोडल मंत्रालय: आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय (MoHUA)। 

वित्तपोषण संरचना:

  • केंद्रीय सहायता (25%): परियोजना लागत का अधिकतम 25% हिस्सा केंद्र द्वारा दिया जाएगा।
  • बाजार आधारित वित्तपोषण (न्यूनतम 50%): कम से कम 50% राशि नगरपालिका बॉन्ड (Municipal Bonds), बैंक ऋण या सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से जुटानी होगी।
  • राज्यों/शहरी निकायों का योगदान (शेष 25%): यह हिस्सा राज्य सरकार, शहरी स्थानीय निकाय (ULB) या बाजार के अन्य स्रोतों से प्राप्त किया जा सकता है।

प्रमुख स्तंभ और फोकस क्षेत्र:

  • ग्रोथ हब के रूप में शहर: आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए औद्योगिक और व्यापारिक केंद्रों का विकास।
  • शहरों का रचनात्मक पुनर्विकास: पुराने शहरी क्षेत्रों और विरासत बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण।
  • जल और स्वच्छता: कचरा मुक्त शहर, अपशिष्ट प्रबंधन और जल पुनर्चक्रण प्रणालियों पर जोर।

महत्व:

  • क्रेडिट रिपेमेंट गारंटी सब-स्कीम (CRGSS): इसके तहत ₹5,000 करोड़ का कॉर्पस बनाया गया है, जो विशेष रूप से टियर-II और टियर-III शहरों को पहली बार बाजार से ऋण लेने के लिए ₹7 करोड़ तक की गारंटी प्रदान करेगा.
  • चुनौती-आधारित चयन (Challenge Mode): फंड का आवंटन केवल उन शहरों को होगा जो पारदर्शी प्रतिस्पर्धा के माध्यम से सुधारों (जैसे वित्तीय अनुशासन और डिजिटल शासन) के प्रति प्रतिबद्धता दिखाएंगे।
  • क्षमता निर्माण: ₹5,000 करोड़ की राशि शहरी निकायों की परियोजनाओं को बैंक-योग्य (Bankable) बनाने और उनकी संस्थागत क्षमता बढ़ाने के लिए आवंटित की गई है।
  • विकसित भारत: यह पहल विकसित भारत @2047 के विजन को साकार करने की दिशा में शहरी स्थानीय निकायों को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर और निवेश-अनुकूल बनाने का एक अनूठा प्रयास है।

समयसीमा (Timelines):

परिचालन दिशानिर्देशों के अनुसार, राज्यों को अप्रैल-मई 2026 तक तैयारी एजेंसियां नियुक्त करनी होंगी और 15 जुलाई 2026 तक परियोजनाओं की शॉर्टलिस्टिंग पूरी करनी होगी। फंड का वितरण सितंबर 2026 से शुरू होने की उम्मीद है।

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