India-Vietnam Tribal Development Cooperation

संदर्भ:
हाल ही में भारत के जनजातीय कार्य मंत्रालय और वियतनाम के जातीय एवं धार्मिक मामलों के मंत्रालय के बीच पहली उच्च स्तरीय मंत्रिस्तरीय बैठक आयोजित की गई। जिसमें दोनों देशों ने जनजातीय और जातीय अल्पसंख्यक विकास के क्षेत्र में सहयोग हेतु MoC की समीक्षा की।
भारत-वियतनाम जनजातीय विकास सहयोग के मुख्य स्तंभ:
- आजीविका और वन-उत्पाद: लघु वन उपज (Minor Forest Produce) का मूल्य संवर्धन (Value Addition) और जनजातीय उत्पादों की वैश्विक ब्रांडिंग।
- सतत कृषि: जनजातीय क्षेत्रों में जलवायु-अनुकूल खेती के तरीकों और पारंपरिक ज्ञान का आदान-प्रदान।
- कौशल विकास: सुदूर क्षेत्रों के युवाओं के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम और तकनीकी प्रशिक्षण।
- सांस्कृतिक प्रलेखन: स्वदेशी भाषाओं, परंपराओं और विरासत के संरक्षण के लिए डिजिटल लाइब्रेरी और अनुसंधान साझेदारी।
- बुनियादी ढांचा: भारत के Quick Impact Projects (QIPs) के माध्यम से वियतनाम के ग्रामीण प्रांतों में स्कूल, सिंचाई नहरें और सामुदायिक भवनों का निर्माण।
- अनुसंधान साझेदारी: जनजातीय कल्याण और शासन मॉडल पर संयुक्त शैक्षणिक और नीतिगत अनुसंधान।
भारत-वियतनाम जनजातीय स्थिति एवं प्रमुख सहयोग:
- वर्तमान स्थिति: भारत और वियतनाम के बीच जनजातीय और जातीय समुदायों के विकास के लिए सहयोग की जड़ें दशकों पुरानी हैं, जो मुख्य रूप से दक्षिण-दक्षिण सहयोग के सिद्धांतों पर आधारित रही हैं। वर्तमान में भारत की लगभग 8.6% आबादी जनजातीय है, जबकि वियतनाम में 54 जातीय समूह हैं, जो देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- कृषि और ग्रामीण आजीविका (1970-1990 के दशक): भारत ने वियतनाम के जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए Cuu Long Delta Rice Research Institute (1977) की स्थापना में मदद की। इस परियोजना ने वियतनाम के सबसे गरीब और जातीय अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में गरीबी दर को 60% (1990) से घटाकर 20% (2010) करने में आधारभूत भूमिका निभाई।
- क्षमता निर्माण और शिक्षा: भारत के ITEC (Indian Technical and Economic Cooperation) कार्यक्रम के तहत 1970 के दशक से ही वियतनामी अधिकारियों और छात्रों को छात्रवृत्तियां और तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों में काम करने वाले कृषि वैज्ञानिकों और प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल किया गया है।
- मेकांग-गंगा सहयोग (MGC): 2000 के दशक की शुरुआत में शुरू हुए इस मंच के माध्यम से भारत ने वियतनाम के सुदूरवर्ती प्रांतों में क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट्स (QIPs) के तहत सामुदायिक भवन, स्कूल और छोटे सिंचाई प्रोजेक्ट्स विकसित किए, जिनसे सीधे तौर पर वहां के जातीय अल्पसंख्यकों को लाभ हुआ।
- सांस्कृतिक और पुरातात्विक संबंध: वियतनाम के माय सन (My Son) मंदिर परिसर जैसे चाम संस्कृति (Cham ethnic group) से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण में भारत का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) लंबे समय से कार्यरत है, जो दोनों देशों के साझा जातीय इतिहास को जोड़ता है।
- विकास सहायता (LOC): भारत ने 1990 के दशक और 2000 की शुरुआत में वियतनाम को रियायती ऋण (Lines of Credit) प्रदान किए, जिससे जनजातीय और पहाड़ी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास में मदद मिली।
महत्व:
- एक्ट ईस्ट पॉलिसी: वियतनाम भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ का प्रमुख आधार है। जनजातीय सहयोग इसे ‘पीपल-सेंट्रिक’ (जन-केंद्रित) आयाम प्रदान करता है।
- सभ्यतागत जुड़ाव: 2025 में वियतनाम में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों (Sacred Relics) की प्रदर्शनी ने दोनों देशों के बीच आध्यात्मिक संबंधों को गहरा किया है, जो जनजातीय कूटनीति के लिए एक मजबूत मनोवैज्ञानिक आधार प्रदान करता है।
- साझा चुनौतियां: दोनों देश पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के लिए ‘विकास बनाम सांस्कृतिक संरक्षण’ की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।