New Income Tax Rules 2026
संदर्भ:
हाल ही में भारत सरकार ने नए आयकर नियम, 2026 अधिसूचित किए है, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे। नए आयकर नियम भारत के छह दशक पुराने आयकर कानून का स्थान लेंगे।
नए आयकर नियम, 2026 के मुख्य प्रावधान:
- नया अधिनियम: आयकर अधिनियम, 2025 अब 1961 के पुराने कानून की जगह लेगा। इसमें धाराओं (Sections) की संख्या 819 से घटाकर 536 कर दी गई है।
- नियमों का सरलीकरण: आयकर नियम, 1962 (500+ नियम) को समाप्त कर आयकर नियम, 2026 (333 नियम) लागू किए गए हैं।
- नई शब्दावली: अब ‘पिछले वर्ष’ (Previous Year) और ‘निर्धारण वर्ष’ (Assessment Year) के भ्रम को दूर कर एक एकल ‘टैक्स वर्ष’ (Tax Year) की अवधारणा पेश की गई है।
- ITR फाइलिंग की समयसीमा: ITR-3 और ITR-4 (गैर-ऑडिट व्यवसाय) के लिए अंतिम तिथि 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है।
- संशोधित रिटर्न (Revised Return): त्रुटि सुधार के लिए समयसीमा को टैक्स वर्ष की समाप्ति से 9 महीने से बढ़ाकर 12 महीने (यानी 31 मार्च तक) कर दिया गया है।
- HRA लाभ का विस्तार: अब बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद को भी ‘महानगर’ की श्रेणी में शामिल किया गया है, जिससे यहाँ 50% HRA छूट मिल सकेगी।
- भत्ता वृद्धि (Allowances): मुद्रास्फीति को देखते हुए शिक्षा भत्ता ₹3,000/माह और हॉस्टल भत्ता ₹9,000/माह (प्रति बच्चा) कर दिया गया है।
- शेयर बायबैक (Buyback): अब बायबैक से प्राप्त आय को ‘लाभांश’ के बजाय ‘पूंजीगत लाभ’ (Capital Gains) के रूप में टैक्स किया जाएगा।
- STT में वृद्धि: डेरिवेटिव्स (F&O) में सट्टेबाजी कम करने के लिए फ्यूचर्स पर STT 0.05% और ऑप्शंस पर 0.15% कर दिया गया है।
- Sovereign Gold Bonds (SGB): मैच्योरिटी पर कर छूट अब केवल उन निवेशकों को मिलेगी जिन्होंने इसे सीधे RBI (Primary Issue) से खरीदा है; सेकेंडरी मार्केट खरीदारों को अब कैपिटल गेन टैक्स देना होगा।
नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) – FY 2026-27
बजट 2026 के अनुसार, नई कर व्यवस्था डिफ़ॉल्ट (Default) रहेगी। ₹12 लाख तक की आय पर धारा 87A के तहत ₹60,000 की छूट के कारण प्रभावी कर शून्य है।
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वार्षिक आय (₹) |
कर की दर |
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₹4,00,000 तक |
शून्य |
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₹4,00,001 – ₹8,00,000 |
5% |
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₹8,00,001 – ₹12,00,000 |
10% |
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₹12,00,001 – ₹16,00,000 |
15% |
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₹16,00,001 – ₹20,00,000 |
20% |
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₹20,00,001 – ₹24,00,000 |
25% |
| ₹24,00,000 से अधिक |
30% |
- मानक कटौती (Standard Deduction): वेतनभोगियों के लिए इसे बढ़ाकर ₹75,000 कर दिया गया है।
- एकीकृत कार्यवाही (Integrated Proceedings): अब असेसमेंट (मूल्यांकन) और पेनल्टी (दंड) संबंधी काम एक ही आदेश (Common Order) के जरिए पूरे होंगे।
- अपराध की श्रेणी से बाहर करना (Decriminalization): छोटी तकनीकी गलतियों, जैसे ऑडिट न कराना या किताबें पेश न कर पाना, इन्हें अब केवल ‘सिविल शुल्क’ या जुर्माने तक सीमित कर दिया गया है।
- सजा में कमी: गंभीर अपराधों के मामले में भी जेल की अधिकतम अवधि 7 साल से घटाकर 2 साल कर दी गई है। साथ ही, कोर्ट के पास अब सजा को जुर्माने में बदलने का विकल्प भी होगा।
- फास्ट डीएस (FAST DS – 2026): यह उन लोगों के लिए एक बड़ी राहत है (विशेषकर छात्रों और प्रवासियों के लिए) जो अनजाने में अपनी विदेशी संपत्ति या बैंक खातों की जानकारी देना भूल गए थे। 6 महीने की इस खिड़की के दौरान वे बिना किसी भारी दंड के इसका खुलासा कर सकेंगे।
