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पर्यावरण ऑडिट नामित एजेंसी (Environmental Audit Designated Agency) | Apni Pathshala

Environmental Audit Designated Agency

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संदर्भ:

हाल ही में, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (NPC) को पर्यावरण ऑडिट नामित एजेंसी (EADA) के रूप में नियुक्त किया है।  

पर्यावरण ऑडिट नामित एजेंसी (EADA) का परिचय:

  • परिचय: पर्यावरण ऑडिट नामित एजेंसी (Environment Audit Designated Agency – EADA) एक केंद्रीय नियामक निकाय है, जिसे भारत सरकार द्वारा पर्यावरण ऑडिट नियम, 2025 के तहत स्थापित किया गया है। 
    • विशेष: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (NPC) को आधिकारिक तौर पर भारत की पहली EADA के रूप में नियुक्त किया है। 
  • उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य देश में पर्यावरण ऑडिटिंग की प्रक्रिया को विनियमित करना, मानकों को निर्धारित करना और ऑडिटर्स की जवाबदेही सुनिश्चित करना है। 
  • प्रमुख कानून: यह ऑडिट ढांचा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 जैसे महत्वपूर्ण कानूनों के अनुपालन को मजबूत करेगा।
  • प्रमाणन और पंजीकरण: NPC ‘प्रमाणित पर्यावरण लेखा परीक्षकों’ (CEA) और ‘पंजीकृत पर्यावरण लेखा परीक्षकों’ (REA) के लिए पात्रता मानदंड और परीक्षा प्रक्रियाएं विकसित करेगी।

EADA की मुख्य जिम्मेदारियां:

  • ऑडिटर्स का प्रबंधन: लेखा परीक्षकों का पंजीकरण, नवीनीकरण, निलंबन या रद्दीकरण करना।
  • मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs): लेखा परीक्षकों के कामकाज के लिए दिशा-निर्देश और मानक निर्धारित करना।
  • डिजिटल प्रणाली: ऑडिट प्रक्रियाओं और निगरानी के लिए एक पारदर्शी डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करना।
  • सार्वजनिक रजिस्टर: सभी प्रमाणित और पंजीकृत लेखा परीक्षकों का एक ऑनलाइन, सार्वजनिक रूप से सुलभ रजिस्टर बनाए रखना।
  • अनुशासनात्मक कार्रवाई: मानकों का पालन न करने वाले ऑडिटर्स के खिलाफ कार्रवाई करना। 

महत्व:

  • पारदर्शिता: समर्पित एजेंसी की स्थापना से पर्यावरण रिपोर्टिंग की सटीकता में सुधार होगा।
  • सतत औद्योगिक विकास: यह कदम उत्पादकता को पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ जोड़कर सतत विकास को बढ़ावा देता है।
  • वैश्विक मूल्य श्रृंखला: बेहतर अनुपालन तंत्र भारत के विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा। 
राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (National Productivity Council – NPC):

  • परिचय: यह भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIP) के तहत एक स्वायत्त (Autonomous) संगठन है। इसकी स्थापना 1958 में भारत में उत्पादकता संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए की गई थी।
  • उद्देश्य: इसका मुख्य लक्ष्य भारतीय अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों (जैसे उद्योग, कृषि, सेवा क्षेत्र) में उत्पादकता, गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना है।
  • त्रिपक्षीय स्वरूप: NPC एक अद्वितीय संगठन है जिसमें सरकार, नियोक्ताओं (Employers) और श्रमिकों (Labor) के प्रतिनिधियों के साथ-साथ तकनीकी विशेषज्ञ भी शामिल होते हैं।
  • मुख्यालय: इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है और इसके 13 क्षेत्रीय कार्यालय प्रमुख शहरों में स्थित हैं।
  • प्रमुख कार्य:
    1. परामर्श और प्रशिक्षण: यह उद्योगों को उत्पादकता बढ़ाने के लिए तकनीकी परामर्श और प्रबंधन प्रशिक्षण प्रदान करता है।
    2. अनुसंधान: यह उत्पादकता के रुझानों पर डेटा एकत्र करता है और नीति निर्माण में सरकार की मदद करता है।
    3. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: यह टोक्यो स्थित एशियाई उत्पादकता संगठन (APO) का एक संस्थापक सदस्य है, जिसके माध्यम से यह वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को भारत में लागू करता है।

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