Apni Pathshala

मुलगांव केलबई पेठ उत्सव (Mulgaon Kelbai Peth Utsav) | UPSC

Mulgaon Kelbai Peth Utsav

Mulgaon Kelbai Peth Utsav

संदर्भ: 

हाल ही में 23 मार्च 2026 को गोवा में मुलगांव केलबई पेठ उत्सव की शुरुआत हुई, जो गोवा की समृद्ध लोक संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का एक अद्वितीय संगम है। इसका आयोजन 26 मार्च 2026 किया जाएगा। 

मुलगांव केलबई पेठ उत्सव के बारे में:

  •  समय: यह उत्सव गोवा के बिचोलिम (Bicholim) तालुका के मुलगांव (Mulgao) गांव में प्रतिवर्ष चैत्र शुक्ल पंचमी (हिंदू नव वर्ष का छठा दिन) को आयोजित किया जाता है।
    • धार्मिक पृष्ठभूमि: यह उत्सव देवी केलबई के सम्मान में आयोजित एक “जात्रा” महोत्सव है। उत्सव का मुख्य केंद्र देवी केलबई और उनकी बहन देवी महामाया (मये गांव की अधिष्ठात्री देवी) का वार्षिक मिलन है। मान्यता है कि देवी केलबई अपनी बहन से मिलने मये गांव जाती हैं।
    • पवित्र ‘पेठ’: ‘पेठ’ बेंत से बनी एक आयताकार टोकरी होती है, जिसमें देवी के प्रतीक स्वरूप चार पवित्र लकड़ी के मुखौटे (रुपणम – Rupnnems) रखे जाते हैं। ये मुखौटे देवी केलबई, सातेरी, रावलनाथ और महादेव के प्रतीक माने जाते हैं।
    • धोंड परंपरा: उत्सव में भाग लेने वाले समर्पित भक्तों को ‘धोंड’ कहा जाता है। ये भक्त गुड़ी पड़वा से ही कठिन उपवास रखते हैं और शाकाहारी भोजन करते हैं।
    • मोड: पेठ को अपने सिर पर रखकर दौड़ने वाले व्यक्ति को ‘मोड’ कहा जाता है। यह व्यक्ति भावविभोर अवस्था (Trance) में होता है और पूरी यात्रा के दौरान पेठ को संभालता है।
    • अबोली का समर्पण: इस त्योहार की सबसे बड़ी विशेषता ‘अबोली’ (Crossandra) के फूलों का उपयोग है। पूरी पेठ को इन फूलों से सजाया जाता है।
    • पारंपरिक मार्ग: पेठ की यात्रा मुलगांव के जंगलों से शुरू होकर वलशिम, बोर्डेम, भायलीपेठ और पाज़वाड़ा जैसे क्षेत्रों से होते हुए मये (Mayem) पहुंचती है।

प्रमुख अनुष्ठान:

    • धोंडाची तली: जुलूस में शामिल होने से पहले, धोंड भक्त मंदिर परिसर में स्थित ‘धोंडाची तली’ (पवित्र तालाब) में स्नान करते हैं और पारंपरिक नृत्य करते हैं।
    • कौल (Kaul): यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर पेठ रुकती है, जहाँ भक्त देवी से आशीर्वाद और मार्गदर्शन (कौल) प्राप्त करते हैं।
    • मालयाची जात्रा (Malyachi Jatra): तीन दिनों तक मये में रहने के बाद, जब देवी मुलगांव लौटती हैं, तब वहां ‘मालयाची जात्रा’ मनाई जाती है।
    • चोगुले समुदाय की भूमिका: मये के चोगुले समुदाय के लोग आधी रात को मुलगांव आते हैं और पेठ को मये ले जाने का अनुष्ठान पूरा करते हैं।

Share Now ➤

क्या आपको Apni Pathshala के Courses, RNA PDF, Current Affairs, Test Series और Books से सम्बंधित कोई जानकारी चाहिए? तो हमारी विशेषज्ञ काउंसलर टीम आपकी सिर्फ समस्याओं के समाधान में ही मदद नहीं करेगीं, बल्कि आपको व्यक्तिगत अध्ययन योजना बनाने, समय का प्रबंधन करने और परीक्षा के तनाव को कम करने में भी मार्गदर्शन देगी।

Apni Pathshala के साथ अपनी तैयारी को मजबूत बनाएं और अपने सपनों को साकार करें। आज ही हमारी विशेषज्ञ टीम से संपर्क करें और अपनी सफलता की यात्रा शुरू करें

📞 +91 7878158882

Related Posts

Scroll to Top