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 INS तारागिरी (INS Taragiri) | UPSC Preparation

INS Taragiri

INS Taragiri

संदर्भ:

प्रोजेक्ट 17A (P17A) के तहत निर्मित चौथा आधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट, INS तारागिरी (F41), 03 अप्रैल 2026 को विशाखापत्तनम में आधिकारिक रूप से नौसेना में कमीशन किया जाएगा।

INS तारागिरी के बारे में: 

    • प्रोजेक्ट 17A (नीलगिरी क्लास): यह प्रोजेक्ट 17 (शिवालिक क्लास) का उन्नत प्रकार है। इसके तहत कुल 7 जहाज बनाए जा रहे हैं (4 MDL द्वारा और 3 GRSE द्वारा)।
    • निर्माण एवं डिज़ाइन: इसका निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), मुंबई द्वारा किया गया है और इसे भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो (WDB) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया है।
  • तकनीकी विशेषताएं:
    • विस्थापन (Displacement): लगभग 6,670 टन
    • लंबाई: 149 मीटर
    • गति (Top Speed): 28-32 नॉट्स
    • प्रणोदन (Propulsion): CODOG (Combined Diesel or Gas) सिस्टम
    • रडार: MF-STAR (इजरायली मूल का उन्नत AESA रडार)
    • मारक क्षमता: INS तारागिरी एक ‘हंटर-किलर’ (Hunter-Killer) जहाज है, जो हवा, सतह और पानी के नीचे एक साथ लड़ने में सक्षम है।
  • सतह से सतह: ब्रह्मोस (BrahMos) सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें।
  • हवाई रक्षा: बराक-8 (Barak-8) या MR-SAM (लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें)।
  • पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW): स्वदेशी वरुणस्त्र (Varunastra) टॉरपीडो और RBU-6000 रॉकेट लॉन्चर।
  • मुख्य गन: 76mm सुपर रैपिड गन माउंट (SRGM)।
  • स्वदेशी सामग्री: ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत, इस युद्धपोत में 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जिसमें 200 से अधिक MSMEs का योगदान शामिल है।
  • स्टील्थ क्षमता (Stealth Features): उन्नत रडार-अवशोषक कोटिंग और ‘X’ आकार के हल (Hull) डिजाइन के कारण इसका ‘रडार क्रॉस-सेक्शन’ (RCS) बहुत कम है, जिससे यह दुश्मन के रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आता।

रणनीतिक महत्व

  • हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में प्रभुत्व: चीन की बढ़ती समुद्री गतिविधियों के बीच, INS तारागिरी की कमीशनिंग भारतीय नौसेना की पूर्वी कमान (Eastern Fleet) की मारक क्षमता को मजबूत करेगी।
  • एकीकृत मॉड्यूलर निर्माण: इस जहाज को ‘इंटीग्रेटेड कंस्ट्रक्शन’ पद्धति से बनाया गया है, जिससे निर्माण समय में काफी कमी आई है।
  • विरासत का पुनर्जन्म: वर्तमान INS तारागिरी का नाम पूर्ववर्ती ‘लिएंडर क्लास’ फ्रिगेट (1980-2013) के नाम पर रखा गया है, जिसने 33 वर्षों तक देश की सेवा की थी।

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