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ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026 (Global Terrorism Index 2026) | Ankit Avasthi Sir

Global Terrorism Index 2026

Global Terrorism Index 2026

संदर्भ:

हाल ही में इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (IEP) द्वारा वैश्विक आतंकवाद सूचकांक (Global Terrorism Index – GTI) 2026 रिपोर्ट जारी की गई है, जिसमें 163 देशों में आतंकवाद के प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026 के प्रमुख निष्कर्ष: 

    • सुधार: रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में वैश्विक स्तर पर आतंकवाद से होने वाली मौतों में 28% की गिरावट (कुल 5,582 मौतें) आई है, जो 2007 के बाद का सबसे निचला स्तर है। हालाँकि, आतंकी घटनाओं का वितरण असमान रहा है।
  • शीर्ष 5 प्रभावित देश: पाकिस्तान (TTP और बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA)), बुर्किना फासो (साहेल क्षेत्र में जिहादी गतिविधियां), नाइजर (सीमावर्ती क्षेत्रों में हिंसा), नाइजीरिया (बोको हराम और ISWAP), माली (क्षेत्रीय अस्थिरता)।
  • पाकिस्तान शीर्ष पर: पहली बार पाकिस्तान इस सूचकांक में प्रथम स्थान (सर्वाधिक प्रभावित) पर पहुंच गया है, जहाँ 2025 में आतंकवाद से जुड़ी मौतों में 6% की वृद्धि हुई।
  • अफ्रीका का प्रभाव: शीर्ष 10 में से 6 देश उप-सहारा अफ्रीका (साहेल क्षेत्र) से हैं, जो वर्तमान में आतंकवाद का वैश्विक केंद्र बना हुआ है।
  • पश्चिमी देशों में वृद्धि: जबकि वैश्विक स्तर पर गिरावट आई, पश्चिमी देशों में आतंकवाद से होने वाली मौतें 280% बढ़कर 57 हो गईं, जो मुख्य रूप से राजनीतिक ध्रुवीकरण और अकेले हमलावरों (lone-wolf) से प्रेरित थीं। 
  • दक्षिण एशिया का परिदृश्य: दक्षिण एशिया लगातार 10वें वर्ष आतंकवाद से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र बना हुआ है।
  • सीमावर्ती क्षेत्रों में आतंकवाद: 76% से अधिक हमले अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के 100 किलोमीटर के भीतर हुए हैं।
  • ड्रोन तकनीक का उपयोग: कोलंबिया जैसे देशों में आतंकी समूहों द्वारा युद्ध के मैदान में उन्नत ड्रोन तकनीक का उपयोग बढ़ा है।
  • युवा कट्टरपंथ: पश्चिमी देशों में आतंकवाद की जांच में शामिल 42% व्यक्ति नाबालिग (minors) पाए गए हैं, जो ऑनलाइन कट्टरपंथ की बढ़ती चुनौती को दर्शाता है।
  • सबसे घातक संगठन: इस्लामिक स्टेट (IS) और उसके सहयोगी अभी भी दुनिया के सबसे घातक आतंकी समूह बने हुए हैं, जो वैश्विक स्तर पर लगभग 17% हमलों के लिए जिम्मेदार है।

भारत की स्थिति:

  • रैंकिंग: भारत सूचकांक में 13वें स्थान पर है।
  • सुधार: भारत ने आतंकवाद के प्रभाव में 43% की कमी दर्ज की है। पिछले वर्ष (11वें स्थान) की तुलना में भारत की रैंकिंग में दो अंकों का सुधार हुआ है।
    • आतंकी घटनाएं: 142 से अधिक घटनाएं।
    • मृत्यु: 100 से अधिक मौतें।
    • घायल: लगभग 118 व्यक्ति। 
  • GTI स्कोर: भारत का स्कोर 6.43 दर्ज किया गया है। (स्केल 0-10: जहाँ 0 का अर्थ कोई प्रभाव नहीं और 10 का अर्थ अत्यधिक प्रभाव है)।
  • अन्य पड़ोसी: अफगानिस्तान अब 11वें स्थान पर है, जबकि म्यांमार भारत के ठीक बाद (14वें स्थान) पर स्थित है।
  • चुनौतियां: रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अभी भी सीमा पार आतंकवाद और कुछ क्षेत्रों में सामुदायिक हिंसा जैसी सुरक्षा चिंताएं बनी हुई हैं। 
वैश्विक आतंकवाद सूचकांक (Global Terrorism Index – GTI):

  • यह एक व्यापक वार्षिक रिपोर्ट है, जो दुनिया भर में आतंकवाद के रुझानों और पैटर्न का विश्लेषण करती है। 
  • इसे सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) स्थित अंतरराष्ट्रीय थिंक-टैंक ‘इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस’ (Institute for Economics and Peace – IEP) द्वारा जारी किया जाता है।
  • GTI का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि आतंकवाद वैश्विक शांति, अर्थव्यवस्था और समाज को कैसे प्रभावित कर रहा है।
  • यह सूचकांक मुख्य रूप से ‘टेररिज्म ट्रैकर’ के डेटा का उपयोग करता है, जो दुनिया भर की आतंकी घटनाओं का रिकॉर्ड रखता है। सूचकांक की गणना चार प्रमुख संकेतकों के आधार पर की जाती है, जिन्हें पिछले पांच वर्षों के प्रभाव के अनुसार ‘भारित औसत’ (Weighted Average) दिया जाता है:
  • आतंकवादी घटनाओं की कुल संख्या: एक वर्ष में हुई कुल घटनाएं।
  • आतंकवाद के कारण होने वाली मौतें: सबसे अधिक भारित (Weighted) संकेतक।
  • आतंकवाद के कारण घायल हुए लोग: शारीरिक क्षति का आकलन।
  • बंधक बनाए गए व्यक्तियों की संख्या: अपहरण और फिरौती की घटनाएं।
  • सूचकांक में देशों को 0 से 10 के पैमाने पर स्कोर दिया जाता है। ‘0’ का अर्थ है आतंकवाद का शून्य प्रभाव, जबकि ’10’ का अर्थ है आतंकवाद का उच्चतम प्रभाव।

सूचकांक के प्रमुख आयाम:

  • भौगोलिक प्रभाव: रिपोर्ट बताती है कि कौन से क्षेत्र (जैसे साहेल, दक्षिण एशिया) आतंकवाद के केंद्र बने हुए हैं।
  • आतंकी संगठनों का विश्लेषण: यह इस्लामिक स्टेट (IS), अल-शबाब, और TTP जैसे समूहों की गतिविधियों और उनकी घातकता का विवरण देता है।
  • आर्थिक प्रभाव: आतंकवाद के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान (जैसे जीडीपी क्षति और सुरक्षा खर्च) का आकलन किया जाता है।

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