Ovum pick-up in-vitro fertilization technique may increase cow milk production
संदर्भ:
हाल ही में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) ने स्वदेशी साहीवाल नस्ल के बछड़ों के उत्पादन में एक ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की। वैज्ञानिकों ने मात्र पांच दिनों के भीतर उन्नत प्रजनन तकनीकों OPU–IVF–ET के माध्यम से पांच स्वस्थ साहीवाल बछड़ों का उत्पादन किया।
प्रयुक्त उन्नत तकनीक OPU–IVF–ET क्या हैं?
OPU-IVF-ET एक उन्नत सहायक प्रजनन तकनीक (ART) है, जिसमें OPU (Ovum Pick-Up – अंडाशय से अंडे निकालना), IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन – शरीर के बाहर प्रयोगशाला में निषेचन), और ET (Embryo Transfer – भ्रूण को गर्भाशय में प्रत्यारोपित करना) शामिल है। तकनीक के प्रमुख चरण:
- OPU (Ovum Pick-Up/अंडाणु संग्रह): बेहोशी में अल्ट्रासाउंड-गाइडेड सुई के माध्यम से महिला के अंडाशय (ovaries) से परिपक्व अंडे निकाले जाते हैं।
- IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन): निकाले गए अंडों को प्रयोगशाला में पुरुष के शुक्राणु के साथ मिलाकर निषेचित किया जाता है, जिससे भ्रूण (embryo) बनता है।
- ET (Embryo Transfer/भ्रूण स्थानांतरण): विकसित भ्रूण को कैथेटर के माध्यम से महिला के गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है, ताकि गर्भधारण हो सके।
- महत्व: यह तकनीक ‘जेनरेशन इंटरवल’ (दो पीढ़ियों के बीच का समय) को कम करती है, जिससे श्रेष्ठ गुणों वाले पशुओं की संख्या तेजी से बढ़ाई जा सकती हैं।
साहीवाल नस्ल का परिचय:
- परिचय: साहीवाल को भारत की सर्वश्रेष्ठ दुधारू नस्लों में गिना जाता है।
- मूल स्थान: अविभाजित भारत के पंजाब (अब पाकिस्तान) का साहीवाल/मोंटगोमरी क्षेत्र।
- अन्य नाम: लंबी बार, लोला (ढीली त्वचा के कारण), मुल्तानी और तेली।
- विशेषताएँ:
- ताप सहनशीलता (Heat Tolerance): अत्यधिक गर्म जलवायु में भी बेहतर प्रदर्शन।
- रोग प्रतिरोधकता: बाहरी और आंतरिक परजीवियों (Ticks आदि) के प्रति उच्च प्रतिरोध क्षमता।
- दुग्ध उत्पादन: औसत 2,000–3,000 लीटर प्रति लेक्टेशन (सर्वाधिक 4,500 लीटर तक)।
- A2 मिल्क: इसका दूध पाचन के लिए उत्तम ‘A2 केसिन प्रोटीन’ से भरपूर होता है।
रणनीतिक एवं आर्थिक महत्व:
- स्वदेशी नस्ल संरक्षण: यह तकनीक ‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ (RGM) के उद्देश्यों को पूरा करती है, जो स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और आनुवंशिक उन्नयन पर केंद्रित है।
- दुग्ध उत्पादकता में वृद्धि: स्वदेशी गायों की औसत उत्पादकता 2014-15 (927 kg/वर्ष) से बढ़कर 2023-24 में 1,292 kg/वर्ष हो गई है। IVF तकनीक इसे और गति देगी।
- किसानों की आय: उच्च गुणवत्ता वाले पशुओं से छोटे और मध्यम डेयरी किसानों की घरेलू आय में वृद्धि होगी।
- जलवायु लचीलापन (Climate Resilience): जलवायु परिवर्तन के दौर में, साहीवाल जैसी गर्मी सहने वाली नस्लें विदेशी नस्लों (जैसे Holstein-Friesian) की तुलना में अधिक टिकाऊ विकल्प हैं।
