Martyrs Day 2026
संदर्भ:
भारत में हर साल 23 मार्च को शहीद दिवस मनाया जाता है, जो ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ने वाले युवा क्रांतिकारियों के बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित करता है। इस वर्ष यह दिवस ‘मेरा भारत, मेरी जिम्मेदारी’ विषय पर आधारित था।
शहीद दिवस: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और घटनाक्रम:
शहीद दिवस (Shaheed Diwas) भारत के इतिहास में वह गौरवशाली और भावुक क्षण है, जो राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सपूतों की याद दिलाता है। इस दिन 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु की शहादत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के निर्णायक बिंदु के रूप में देखा जाता है।
- लाहौर षड्यंत्र केस (1928-1931): शहीद दिवस का सीधा संबंध लाहौर षड्यंत्र केस से है। साइमन कमीशन के विरोध के दौरान लाला लाजपत राय पर हुए लाठीचार्ज का बदला लेने के लिए भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जे.पी. सांडर्स की हत्या कर दी थी।
- इसके बाद, ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 8 अप्रैल 1929 को केंद्रीय विधानसभा (Central Legislative Assembly) में बम फेंका।
- गिरफ्तारी: इसके बाद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को गिरफ्तार करके उन पर मुकदमा चलाया गया। जेल के भीतर भी इन्होंने कैदियों के अधिकारों के लिए 64 दिनों की ऐतिहासिक भूख हड़ताल की, जिसमें उनके साथी जतिन दास शहीद हो गए।
- सजा: विशेष न्यायाधिकरण (Special Tribunal) ने सांडर्स की हत्या के लिए भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को मौत की सजा सुनाई।
- निर्धारित समय: फांसी 24 मार्च 1931 की सुबह तय थी।
- वास्तविक समय: जनाक्रोश के डर से ब्रिटिश सरकार ने नियमों को ताक पर रखकर 11 घंटे पहले, यानी 23 मार्च 1931 को शाम 7:33 बजे गुपचुप तरीके से उन्हें फांसी दे दी।
वैचारिक आयाम:
- HSRA का गठन: चंद्रशेखर आजाद के साथ मिलकर उन्होंने HRA को HSRA (हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन) में बदला, जिसका उद्देश्य भारत में ‘समाजवादी गणतंत्र’ की स्थापना करना था।
- सांप्रदायिकता का विरोध: भगत सिंह धर्मनिरपेक्षता के प्रबल समर्थक थे और उन्होंने युवाओं को धार्मिक कट्टरवाद से दूर रहने की चेतावनी दी थी।
शहीद दिवस का महत्व:
- स्वराज से सुराज: आजादी के बाद का लक्ष्य एक शोषणमुक्त समाज बनाना था, जिसकी कल्पना इन शहीदों ने की थी।
- युवा शक्ति: यह दिवस भारतीय युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी की प्रेरणा देता है।
- मानवाधिकार: जेल सुधारों और कैदियों के मानवीय व्यवहार के लिए भगत सिंह का संघर्ष आज भी मानवाधिकारों की बहस का हिस्सा है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
- नारा: ‘इंकलाब जिंदाबाद’ का नारा हसरत मोहानी ने लिखा था, लेकिन इसे जन-जन तक भगत सिंह ने पहुँचाया।
- साहित्यिक योगदान: जेल में भगत सिंह ने ‘मैं नास्तिक क्यों हूँ?’ (Why I am an Atheist) लेख लिखा, जो उनकी तार्किक शक्ति का प्रमाण है।
- अन्य शहीद दिवस: भारत में 30 जनवरी (महात्मा गांधी की पुण्यतिथि) को भी राष्ट्रीय स्तर पर शहीद दिवस मनाया जाता है।
