Project Sloth Bear
संदर्भ:
23 मार्च 2026 को विश्व भालू दिवस के अवसर पर केंद्र स्तर पर संचालित प्रोजेक्ट स्लॉथ बेयर के अंतर्गत भालू के संरक्षण को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
- प्रतिवर्ष 23 मार्च को दुनिया भर में भालुओं की सभी आठ प्रजातियों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए ‘विश्व भालू दिवस’ मनाया जाता है।
- इस वर्ष 2026 की थीम “आवासों की सुरक्षा, संवेदनशीलता का संरक्षण” (Protecting Habitats, Preserving Sentience) पर आधारित थी।
प्रोजेक्ट स्लॉथ बेयर के बारे मे:
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- परिचय: यह भारत सरकार द्वारा अक्टूबर 2025 में शुरू की गई एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य संकटग्रस्त स्लॉथ बेयर प्रजाति के संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान और जनसंख्या निगरानी के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार करना है।
- प्रमुख पहल:
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- पुनर्वास कार्यक्रम: Wildlife SOS और अन्य एनजीओ ने कलंदर समुदायों को वैकल्पिक आजीविका प्रदान की है, जिससे भालुओं के अवैध शिकार में कमी आई है।
- सुरक्षित बुनियादी ढाँचा: गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में ‘आत्मवत् सर्वभूतेषु’ (Aatmavat Sarvabhuteshu) जैसी पहल के तहत जल संचयन संरचनाएं बनाई गई हैं और फलों के पेड़ लगाए गए हैं ताकि भालू भोजन के लिए बस्तियों का रुख न करें।
- राष्ट्रीय दिशानिर्देश: भारत सरकार ने ‘मानव-भालू संघर्ष न्यूनीकरण’ (Human-Bear Conflict Mitigation) के लिए विशिष्ट गाइडलाइंस जारी की हैं, जो साइट-विशिष्ट समाधानों पर जोर देती हैं।
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- संरक्षण क्षेत्र:
- दारोजी स्लॉथ बेयर अभयारण्य (कर्नाटक): एशिया का पहला समर्पित अभयारण्य।
- जेस्सोर स्लॉथ बेयर अभयारण्य (गुजरात): पश्चिमी भारत का प्रमुख संरक्षण क्षेत्र।
- आगरा भालू संरक्षण केंद्र (उत्तर प्रदेश): दुनिया का सबसे बड़ा स्लॉथ बेयर रेस्क्यू सेंटर।
स्लॉथ बेयर के बारे में:
- परिचय: स्लॉथ बेयर (Melursus ursinus), जिसे भारतीय भालू भी कहा जाता है, भारतीय उपमहाद्वीप की एक अद्वितीय और महत्वपूर्ण प्रजाति है।
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- दिखावट: इनके शरीर पर लंबे, काले और उलझे हुए बाल होते हैं और छाती पर सफेद ‘V’ या ‘Y’ आकार का निशान होता है।
- अनुकूलन: इनके सामने के दांत नहीं होते और जीभ लंबी होती है, जो दीमक और चींटियों को चूसने (Suction feeding) के लिए अनुकूलित है। इसी कारण इन्हें ‘लैबियल बेयर’ भी कहा जाता है।
- स्वभाव: ये मुख्य रूप से रात्रिचर (Nocturnal) होते हैं और अपनी खराब दृष्टि के बावजूद सूंघने की तीव्र शक्ति रखते हैं।
- आवास: मुख्य रूप से भारत (90% आबादी), नेपाल, भूटान और श्रीलंका के निचले इलाकों में पाए जाते हैं। ये शुष्क और नम पर्णपाती वनों, घास के मैदानों और चट्टानी क्षेत्रों में रहना पसंद करते हैं।
- आहार: ये सर्वाहारी (Omnivorous) होते हैं। इनका मुख्य आहार दीमक और चींटियाँ हैं, लेकिन ये फल (विशेषकर महुआ), शहद और कंद-मूल भी चाव से खाते हैं।
संरक्षण स्थिति:
- IUCN रेड लिस्ट: सुभेद्य (Vulnerable)
- CITES: परिशिष्ट-I (Appendix I)
- WPA, 1972: अनुसूची-I (Schedule I)
प्रमुख खतरे:
- आवास का विखंडन: कृषि विस्तार और बुनियादी ढांचे के विकास के कारण इनके जंगलों का कम होना।
- मानव-भालू संघर्ष: भोजन की तलाश में बस्तियों में आने के कारण मनुष्यों के साथ हिंसक मुठभेड़।
- अवैध शिकार: इनके पित्त (Bile) और अंगों का अंतरराष्ट्रीय बाजार में अवैध व्यापार.
- विशेष: हर साल 12 अक्टूबर को विश्व स्लॉथ बेयर दिवस मनाया जाता है।
