Credit Guarantee Scheme 2.0
संदर्भ:
भारत सरकार ने हाल ही में सूक्ष्म वित्त क्षेत्र (Microfinance Sector) में तरलता (Liquidity) सुनिश्चित करने और छोटे उधारकर्ताओं तक ऋण की पहुंच बढ़ाने के लिए क्रेडिट गारंटी योजना 2.0 (CGSMFI-2.0) की घोषणा की।
क्रेडिट गारंटी योजना 2.0 (CGSMFI-2.0) के बारे में:
- परिचय: सूक्ष्म वित्त संस्थानों के लिए CGSMFI-2.0 एक सरकारी ऋण गारंटी ढांचा है, जो NCGTC के माध्यम से NBFC-MFI को दिए गए ऋणों पर चूक की स्थिति में गारंटी देकर छोटे उधारकर्ताओं तक 20,000 करोड़ रुपये तक का ऋण प्रवाह सुनिश्चित करता है।
- उद्देश्य: इस योजना का मुख्य उद्देश्य बैंकों और वित्तीय संस्थानों को NBFC-MFIs और अन्य MFIs को ऋण देने के लिए प्रोत्साहित करना है।
- नोडल एजेंसी: यह योजना National Credit Guarantee Trustee Company Limited (NCGTC) के माध्यम से संचालित की जा रही है।
- समय सीमा और बजट: यह योजना 30 जून, 2026 तक या ₹20,000 करोड़ के ऋण की गारंटी पूरी होने तक प्रभावी रहेगी।
योजना की मुख्य विशेषताएं:
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- स्तरित गारंटी कवर (Tiered Coverage): डिफ़ॉल्ट की स्थिति में NCGTC द्वारा प्रदान किया जाने वाला कवर संस्थान के आकार पर निर्भर करता है:
- छोटे MFIs: 80% गारंटी कवर।
- मध्यम MFIs: 75% गारंटी कवर।
- बड़े MFIs: 70% गारंटी कवर।
- ब्याज दर सीमा (Interest Rate Cap):
- बैंकों द्वारा MFIs को दिए जाने वाले ऋण पर ब्याज दर EBLR/MCLR + 2% प्रति वर्ष से अधिक नहीं होगी।
- MFIs जब छोटे उधारकर्ताओं को ऋण देंगे, तो उन्हें पिछले 6 महीनों की औसत ऋण दर से कम से कम 1% कम ब्याज दर रखनी होगी।
- गारंटी शुल्क: बैंकों/MLIs से स्वीकृत राशि पर पहले वर्ष 0.50% और उसके बाद बकाया राशि पर 0.50% वार्षिक शुल्क लिया जाएगा।
- स्तरित गारंटी कवर (Tiered Coverage): डिफ़ॉल्ट की स्थिति में NCGTC द्वारा प्रदान किया जाने वाला कवर संस्थान के आकार पर निर्भर करता है:
- लाभार्थी: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा परिभाषित सूक्ष्म वित्त के दायरे में आने वाले नए और पुराने छोटे उधारकर्ता।
- अनुमानित लाभ: लगभग 36 लाख छोटे उधारकर्ताओं को इस योजना से लाभ होने की उम्मीद है।
- वित्तीय समावेशन: यह ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में ऋण प्रवाह बढ़ाकर ‘लास्ट माइल’ (अंतिम व्यक्ति तक) वित्तीय पहुंच सुनिश्चित करता है।
