Agriculture-Photovoltaics
संदर्भ:
भारत सरकार वर्तमान में राष्ट्रीय कृषि-फोटोवोल्टिक्स मिशन (National Agri-photovoltaics Mission) शुरू करने पर विचार कर रही है, जिसका लक्ष्य 10 GW (गीगावाट) की क्षमता स्थापित करना है। केंद्रीय बजट 2026-27 में PM-KUSUM योजना के लिए आवंटन लगभग दोगुना कर ₹5,000 करोड़ कर दिया गया है, जो इस मिशन के लिए आधार प्रदान करता है।
कृषि-फोटोवोल्टिक्स क्या है?
कृषि-फोटोवोल्टिक्स (Agri-Photovoltaics – Agri-PV), जिसे ‘एग्रीवोल्टिक्स’ (Agrivoltaics) भी कहा जाता है, एक आधुनिक और टिकाऊ भूमि-उपयोग मॉडल है। इसमें एक ही भूमि के टुकड़े पर सौर ऊर्जा उत्पादन (Solar Power) और कृषि (Farming) दोनों कार्य एक साथ किए जाते हैं।
- फ्रांस, जर्मनी और जापान जैसे देश एग्रीवोल्टिक्स में अग्रणी हैं। फ्रांस ने इसके लिए दुनिया का पहला समर्पित कानून भी बनाया है।
- भारत सरकार का लक्ष्य 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करना है। PM-KUSUM योजना के तहत ‘खेतों के ऊपर सोलर’ को बढ़ावा दिया जा रहा है। हाल ही में गुजरात और महाराष्ट्र में कई पायलट प्रोजेक्ट्स सफल रहे हैं।
कार्यप्रणाली और संरचना:
Agri-PV प्रणाली में सौर पैनलों को जमीन से लगभग 8 से 15 फीट (2.5 – 4.5 मीटर) की ऊँचाई पर स्थापित किया जाता है। इनके बीच की दूरी (Row spacing) को इस तरह व्यवस्थित किया जाता है कि:
- नीचे फसलों को पर्याप्त सूर्य का प्रकाश मिले।
- ट्रैक्टर और अन्य कृषि मशीनों के संचालन के लिए पर्याप्त जगह हो।
- पैनलों का झुकाव (Tilt) अक्सर गतिशील (Tracking System) रखा जाता है ताकि प्रकाश का अधिकतम उपयोग हो सके।
प्रमुख लाभ:
- भूमि की दोहरी उत्पादकता (Land Use Efficiency): पारंपरिक सौर ऊर्जा फार्मों में कृषि संभव नहीं होती, लेकिन Agri-PV भूमि की दक्षता को 60% से 160% तक बढ़ा सकता है।
- जल संरक्षण: पैनलों की छाया के कारण मिट्टी से वाष्पीकरण (Evaporation) कम होता है, जिससे सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता 20-30% तक कम हो जाती है।
- फसल सुरक्षा: सौर पैनल फसलों को अत्यधिक गर्मी, ओलावृष्टि (Hail) और पाले से सुरक्षा प्रदान करते हैं।
- पैनल दक्षता में वृद्धि: पौधों के वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) से निकलने वाली नमी पैनलों को ठंडा रखती है, जिससे सौर सेल की बिजली उत्पादन क्षमता 3-5% तक बढ़ जाती है।
उपयुक्त फसलें:
सभी फसलें Agri-PV के लिए उपयुक्त नहीं होतीं। मुख्य रूप से छाया-सहिष्णु (Shade-tolerant) फसलों को प्राथमिकता दी जाती है:
- सब्जियां: टमाटर, मिर्च, पत्तेदार सब्जियां (पालक, सलाद पत्ता), और आलू।
- मसाले: अदरक, हल्दी और इलायची।
- औषधीय पौधे: एलोवेरा और अन्य जड़ी-बूटियां।
- चारा: पशुओं के लिए घास और चारा फसलें।
चुनौतियां:
- उच्च स्थापना लागत: ऊँचे और मजबूत स्ट्रक्चर (Steel structures) के कारण इसकी प्रारंभिक लागत सामान्य सोलर प्लांट से 25-40% अधिक होती है।
- धूल प्रबंधन: खेतों में जुताई और कटाई के दौरान उड़ने वाली धूल पैनलों पर जमा हो जाती है, जिससे उत्पादन घटता है। इसके लिए ऑटोमेटेड क्लीनिंग की आवश्यकता होती है।
- तकनीकी कौशल: किसानों को सौर ऊर्जा और आधुनिक कृषि दोनों के समन्वय के लिए विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।
