IQAir World Air Quality Report 2025
संदर्भ:
हाल ही में स्विस संगठन IQAir द्वारा ‘विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट 2025’ जारी की गई है, जिसमें वैश्विक पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त की गई है। यह रिपोर्ट 143 देशों के 9,446 शहरों के PM2.5 डेटा पर आधारित है।
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:
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- WHO मानकों का उल्लंघन: वैश्विक स्तर पर केवल 14% शहर ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वार्षिक PM2.5 मानक (5 μg/m3) को पूरा कर पाए हैं, जो पिछले वर्ष के 17% से कम है।
- सबसे प्रदूषित देश: पाकिस्तान (67.3 μg/m3) दुनिया का सबसे प्रदूषित देश रहा, उसके बाद बांग्लादेश, ताजिकिस्तान, चाड और लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो का स्थान है।
- सुरक्षित देश: केवल 13 देशों/क्षेत्रों (जैसे ऑस्ट्रेलिया, एस्टोनिया, आइसलैंड और पनामा) ने WHO के मानकों का पालन किया।
भारत की स्थिति:
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- राष्ट्रीय रैंकिंग: भारत दुनिया का छठा सबसे प्रदूषित देश रहा (2024 में यह 5वें स्थान पर था)। भारत का औसत वार्षिक PM2.5 स्तर 48.9 μg/m3 दर्ज किया गया, जो WHO मानक से लगभग 10 गुना अधिक है।
- सर्वाधिक प्रदूषित शहर: उत्तर प्रदेश का लोनी (Loni) दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर घोषित किया गया (112.5 μg/m3)।
- शीर्ष प्रदूषित शहर: दुनिया के 100 सबसे प्रदूषित शहरों में से 66 भारत के हैं। शीर्ष 10 में लोनी (1st), बायर्नीहाट (3rd), दिल्ली (4th), गाजियाबाद (5th) और बीरनगर (10th) शामिल हैं।
- राजधानी दिल्ली: दिल्ली लगातार 8वें वर्ष दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी बनी रही, जिसका PM2.5 स्तर 82.2 μg/m3 रहा।
प्रदूषण के मुख्य कारक:
- कृषि और मौसमी कारण: पराली जलाना (Stubble Burning) और सर्दियों में ‘तापमान व्युत्क्रमण’ (Temperature Inversion) प्रदूषकों को जमीन के करीब रोक लेते हैं।
- औद्योगिक और ऊर्जा क्षेत्र: तापीय विद्युत संयंत्रों (Thermal Power Plants) में ‘फ्लू-गैस डिसल्फराइजेशन’ (FGD) तकनीक की कमी और निर्माण धूल।
- परिवहन: वाहनों से होने वाला उत्सर्जन और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता।
- जलवायु परिवर्तन: जंगल की आग (Wildfires) ने 2025 में वैश्विक वायु गुणवत्ता को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया।
चुनौतियां:
- निगरानी: भारत में वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों की संख्या बढ़ी है, जिससे प्रदूषण के वास्तविक स्तर का पता चल रहा है। इसे विशेषज्ञों ने “निगरानी की सफलता का शिकार” कहा है।
- NCAP की भूमिका: राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत 20-30% प्रदूषण कम करने का लक्ष्य है, लेकिन इसके प्रभावी प्रवर्तन की आवश्यकता है।
- स्वास्थ्य प्रभाव: PM2.5 सूक्ष्म कण फेफड़ों और रक्तप्रवाह में प्रवेश कर हृदय रोग, अस्थमा और समय से पहले मृत्यु का कारण बनते हैं।
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP):
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