India new NDC target 2031-2035
संदर्भ:
हाल ही में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पेरिस समझौते के तहत वर्ष 2031-2035 की अवधि के लिए भारत के अद्यतन राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) को मंजूरी दी है।
NDC लक्ष्य क्या हैं?
राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (Nationally Determined Contributions – NDC) पेरिस समझौते (2015) के तहत जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक कार्यान्वयन का आधार स्तंभ हैं।
- यह प्रत्येक देश द्वारा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अनुकूलन के लिए की गई एक स्वैच्छिक और कानूनी रूप से बाध्यकारी प्रतिबद्धता है।
- पेरिस समझौते के अनुच्छेद 4.2 के अनुसार, प्रत्येक देश को हर 5 साल में अपने NDC को अपडेट करना अनिवार्य है।
मुख्य उद्देश्य:
- ग्लोबल वार्मिंग नियंत्रण: वैश्विक औसत तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तर से 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखना और 1.5 डिग्री तक सीमित करने का प्रयास करना।
- उत्सर्जन में कटौती: जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके कार्बन फुटप्रिंट को न्यूनतम करना।
- जलवायु लचीलापन (Climate Resilience): समुदायों और अर्थव्यवस्थाओं को जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों (जैसे बाढ़, चक्रवात) के प्रति तैयार करना।
- पारदर्शिता और जवाबदेही: एक अंतरराष्ट्रीय ढांचा प्रदान करना जहाँ देश अपनी प्रगति की रिपोर्ट साझा करें।
प्रमुख घटक:
- शमन (Mitigation): विशिष्ट क्षेत्रों (ऊर्जा, परिवहन, उद्योग) में उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य। जैसे- “2035 तक उत्सर्जन तीव्रता में 47% की कमी”।
- अनुकूलन (Adaptation): कृषि, जल संसाधनों और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में जलवायु जोखिमों को कम करने की योजना।
- वित्त और निवेश (Climate Finance): लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता का विवरण।
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण: हरित ऊर्जा और स्वच्छ तकनीकों को अपनाने के लिए तकनीकी सहयोग की आवश्यकता।
NDC 2031-2035 के प्रमुख मात्रात्मक लक्ष्य:
- उत्सर्जन तीव्रता (Emissions Intensity): भारत ने 2035 तक अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की उत्सर्जन तीव्रता को 2005 के स्तर से 47% तक कम करने का संकल्प लिया है। (उल्लेखनीय है कि 2005-2020 के बीच भारत पहले ही 36% की कमी हासिल कर चुका है)।
- गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता (Non-Fossil Fuel Capacity): 2035 तक कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 60% गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। भारत ने फरवरी 2026 तक ही 52.57% क्षमता हासिल कर ली है, जो पिछले 2030 के लक्ष्य से अधिक है।
- कार्बन सिंक (Carbon Sink): वन और वृक्ष आवरण के माध्यम से 2035 तक 3.5 से 4.0 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाने का लक्ष्य है।
रणनीतिक और गुणात्मक पहलू:
- सर्वांगीण सरकार दृष्टिकोण (Whole-of-Government Approach): इन लक्ष्यों को नीति आयोग के 10 कार्य समूहों द्वारा विभिन्न मंत्रालयों, विशेषज्ञों और नागरिक समाज के परामर्श से तैयार किया गया है।
- अनुकूलन और लचीलापन (Adaptation & Resilience): केवल उत्सर्जन कम करने के बजाय, नए NDC में आपदा लचीलापन, हिमालयी ग्लेशियरों की निगरानी, मैंग्रोव बहाली (MISHTI योजना) और हीट एक्शन प्लान पर विशेष जोर दिया गया है।
- मिशन LiFE: ‘लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट’ (LiFE) को जन आंदोलन के रूप में अपनाने और ‘एक पेड़ माँ के नाम’ जैसी पहलों के माध्यम से जन-भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। [1, 3, 6, 10]
प्रमुख समर्थक योजनाएं:
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission)
- पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना (PM Surya Ghar)
- पीएम-कुसुम (PM-KUSUM) और परमाणु ऊर्जा का विस्तार
- कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन और स्टोरेज (CCUS) तकनीक का विकास
महत्व:
- नेट-जीरो 2070: ये लक्ष्य भारत के 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने के दीर्घकालिक रोडमैप का हिस्सा हैं।
- जलवायु न्याय: भारत ‘समान लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों’ (CBDR-RC) के सिद्धांत पर जोर देता है, जो विकासशील देशों के विकास के अधिकार की रक्षा करता है।
- मिशन LiFE: ‘Lifestyle for Environment’ को एक वैश्विक जन आंदोलन के रूप में NDC में शामिल किया गया है ताकि व्यक्तिगत व्यवहार में बदलाव लाया जा सके।
- ग्रीन जॉब्स: अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में संक्रमण से सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और हरित हाइड्रोजन क्षेत्रों में लाखों नए रोजगार सृजित होने की संभावना है।
- वैश्विक नेतृत्व: भारत उन कुछ देशों में शामिल है जिसने अपने 2015 के लक्ष्यों को समय सीमा से बहुत पहले (लगभग 9-11 साल पहले) हासिल कर लिया है।
