Tunguska air defense missile system
संदर्भ:
हाल ही में रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना की रक्षा क्षमताओं को सशक्त करने के लिए 858 करोड़ रुपये के दो महत्वपूर्ण रक्षा अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें से एक प्रमुख समझौता तुंगुस्का (Tunguska) वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की खरीद के लिए है।
- भारतीय सेना के लिए इस प्रणाली की खरीद हेतु रूस की JSC रोसोबोरोनएक्सपोर्ट (Rosoboronexport) के साथ 445 करोड़ रुपये का अनुबंध किया गया है।
तुंगुस्का वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली क्या हैं?
तुंगुस्का (NATO नाम: SA-19 Grison) एक रूसी मूल की स्व-चालित वायु रक्षा प्रणाली (SPAAGM) है। इसे विशेष रूप से पैदल सेना और टैंक रेजिमेंटों को कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों, हेलीकॉप्टरों और क्रूज मिसाइलों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए विकसित किया गया है।
- निर्माण के समय यह दुनिया की पहली ऐसी प्रणाली थी जिसमें एंटी-एयरक्राफ्ट गन और मिसाइलों को एक ही चेसिस पर एकीकृत किया गया था।
इसकी विशेषताएं:
- संरचना: तुंगुस्का प्रणाली एक ‘ट्रैक्ड व्हीकल’ (GM-352) पर आधारित है, जो इसे उबड़-खाबड़ रास्तों पर चलने की क्षमता देता है।
- दोहरी मारक क्षमता: इसमें 30mm की दो 2A38M ऑटोमैटिक तोपें और 8 सतह से हवा में मार करने वाली (SAM) मिसाइलें लगी होती हैं।
- रडार प्रणाली: इसमें ‘हॉट शॉट’ (Hot Shot) रडार कॉम्प्लेक्स शामिल है, जिसमें लक्ष्य का पता लगाने वाला रडार (Range: 18-20 किमी) और लक्ष्य का पीछा करने वाला रडार (Range: 16 किमी) लगा होता है।
- चालक दल: इसमें आमतौर पर 4 सदस्य होते हैं (कमांडर, ड्राइवर, गनर और रडार ऑपरेटर)।
- हथियार प्रणाली: यह प्रणाली “हाइब्रिड” प्रकृति की है, जो इसे बेहद घातक बनाती है:
- 30mm गन्स (2A38M): फायर रेट: 3,900 से 5,000 राउंड प्रति मिनट। रेंज: क्षैतिज रूप से 4 किमी और ऊंचाई में 3 किमी तक। उपयोग: यह उन लक्ष्यों के लिए प्रभावी है जो मिसाइल की न्यूनतम सीमा से अंदर आ जाते हैं।
- मिसाइलें (9M311 सीरीज): रेंज: 2.5 किमी से 8 किमी तक (उन्नत संस्करण M1 में 10 किमी तक)। ऊंचाई: 3.5 किमी (11,500 फीट) तक के लक्ष्य को भेदने में सक्षम। गति: मिसाइल की गति लगभग 900 मीटर/सेकंड (मैक 2.6) है।
- ‘Shoot-and-Scoot’: यह प्रणाली चलते समय (On the move) भी रडार से ट्रैकिंग कर सकती है, लेकिन मिसाइल दागने के लिए इसे क्षण भर के लिए रुकना पड़ता है (हालाँकि गन से चलते हुए भी फायर किया जा सकता है)।
- ऑप्टिकल ट्रैकिंग: रडार जाम होने की स्थिति में, ऑपरेटर लक्ष्य को ट्रैक करने के लिए थर्मल इमेजिंग और ऑप्टिकल साइट का उपयोग कर सकता है।
- प्रतिक्रिया समय: लक्ष्य का पता चलने के 8-10 सेकंड के भीतर यह हमला करने के लिए तैयार हो जाती है।
महत्व:
- ड्रोन युद्ध: यूक्रेन युद्ध के अनुभव बताते हैं कि महंगे मिसाइल डिफेंस सिस्टम (जैसे S-400) के बजाय तुंगुस्का जैसे गन-मिसाइल हाइब्रिड सिस्टम ‘कामीकाजी ड्रोन’ को रोकने में अधिक किफायती और प्रभावी हैं।
- गैप फिलर: यह प्रणाली ‘आकाश’ (मध्यम दूरी) और कंधे पर रखकर चलाई जाने वाली ‘इगला’ (बहुत कम दूरी) के बीच के सुरक्षा अंतर को कम करने में सहायक है।
- भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी: यह अनुबंध रूस के साथ भारत के दीर्घकालिक रक्षा सहयोग को और मजबूती प्रदान करता है।
