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नासा आर्टेमिस II मिशन

NASA Artemis II Mission

NASA Artemis II Mission

संदर्भ:

NASA का Artemis II (आर्टेमिस II) मिशन 1 अप्रैल, 2026 को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च के लिए निर्धारित है। 50 से अधिक वर्षों में यह पहला मानव-युक्त चंद्र मिशन होगा, जो 1972 के अपोलो कार्यक्रम के बाद से चंद्रमा के पास से गुज़रेगा। 

  • मूल रूप से 2024 के लिए नियोजित इस मिशन को सुरक्षा चिंताओं, जैसे कि हाइड्रोजन ईंधन रिसाव और ओरियन के हीट शील्ड में सुधार के कारण 2026 तक टाल दिया गया था।

Artemis II मिशन के बारे मे:

  • परिचय: आर्टेमिस II एक 10-दिवसीय मिशन है, जिसमें अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की सतह पर उतरे बिना चंद्रमा के चारों ओर एक चक्कर लगाकर वापस पृथ्वी पर लौटेंगे।
  • लॉन्च स्थान: कैनेडी स्पेस सेंटर, फ्लोरिडा (लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39B)।
  • प्रक्षेपण यान: स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS), जो 8.8 मिलियन पाउंड का अधिकतम थ्रस्ट उत्पन्न करने वाला दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट है।
  • अंतरिक्ष यान: ओरियन (Orion) कैप्सूल, जिसे मनुष्यों को गहरे अंतरिक्ष में ले जाने और सुरक्षित वापस लाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • प्रक्षेपवक्र (Trajectory): मिशन ‘फ्री-रिटर्न ट्रेजेक्टरी’ (Free-return Trajectory) का उपयोग करेगा। इसमें चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण यान को प्राकृतिक रूप से पृथ्वी की ओर मोड़ देगा।
  • क्रू मेंबर: इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, जो अंतरिक्ष अन्वेषण में विविधता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रतिनिधित्व करते हैं:
  • रीड विसमैन (Reid Wiseman), कमांडर: नासा के अनुभवी अंतरिक्ष यात्री।
  • विक्टर ग्लोवर (Victor Glover), पायलट: गहरे अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति
  • क्रिस्टीना कोच (Christina Koch), मिशन विशेषज्ञ: चंद्रमा की कक्षा में जाने वाली पहली महिला
  • जेरेमी हैनसन (Jeremy Hansen), मिशन विशेषज्ञ: कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी (CSA) के माध्यम से चंद्रमा की यात्रा करने वाले पहले गैर-अमेरिकी नागरिक। 
  • चरण: मिशन को सुरक्षा और प्रदर्शन की बारीकी से जांच करने के लिए चरणों में विभाजित किया गया है:
  • पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO): लॉन्च के बाद, यान पृथ्वी की कक्षा में प्रणालियों की जांच करेगा।
  • उच्च पृथ्वी कक्षा (HEO): यान एक उच्च अंडाकार कक्षा में जाएगा जहाँ क्रू ओरियन के ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ और मैन्युअल नेविगेशन का परीक्षण करेगा।
  • ट्रांस-लूनर इंजेक्शन (TLI): इसके बाद, यान चंद्रमा की ओर अपनी यात्रा शुरू करेगा, जो पृथ्वी से लगभग 250,000 मील दूर है।
  • चंद्र फ्लाईबाई: क्रू चंद्रमा के ‘दूर के हिस्से’ (Far Side) के पीछे से गुज़रेगा, जहाँ वे पृथ्वी से लगभग 4,700 मील दूर होंगे—जो किसी भी मानव द्वारा अब तक की सबसे लंबी दूरी होगी। 

महत्व:

  • आर्टेमिस समझौता: भारत ने 2023 में आर्टेमिस समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे इसरो (ISRO) और नासा के बीच सहयोग के नए द्वार खुले हैं। यह मिशन वैश्विक अंतरिक्ष नीति में ‘शांतिपूर्ण अन्वेषण’ के सिद्धांतों को मजबूत करता है।
  • गगनयान के लिए प्रेरणा: भारत के अपने मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ के लिए आर्टेमिस II की तकनीक और सुरक्षा प्रोटोकॉल महत्वपूर्ण केस स्टडी हो सकते हैं।
  • गहरे अंतरिक्ष की चुनौतियां: यह मिशन सौर विकिरण (Solar Radiation) और लंबी अवधि के संचार के मुद्दों पर महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा। 
  • मानवीय अन्वेषण: यह चंद्रमा पर एक स्थायी मानव उपस्थिति बनाने और अंततः मंगल (Mars) तक पहुंचने के नासा के “Moon to Mars” विजन का हिस्सा है।

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