Newcastle disease outbreak
संदर्भ:
यूरोप में 2026 की शुरुआत से न्यूकैसल डिजीज (Newcastle Disease – ND) का प्रकोप तेजी से फैल रहा है, जिसने यूरोपीय पोल्ट्री उद्योग के लिए एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। वर्ष 2026 की पहली तिमाही में यह वायरस पूर्वी यूरोप से मध्य और दक्षिणी यूरोप की ओर फैल गया है।
- पोलैंड (Poland): यह देश वर्तमान में सबसे बुरी तरह प्रभावित है। जनवरी 2026 तक यहां 28 से अधिक प्रकोप स्थल पाए गए हैं, जिसके कारण 5,00,000 से अधिक पक्षियों का कलिंग करना पड़ा।
- जर्मनी (Germany): लगभग 18 वर्षों के बाद, जर्मनी के ब्रैंडनबर्ग (Brandenburg) क्षेत्र में व्यावसायिक पोल्ट्री में पहला मामला दर्ज किया गया। एक बड़े फार्म में लगभग 3,26,000 मुर्गियों का कलिंग करना पड़ा।
- स्पेन (Spain): वालेंसिया क्षेत्र में तीन साल बाद दिसंबर 2025 के अंत और जनवरी 2026 की शुरुआत में न्यूकैसल डिजीज की वापसी हुई, जिससे स्पेन का “ND-free” दर्जा छिन गया है।
न्यूकैसल रोग के बारे मे:
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कारक एजेंट: एवियन पैरामिक्सोवायरस टाइप-1 (APMV-1)
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प्रसार का तरीका: संक्रमित पक्षियों के मल, सांस और दूषित उपकरणों/कपड़ों के माध्यम से।
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लक्षण: श्वसन संबंधी समस्याएं, अंडों के उत्पादन में भारी गिरावट, गर्दन का मुड़ना और 100% तक मृत्यु दर।
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ज़ूनोटिक क्षमता: मनुष्यों में यह केवल हल्का कंजंक्टिवाइटिस (आंखों की सूजन) पैदा कर सकता है।
प्रसार के कारण:
- प्रवासी पक्षी (Migratory Birds): जंगली पक्षी इस वायरस के प्राकृतिक वाहक हैं, जो प्रवास के दौरान इसे एक देश से दूसरे देश ले जा रहे हैं।
- टीकाकरण की विफलता: पोलैंड और जर्मनी के कई ऐसे फार्मों में भी संक्रमण देखा गया जहां पक्षियों का पूर्ण टीकाकरण हो चुका था। मौजूदा टीके ‘जीनोटाइप VII’ (Genotype VII) स्ट्रेन को रोकने में असमर्थ है।
- बायोसिक्योरिटी में चूक: दूषित वाहनों और फार्म श्रमिकों के कपड़ों के माध्यम से वायरस का एक फार्म से दूसरे फार्म में पहुंचना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
आर्थिक और वैश्विक प्रभाव:
- व्यापार प्रतिबंध: “ND-free” दर्जा खोने के बाद स्पेन और पोलैंड जैसे देशों से पोल्ट्री निर्यात पर कई देशों ने प्रतिबंध लगा दिया है।
- खाद्य सुरक्षा: पक्षियों की बड़े पैमाने पर कलिंग और उत्पादन में गिरावट के कारण यूरोप में चिकन और अंडों की कीमतों में उछाल की संभावना है।
- EU नीति में बदलाव: भारी आर्थिक नुकसान को देखते हुए यूरोपीय आयोग अब ‘स्टैम्पिंग आउट’ (सामूहिक कलिंग) के बजाय निवारक टीकाकरण (Preventative Vaccination) और बेहतर बायोसिक्योरिटी प्रोटोकॉल पर जोर दे रहा है।
