Indigenous lethal Stealth UCAV drone
संदर्भ:
हाल ही में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने घातक Stealth UCAV कार्यक्रम के तहत ₹39,000 करोड़ की लागत से 60 घातक ड्रोन्स (आधिकारिक तौर पर ‘रेमोटली पायलेटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट’ – RPSA) की खरीद को मंजूरी दी है।
घातक UCAV ड्रोन क्या हैं?
घातक (Ghatak) भारत का पहला स्वदेशी स्टेल्थ अनमैन्ड कॉम्बैट एरियल व्हीकल (UCAV) है। यह एक स्वायत्त, जेट-संचालित मानवरहित लड़ाकू विमान है, जिसे दुश्मन के हवाई क्षेत्र में घुसकर सटीक हमले करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- इसका विकास DRDO की वैमानिकी विकास संस्था (ADE) द्वारा किया जा रहा है। शुरुआत में इसे AURA (Autonomous Unmanned Research Aircraft) के नाम से जाना जाता था।
- मुख्य प्रोजेक्ट से पहले एक छोटे प्रोटोटाइप ‘स्टेल्थ विंग फ्लाइंग टेस्टबेड’ (SWiFT) का सफल उड़ान परीक्षण जुलाई 2022 और दिसंबर 2023 में कर्नाटक के चित्रदुर्ग में किया गया।
घातक की विशेषताएं:
- डिज़ाइन और स्टेल्थ: यह विमान ‘फ्लाइंग-विंग’ (Flying-wing) विन्यास पर आधारित है, जो इसे राडार की पकड़ से लगभग अदृश्य बनाता है। इसमें कोई ऊर्ध्वाधर पूंछ (Tail-less) नहीं होती, जिससे राडार सिग्नेचर न्यूनतम हो जाता है।
- सामग्री: विमान का ढांचा 80-90% कार्बन-फाइबर कम्पोजिट सामग्री से बना है, जो हल्का होने के साथ-साथ राडार तरंगों को सोखने (Radar Absorbent Material) में सक्षम है।
- इंजन: इसे शक्ति देने के लिए स्वदेशी ‘ड्राय कावेरी’ (Dry Kaveri) टर्बोफैन इंजन का उपयोग किया जाएगा, जो 52 किलोन्यूटन का थ्रस्ट उत्पन्न करता है।
- हथियार: इसमें एक इंटरनल वेपन्स बे (Internal Weapons Bay) है, जिससे यह मिसाइलों (जैसे अस्त्र) और सटीक-निर्देशित बमों (PGMs) को छिपाकर ले जा सकता है।
- प्रणालियाँ: इसमें AI-संचालित मिशन कंप्यूटर, स्वदेशी AESA राडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर और ‘कोलिजन अवॉइडेंस’ (टक्कर रोकने वाली) प्रणालियाँ लगी हैं।
महत्व:
- गहरी पैठ (Deep Penetration): दुश्मन के सघन हवाई रक्षा कवच (जैसे S-400 या राडार नेटवर्क) को भेदकर दुश्मन के मुख्यालयों या मिसाइल बेस को नष्ट करने में सक्षम है।
- SEAD मिशन: यह दुश्मन की हवाई रक्षा प्रणालियों (जैसे राडार और मिसाइल बैटरी) को नष्ट करने के लिए ‘फर्स्ट-वेव’ हमले कर सकता है।
- मानव-मशीन टीमिंग (MUM-T): भविष्य में यह भारत के 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान AMCA के साथ मिलकर एक ‘लोयल विंगमैन’ की भूमिका निभाएगा।
- रक्षा आत्मनिर्भरता: विदेशी ड्रोन्स (जैसे MQ-9B) पर निर्भरता कम होगी और जटिल इंजन व स्टेल्थ तकनीक में भारत का वैश्विक प्रभाव बढ़ेगा।
