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स्वदेशी कोयला-से-अमोनियम नाइट्रेट परियोजना

Indigenous Coal-to-Ammonium Nitrate Project

Indigenous Coal-to-Ammonium Nitrate Project

संदर्भ:

हाल ही में, भारत ने ओडिशा में अपनी तरह की पहली स्वदेशी ‘कोयला-से-अमोनियम नाइट्रेट’ (Coal-to-Ammonium Nitrate) परियोजना शुरू की है, जो भारत के राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन (National Coal Gasification Mission) के तहत आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है।

परियोजना का संक्षिप्त विवरण:

यह परियोजना ओडिशा के झारसुगुडा जिले के लखनपुर में स्थापित की जा रही है। इसे भारत कोल गैसीकरण और केमिकल्स लिमिटेड (BCGCL) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है, जो कोल इंडिया लिमिटेड (CIL – 51%) और भेल (BHEL – 49%) का एक संयुक्त उद्यम (Joint Venture) है। 

  • उत्पादन क्षमता: यह संयंत्र प्रतिदिन 2,000 टन अमोनियम नाइट्रेट का उत्पादन करेगा।
  • निवेश: इस परियोजना में लगभग ₹25,000 करोड़ का अनुमानित निवेश किया जा रहा है। कोयला मंत्रालय द्वारा ₹1,350 करोड़ का प्रोत्साहन (Incentive) दिया जाएगा। 
  • तकनीकी भागीदार: इसमें भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) द्वारा विकसित स्वदेशी गैसीकरण तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। [1, 2, 9]
  • स्वदेशी तकनीक: भारत में उपलब्ध कोयले में राख (Ash) की मात्रा बहुत अधिक (30-45%) होती है, जिससे विदेशी गैसीफायर अक्सर विफल हो जाते हैं। इसी से निपटने के लिए नई तकनीक इस्तेमाल की जानी है:

  • भेल ने प्रेसराइज्ड फ्लुइडाइज्ड बेड गैसीफिकेशन (PFBG) तकनीक विकसित की है, जो विशेष रूप से भारतीय उच्च-राख वाले कोयले के लिए उपयुक्त है। यह पहली बार है जब इस घरेलू तकनीक का व्यावसायिक स्तर पर बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है। 

अमोनियम नाइट्रेट का महत्व:

  • शक्तिशाली उर्वरक: उच्च नाइट्रोजन सामग्री (लगभग 33-34%) के कारण यह पौधों की वृद्धि के लिए एक प्रभावी उर्वरक है। यह यूरिया की तुलना में अधिक स्थिर है और वातावरण में नाइट्रोजन का नुकसान कम करता है।
  • खनन और उत्खनन: यह व्यावसायिक विस्फोटकों, विशेष रूप से ANFO (Ammonium Nitrate Fuel Oil) का मुख्य घटक है। भारत में कोयला, लौह अयस्क और चूना पत्थर के खनन में इसका व्यापक उपयोग होता है।
  • बुनियादी ढांचा विकास: सड़क निर्माण, बांध परियोजनाओं और सुरंग बनाने जैसे बड़े बुनियादी ढांचा कार्यों में चट्टानों को तोड़ने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
  • एनेस्थेटिक गैस का उत्पादन: चिकित्सा क्षेत्र में उपयोग होने वाली नाइट्रस ऑक्साइड (लाफिंग गैस) बनाने के लिए अमोनियम नाइट्रेट को गर्म किया जाता है।
  • कोल्ड पैक्स: पानी में घुलने पर यह ऊष्माशोषी (endothermic) प्रतिक्रिया करता है, जिससे इसका उपयोग ‘इंस्टेंट कोल्ड पैक्स’ में किया जाता है।

आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ:

  • आयात प्रतिस्थापन: भारत वर्तमान में बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस और अमोनियम नाइट्रेट का आयात करता है। यह परियोजना विदेशी मुद्रा की बचत करेगी।
  • स्वच्छ कोयला तकनीक: कोयले को सीधे जलाने के बजाय उसे गैस (Syngas) में बदलना पर्यावरण के लिहाज से कम प्रदूषणकारी है।
  • रणनीतिक लाभ: कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) स्वयं इस अमोनियम नाइट्रेट का उपयोग करेगी, जिससे इसकी उत्पादन लागत में कमी आएगी और आयात पर निर्भरता कम होगी।
  • रोजगार: परियोजना के निर्माण और संचालन के दौरान क्षेत्र में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

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