नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 | Women Empowerment Act 2023
संदर्भ: हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 2023) के क्रियान्वयन को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक को मंजूरी दी है। यह कदम 2029 के लोकसभा चुनावों तक महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को जमीन पर उतारने के उद्देश्य से उठाया गया है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 क्या हैं?
नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 2023) भारत में महिला सशक्तिकरण को सुदृढ़ करने संबंधी एक महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी प्रावधान है, जिसका उद्देश्य विधायी निकायों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना है।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: यह विधेयक 27 वर्षों के लंबे संघर्ष का परिणाम है:
- 1996: एच.डी. देवेगौड़ा सरकार द्वारा पहली बार पेश किया गया।
- 1998-2003: अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने चार बार प्रयास किया लेकिन आम सहमति नहीं बनी।
- 2010: राज्यसभा में पारित हुआ, लेकिन लोकसभा में लैप्स हो गया।
- 2023: 128वें संशोधन विधेयक के रूप में पेश होकर 106वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम के रूप में पारित हुआ।
मुख्य संवैधानिक प्रावधान:
- अनुच्छेद 330A: लोकसभा में महिलाओं के लिए कुल सीटों की एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित की जाएंगी।
- अनुच्छेद 332A: प्रत्येक राज्य की विधानसभा में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण अनिवार्य होगा।
- अनुच्छेद 239AA: यह आरक्षण दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की विधानसभा पर भी लागू होगा।
- SC/ST उप-आरक्षण: अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए पहले से आरक्षित सीटों में से भी एक-तिहाई सीटें उन श्रेणियों की महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
कार्यान्वयन की शर्तें:
- जनगणना और परिसीमन: यह आरक्षण अगली जनगणना के प्रकाशन और उसके बाद होने वाले परिसीमन (Delimitation) अभ्यास के बाद ही लागू होगा।
- अवधि: यह कानून लागू होने के बाद 15 वर्षों तक प्रभावी रहेगा। संसद कानून बनाकर इस अवधि को आगे बढ़ा सकती है।
- रोटेशन: आरक्षित सीटों का निर्धारण प्रत्येक परिसीमन के बाद रोटेशन के आधार पर किया जाएगा।
आवश्यकता:
- प्रतिनिधित्व की कमी: वर्तमान लोकसभा (17वीं) में केवल 15% महिला सांसद हैं, जबकि विधानसभाओं में यह औसत मात्र 9% है।
- लैंगिक समानता: विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वैश्विक लिंग अंतर रिपोर्ट 2023 के अनुसार, राजनीतिक सशक्तिकरण में भारत को अभी लंबी दूरी तय करनी है।
- नीति निर्माण: महिलाओं की भागीदारी से बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसे विषयों पर अधिक संवेदनशील कानून बनने की संभावना बढ़ती है।
प्रमुख चुनौतियां:
- OBC कोटा का अभाव: विपक्षी दलों और कई विशेषज्ञों ने इसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण न होने पर सवाल उठाए हैं।
- कार्यान्वयन में देरी: जनगणना और परिसीमन से जुड़ाव के कारण इसे 2029 या उसके बाद ही लागू किया जा सकेगा, जो एक बड़ी बाधा है।
- राज्यसभा का अपवर्जन: यह आरक्षण राज्यसभा और राज्य विधान परिषदों पर लागू नहीं होता है।
| वर्तमान संशोधन:परिसीमन का आधार: आरक्षण को लागू करने के लिए परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया अब 2027 की जनगणना की प्रतीक्षा करने के बजाय 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होगी।सीटों की संख्या में वृद्धि: नए प्रस्ताव के तहत लोकसभा सीटों की संख्या वर्तमान 543 से बढ़ाकर 816 करने का लक्ष्य है।आरक्षित सीटें: इस विस्तारित संख्या में से 273 सीटें (लगभग 33%) महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। |