वूली-नेक्ड स्टॉर्क | Woolly-Necked Stork

संदर्भ:
हाल ही में तमिलनाडु के तंजावुर जिले में वूली-नेक्ड स्टॉर्क (Woolly-Necked Stork) की दुर्लभ उपस्थिति दर्ज की गई। तंजावुर के वन्नारपेट्टई गांव के धान के खेतों में पक्षी प्रेमी एस. श्रीराम द्वारा इस पक्षी को देखा गया, जिसके बाद ‘लुप्तप्राय वन्यजीव और पर्यावरण ट्रस्ट’ (EWET) के शोधकर्ताओं ने इसकी पुष्टि की।
वूली-नेक्ड स्टॉर्क के बारे में:
- वैज्ञानिक नाम: सिकोनिया एपिस्कोपस (Ciconia episcopus)।
- विवरण: यह मध्यम आकार का स्टॉर्क (75–92 सेमी लंबा) है।
- इसका शरीर मुख्य रूप से चमकदार काला होता है, लेकिन इसकी गर्दन पर सफेद ऊनी पंख होते हैं जो इसे विशिष्ट रूप देते हैं।
- इसकी पूंछ सफेद और गहराई से द्विभाजित होती है, जो अक्सर काले पंखों से ढकी रहती है।
- इसकी आंखें गहरे लाल (crimson) रंग की होती हैं और पैर लंबे व लाल रंग के होते हैं।
- विविध आवास: यह प्रजाति आर्द्रभूमि (wetlands), नदियों के किनारे, तालाबों, मौसमी जलाशयों और विशेष रूप से धान के खेतों में पाई जाती है।
- अनुकूलन क्षमता: दक्षिण एशिया में, विशेष रूप से भारत में, यह पक्षी मानव-प्रभुत्व वाले कृषि क्षेत्रों और सिंचन नहरों के आसपास रहने के लिए अत्यधिक अनुकूलित हो गया है।
- प्रवास: यह मुख्यतः एक स्थानीय निवासी पक्षी है, लेकिन भोजन और पानी की उपलब्धता के आधार पर स्थानीय प्रवास करता है।
- भोजन: यह मुख्य रूप से मांसाहारी है। इसके आहार में मछली, मेंढक, सांप, छिपकली, केकड़े, मोलस्क और बड़े कीट शामिल हैं।
- शिकार की तकनीक: यह उथले पानी या वनस्पतियों के बीच धीरे-धीरे चलकर अपने शिकार को पकड़ता है।
- सामाजिक व्यवहार: ये अक्सर अकेले या छोटे समूहों में देखे जाते हैं, लेकिन अनुकूल परिस्थितियों में सैकड़ों की संख्या में भी एकत्रित हो सकते हैं।
- प्रजनन: दक्षिण भारत में इनका प्रजनन काल आमतौर पर जुलाई से सितंबर और उत्तर भारत में दिसंबर से मार्च के बीच होता है। एक घोंसले में आमतौर पर 2 से 5 अंडे होते हैं।
- IUCN रेड लिस्ट: इसे ‘निकट संकटग्रस्त’ (Near Threatened) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। पहले इसे ‘अतिसंवेदनशील’ (Vulnerable) माना जाता था।
- जनसंख्या अनुमान: दक्षिण एशिया में इसकी संख्या लगभग 1,20,000 से 3,10,000 के बीच होने का अनुमान है।
- खतरे: निवास स्थान का विनाश, कृषि रसायनों (Pesticides) का बढ़ता उपयोग और कुछ क्षेत्रों में शिकार इसके मुख्य खतरे हैं।