UPI के 10 वर्ष पूरे | UPI completes 10 years

संदर्भ:
हाल ही में एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI) ने अपनी स्थापना के 10 गौरवशाली वर्ष सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। वर्ष 2016 में शुरू की गई यह प्रणाली आज भारत की “डिजिटल जीवन रेखा” बन चुकी है, जिसने देश को नकद-प्रधान अर्थव्यवस्था से विश्व की अग्रणी रीयल-टाइम डिजिटल भुगतान अर्थव्यवस्था में बदल दिया है।
डिजिटल भुगतान प्रणाली UPI के बारे में:
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- परिचय: UPI एक रियल-टाइम भुगतान प्रणाली (Real-time Payment System) है जो मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से दो बैंक खातों के बीच तुरंत धन हस्तांतरण की सुविधा प्रदान करती है। यह कई बैंक खातों को एक ही मोबाइल ऐप (जैसे BHIM, Google Pay, PhonePe) में एकीकृत करने की अनुमति देता है।
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शुरुआत: इसकी शुरुआत 11 अप्रैल 2016 को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के तत्कालीन गवर्नर डॉ. रघुराम राजन द्वारा मुंबई में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की गई थी। अगस्त 2016 से बैंकों ने अपने यूपीआई-सक्षम ऐप सार्वजनिक रूप से जारी करना शुरू किए।
- निर्माणकर्ता: UPI को भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा विकसित किया गया है। NPCI भारत में खुदरा भुगतान और निपटान प्रणाली के लिए एक ‘अंब्रेला’ संस्था है, जिसे RBI और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) द्वारा प्रमोट किया गया है।
प्रमुख विशेषताएं:
- 24/7 उपलब्धता: यह सेवा साल के 365 दिन और 24 घंटे तत्काल फंड ट्रांसफर के लिए उपलब्ध है।
- वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (VPA): पैसे भेजने या प्राप्त करने के लिए बैंक खाता नंबर या IFSC कोड की आवश्यकता नहीं होती; केवल एक विशिष्ट UPI ID (जैसे user@bank) पर्याप्त है।
- सिंगल क्लिक ऑथेंटिकेशन: लेनदेन को सुरक्षित करने के लिए केवल एक व्यक्तिगत UPI PIN की आवश्यकता होती है।
- बहुमुखी भुगतान: इसके जरिए व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) और व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) भुगतान संभव है, जिसमें क्यूआर कोड (QR Code) और मोबाइल नंबर का उपयोग किया जा सकता है।
- नवाचार: UPI Lite (बिना पिन के छोटा भुगतान), 123PAY (फीचर फोन के लिए), और UPI Circle जैसे नए फीचर्स ने इसे और सुलभ बनाया है।
- UPI Lite & Lite X: छोटे भुगतानों (₹500 तक) के लिए बिना पिन के भुगतान की सुविधा। UPI Lite X कमजोर इंटरनेट वाले क्षेत्रों में ऑफलाइन लेनदेन की अनुमति देता है।
- Credit on UPI: अब उपयोगकर्ता अपने बैंक से पूर्व-स्वीकृत ‘क्रेडिट लाइन’ को यूपीआई से जोड़कर भुगतान कर सकते हैं।
- UPI 123PAY: बिना स्मार्टफोन और इंटरनेट के फीचर फोन उपयोगकर्ताओं के लिए वॉयस-आधारित भुगतान।
- Tap & Pay: NFC तकनीक के माध्यम से बिना QR कोड स्कैन किए केवल फोन टैप करके भुगतान।
UPI की एक दशक की विकास यात्रा (2016-2026):
- ऐतिहासिक उपलब्धि: मार्च 2026 में यूपीआई ने 22.64 अरब लेनदेन का रिकॉर्ड बनाया, जो इसके लॉन्च के बाद का उच्चतम मासिक स्तर है।
- लेनदेन का पैमाना: पिछले 10 वर्षों में लेनदेन की मात्रा (Volume) में 12,000 गुना और मूल्य (Value) में 4,000 गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
- बाजार हिस्सेदारी: भारत के कुल खुदरा डिजिटल लेनदेन में यूपीआई की हिस्सेदारी 81% तक पहुँच गई है। [2, 6, 7, 8]
- वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion): यूपीआई ने बैंक खाते और मोबाइल को जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों तक बैंकिंग सुविधाओं को पहुँचाया है। UPI Lite और 123PAY जैसे नवाचारों ने कम कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों और फीचर फोन उपयोगकर्ताओं को भी इस पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा बनाया है।
- अर्थव्यवस्था पर प्रभाव: अध्ययनों के अनुसार, यूपीआई ने दक्षता और लागत बचत के माध्यम से भारत की जीडीपी (2022) में लगभग 16.2 बिलियन डॉलर का योगदान दिया है। यह अब देश के कुल मुद्रा भंडार का लगभग 70% डिजिटल रूप में प्रबंधित कर रहा है।
- वैश्विक नेतृत्व (Global Vishwaguru): भारत वर्तमान में वैश्विक रीयल-टाइम भुगतान मात्रा का 49% अकेले संचालित करता है। यूपीआई अब संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, फ्रांस, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, मॉरीशस और कतर जैसे देशों में स्वीकार्य या वहां के सिस्टम से लिंक है।