हंगरी में विक्टर ओर्बन के 16 वर्षों के शासन का अंत | Viktor Orban 16-year rule ends in Hungary

संदर्भ:
हंगरी की राजनीति में एक युगांतकारी परिवर्तन हुआ है। 12 अप्रैल, 2026 को हुए संसदीय चुनावों में विक्टर ऑर्बन (Viktor Orbán) की 16 साल लंबी सत्ता का अंत हो गया है। ऑर्बन, जो 2010 से लगातार प्रधानमंत्री थे, को उनके ही पूर्व सहयोगी पीटर मग्यार (Péter Magyar) और उनकी ‘टिस्ज़ा पार्टी’ (Tisza Party) ने एक ऐतिहासिक चुनावी मुकाबले में पराजित किया है। [
चुनावी परिणाम और सत्ता परिवर्तन:
हंगरी की नेशनल असेंबली की 199 सीटों के लिए हुए इस चुनाव में टिस्ज़ा पार्टी ने भारी बहुमत हासिल किया है:
- परिणाम: मग्यार की पार्टी ने लगभग 138 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत प्राप्त किया है।
- फ़िडेज़ (Fidesz) की हार: ऑर्बन की दक्षिणपंथी पार्टी केवल 55 सीटों पर सिमट गई, जो उसकी सीटों में आधे से अधिक की गिरावट है।
- स्वीकारोक्ति: विक्टर ऑर्बन ने चुनाव की रात ही अपनी हार स्वीकार कर ली और पीटर मग्यार को जीत की बधाई दी।
ऑर्बन की हार के प्रमुख कारण:
- सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency): 16 वर्षों तक एकछत्र राज और ‘अनुदारवादी लोकतंत्र’ (Illiberal Democracy) के मॉडल से जनता में उपजी थकान।
- पीटर मग्यार का उदय: मग्यार कभी ऑर्बन के करीबी थे। उन्होंने सत्ता के भीतर के भ्रष्टाचार को उजागर कर जनता का विश्वास जीता।
- आर्थिक संकट: हंगरी पिछले कुछ वर्षों से उच्च मुद्रास्फीति (EU में सर्वाधिक) और आर्थिक स्थिरता की कमी से जूझ रहा था।
- EU के साथ संबंध: ऑर्बन के रूस-समर्थक रुख और यूक्रेन सहायता पर ‘वीटो’ के कारण हंगरी कूटनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ गया था और EU फंड्स रुक गए थे।
- भ्रष्टाचार के आरोप: ऑर्बन के शासन पर ‘क्रोनी कैपिटलिज्म’ और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के गंभीर आरोप थे।
नई सरकार की प्राथमिकताएं:
- यूरोपीय संघ (EU) से सुधार: मग्यार का मुख्य लक्ष्य हंगरी के रुके हुए 27 बिलियन यूरो के EU फंड्स को बहाल करना और संबंधों को मधुर बनाना है।
- रूस और यूक्रेन: उन्होंने स्पष्ट किया है कि हंगरी अब रूस का ‘ट्रोजन हॉर्स’ नहीं बनेगा। वे यूक्रेन की संप्रभुता का समर्थन करते हैं, हालांकि नाटो में उनकी तत्काल सदस्यता पर सतर्क हैं।
- भ्रष्टाचार पर नकेल: चुनाव जीतने के बाद मग्यार ने उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई का संकल्प लिया है जिन्होंने ‘हंगरी को लूटा’।
वैश्विक प्रभाव
यह परिणाम रूस के राष्ट्रपति पुतिन और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि ऑर्बन उनके प्रमुख यूरोपीय सहयोगी थे। यूरोपीय संघ के नेताओं ने इसे ‘लोकतंत्र की जीत’ बताते हुए खुशी व्यक्त की है।
हंगरी के बारे में:
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