131वां संविधान संशोधन विधेयक 2026 | 131st Constitutional Amendment Bill 2026

संदर्भ:
लोकसभा में 17 अप्रैल 2026 को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करने में विफल रहा।
- सदन में इस विधेयक पर हुए मतविभाजन के आंकड़े रहे: पक्ष में मत: 298, विरोध में मत: 230, कुल उपस्थित सदस्य: 528
- अनुच्छेद 368 के तहत किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का कम से कम दो-तिहाई बहुमत अनिवार्य है।
- इस मामले में, विधेयक को पारित करने के लिए लगभग 352 मतों की आवश्यकता थी, लेकिन यह केवल 298 मत ही जुटा पाया।
131वें संविधान संशोधन विधेयक के मुख्य प्रावधान:
- लोकसभा की सीटों में वृद्धि: विधेयक में लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या को 550 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था (815 राज्यों से और 35 केंद्र शासित प्रदेशों से)।
- महिला आरक्षण का क्रियान्वयन: वर्ष 2023 के 106वें संशोधन (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के तहत महिलाओं को मिलने वाले 33% आरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए परिसीमन की शर्त को सरल बनाना।
- परिसीमन पर रोक हटाना: 84वें संशोधन (2001) के तहत 2026 तक सीटों की संख्या पर लगी रोक को हटाकर तत्काल परिसीमन का मार्ग प्रशस्त करना।
- जनगणना आधार: 2027 की जनगणना की प्रतीक्षा किए बिना उपलब्ध नवीनतम आंकड़ों (जैसे 2011 की जनगणना) के आधार पर परिसीमन की अनुमति देना।
विपक्ष की चिंताएं:
- उत्तर-दक्षिण असंतुलन: दक्षिण भारतीय राज्यों को डर है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से उनकी संसदीय शक्ति कम हो जाएगी, क्योंकि उन्होंने परिवार नियोजन में बेहतर प्रदर्शन किया है।
- संघवाद पर खतरा: विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सीटों की संख्या बढ़ाने से केंद्र अधिक शक्तिशाली होगा और राज्यों की स्वायत्तता प्रभावित होगी।
- महिला आरक्षण में ‘धोखाधड़ी’: विपक्ष का तर्क है कि सरकार महिला आरक्षण को परिसीमन के साथ जोड़कर इसे अनिश्चित काल के लिए टालना चाहती है।
- संसदीय प्रक्रिया: बिना पर्याप्त परामर्श और स्थायी समिति की समीक्षा के इसे “विशेष सत्र” में लाने पर भी सवाल उठाए गए।
विधेयक के गिरने का प्रभाव:
इस विधेयक के पारित न होने के कारण सरकार को इसके साथ जुड़े दो अन्य विधेयक भी वापस लेने पड़े: परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026।