Apni Pathshala

समुद्र साहस नौकायन अभियान

समुद्र साहस नौकायन अभियान | Sea ​​adventure sailing expedition

Sea ​​adventure sailing expedition

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय सेना की रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी (Regiment of Artillery) ने अपनी स्थापना के 200 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में ‘समुद्र साहस’ (Samudra Sahas) नामक एक ऐतिहासिक नौकायन अभियान (Sailing Expedition) शुरू किया।  

‘समुद्र साहस’ अभियान के बारे में:

  • परिचय: 
  • प्रस्थान स्थल: इसे मुंबई के मार्वे से लेफ्टिनेंट जनरल एन. एस. सरना (Lt Gen N. S. Sarna), कमांडेंट, स्कूल ऑफ आर्टिलरी द्वारा हरी झंडी दिखाई गई।
  • उद्देश्य: यह अभियान रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी के द्विशताब्दी समारोह (Bicentenary Celebrations) का हिस्सा है। इसका लक्ष्य सैन्य कर्मियों के बीच साहस, टीम वर्क, लचीलापन और समुद्री जागरूकता को बढ़ावा देना है।
  • विशेष उपलब्धि: यह किसी आर्टिलरी रेजिमेंट द्वारा आयोजित किया गया पहला ‘ब्लू वॉटर’ (Blue Water) नौकायन अभियान है। 
  • प्रशिक्षण: इस चुनौतीपूर्ण मिशन के लिए चालक दल ने हैवी ब्रिज ट्रेनिंग सेंटर (Heavy Bridge Training Centre), मार्वे में कठोर प्रशिक्षण प्राप्त किया है। 

  • सहयोग: इस अभियान को भारतीय नौसेना (Indian Navy) और भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) द्वारा प्रशासनिक और परिचालन सहायता प्रदान की जा रही हैं। 

अभियान की तकनीकी और परिचालन विशेषताएं:

दूरी

लगभग 520 समुद्री मील (Nautical Miles)

नौका का प्रकार

21-फीट ‘सीबर्ड क्लास’ (Seabird Class) नौकायन नावें

क्षेत्र

कोंकण तट (Konkan Coast)

चरण (Legs)

चार चरणों में विभाजित: मुंबई से विजयदुर्ग, विजयदुर्ग से गोवा, पुनः गोवा से विजयदुर्ग और अंत में मुंबई वापसी

नेतृत्व

कैप्टन क्षितिज नायर और सूबेदार प्रकाश फुंडे

महत्व:

  • Blue Water Sailing: गहरे समुद्र में लंबी दूरी की नौकायन, जो समुद्र की लहरों और हवा के पैटर्न (2-15 समुद्री मील की गति) का सामना करने की क्षमता का परीक्षण करती है।
  • National Security & Maritime Awareness: इस प्रकार के अभियान थल सेना के सैनिकों को समुद्री सुरक्षा और तटीय भूगोल की बेहतर समझ प्रदान करते हैं।
  • ऐतिहासिक महत्व: यह अभियान छत्रपति शिवाजी महाराज की समुद्री विरासत को श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

भारतीय सेना की रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी (Regiment of Artillery) थल सेना का दूसरा सबसे बड़ा अंग है, जिसे युद्ध के मैदान में इसकी विनाशकारी शक्ति के कारण ‘युद्ध का देवता’ (God of War) कहा जाता है। 

  • स्थापना: इसकी शुरुआत 28 सितंबर, 1827 को ‘बॉम्बे आर्टिलरी’ के रूप में हुई थी। इस दिन को प्रतिवर्ष गनर्स डे (Gunner’s Day) के रूप में मनाया जाता है।
  • आदर्श वाक्य: इसका मोटो “सर्वत्र इज्जत-ओ-इकबाल” (Sarvatra Izzat-o-Iqbal) है, जिसका अर्थ है— “हर जगह सम्मान और गौरव के साथ”।
  • मुख्यालय: इसका केंद्र नासिक (महाराष्ट्र) में स्थित है और मुख्य प्रशिक्षण संस्थान स्कूल ऑफ आर्टिलरी, देवलाली में है। 
  • युद्धक शक्ति: यह रेजिमेंट लंबी दूरी से दुश्मन पर गोलाबारी कर पैदल सेना (Infantry) को सुरक्षा प्रदान करती है। इसमें Bofors, M777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर, और K9-वज्र जैसी अत्याधुनिक तोपें शामिल हैं।
  • रॉकेट और मिसाइल: स्वदेशी पिनाका (Pinaka) मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर और ब्रह्मोस (BrahMos) मिसाइल प्रणाली इसकी मारक क्षमता को विश्वस्तरीय बनाती है।
  • ऐतिहासिक योगदान: 1947, 1965, 1971 के युद्धों और विशेष रूप से कारगिल युद्ध (1999) में बोफोर्स की भूमिका ने जीत सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। 

Share Now ➤

क्या आपको Apni Pathshala के Courses, RNA PDF, Current Affairs, Test Series और Books से सम्बंधित कोई जानकारी चाहिए? तो हमारी विशेषज्ञ काउंसलर टीम आपकी सिर्फ समस्याओं के समाधान में ही मदद नहीं करेगीं, बल्कि आपको व्यक्तिगत अध्ययन योजना बनाने, समय का प्रबंधन करने और परीक्षा के तनाव को कम करने में भी मार्गदर्शन देगी।

Apni Pathshala के साथ अपनी तैयारी को मजबूत बनाएं और अपने सपनों को साकार करें। आज ही हमारी विशेषज्ञ टीम से संपर्क करें और अपनी सफलता की यात्रा शुरू करें

📞 +91 7878158882

Related Posts

Scroll to Top