नीति आयोग की दिव्य भारत संकलन | NITI Aayog Divya Bharat Compendium

संदर्भ:
हाल ही में नीति आयोग (NITI Aayog) ने भारत के पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और इसे विश्व स्तर पर एक प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिए “दिव्य भारत: ए विंडो टू द सोल ऑफ इंडिया” नामक एक व्यापक संकलन लॉन्च किया।
‘दिव्य भारत’ संकलन क्या हैं?
“दिव्य भारत” नीति आयोग की रणनीतिक पहल है, जिसमें भारत के 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक संपदा को एक एकल, एकीकृत ढांचे में प्रस्तुत किया गया है।
उद्देश्य (Objectives):
- अति-पर्यटन (Overtourism) का समाधान: ताजमहल या जयपुर जैसे अत्यधिक भीड़भाड़ वाले स्थलों से पर्यटकों के दबाव को हटाकर कम प्रसिद्ध स्थलों की ओर मोड़ना।
- 365-दिवसीय गंतव्य बनाना: भारत की छवि को केवल एक शीतकालीन गंतव्य से बदलकर इसे साल भर घूमने लायक देश के रूप में स्थापित करना।
- समावेशी विकास: ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में पर्यटन के माध्यम से रोजगार सृजन करना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मुख्यधारा से जोड़ना।
- सांस्कृतिक गौरव का पुनर्द्धार: भारत की अमूर्त विरासत (पकवान, हस्तशिल्प, स्थानीय त्यौहार) को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करना।
सहयोग (Collaboration):
- नीति आयोग: संचार और पर्यटन एवं संस्कृति प्रभाग के माध्यम से नेतृत्व।
- मंत्रालय: पर्यटन मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय के साथ समन्वय।
- अकादमिक भागीदार: भारतीय पर्यटन और यात्रा प्रबंधन संस्थान (IITTM) और इंडियन स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी (ISPP) द्वारा गहन शोध और डेटा सत्यापन।
- निजी क्षेत्र: Airbnb, IAMAI, और अतिथि फाउंडेशन जैसे संस्थाओं का तकनीकी और जमीनी सहयोग।
प्रमुख विशेषताएं (Key Features):
- व्यापक डेटाबेस: इसमें लगभग 3,000 क्यूरेटेड लिस्टिंग शामिल हैं। 2,100+ गंतव्य (प्राकृतिक, साहसिक, विरासत और आध्यात्मिक) और 1,200+ सांस्कृतिक प्रविष्टियां (स्थानीय भोजन, वस्त्र और हस्तशिल्प)।
- मासिक ट्रैवल कैलेंडर: यह अपनी तरह का पहला ‘इंटेलीजेंट कैलेंडर’ है जो मौसम, स्थानीय त्योहारों और भौगोलिक स्थितियों के आधार पर 12 महीनों के लिए सर्वश्रेष्ठ गंतव्यों का सुझाव देता है।
- राज्य-वार सूक्ष्म विश्लेषण: प्रत्येक राज्य के लिए समर्पित अध्याय हैं जो वहां की छिपी हुई विरासतों (जैसे त्रिपुरा का उनाकोटी या मिजोरम का रेइक हिल्स) को उजागर करते हैं।
- अनुभवात्मक दृष्टिकोण: इस संकलन में “पर्यटन को एक अनुभव” के रूप में पेश किया गया है, जिसमें होमस्टे, सामुदायिक पर्यटन और पारिस्थितिक संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया है।
महत्व (Significance):
- आर्थिक महत्व: पर्यटन क्षेत्र भारत की GDP का लगभग 9% योगदान देता है। यह पहल प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार (जैसे गाइड, परिवहन, हस्तशिल्प) के माध्यम से आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करती है।
- सांस्कृतिक कूटनीति: यह पहल “सॉफ्ट पावर” को बढ़ावा देती है, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की छवि एक समृद्ध और विविधतापूर्ण राष्ट्र के रूप में मजबूत होती है।
- सहयोगात्मक संघवाद (Competitive Federalism): यह राज्यों के बीच एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को जन्म देता है ताकि वे अपने स्थानीय स्थलों को विश्व स्तरीय गंतव्यों के रूप में विकसित कर सकें।
- सतत विकास (SDGs): यह SDG 8 (सभ्य कार्य और आर्थिक विकास) और SDG 12 (जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन) को बढ़ावा देता है, जिससे पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन सुनिश्चित होता है।
- विकसित भारत @ 2047: यह संकलन 2047 तक भारत को एक वैश्विक पर्यटन केंद्र बनाने के विजन का एक महत्वपूर्ण रोडमैप है।