ऑनलाइन गेमिंग प्रचार और विनियमन नियम 2026 | Online Gaming Promotion and Regulation Rules 2026

संदर्भ:
हाल ही में भारत सरकार ने ‘ऑनलाइन गेमिंग प्रचार और विनियमन नियम, 2026’ (Promotion and Regulation of Online Gaming Rules, 2026) अधिसूचित कर दिए हैं, जो 1 मई 2026 से प्रभावी होंगे।
- यह नियम ‘ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन और विनियमन अधिनियम, 2025’ के अंतर्गत लाए गए हैं, जिसका उद्देश्य गेमिंग उद्योग को विनियमित करने के साथ-साथ ऑनलाइन मनी गेम्स के खतरों से नागरिकों (विशेषकर युवाओं) को सुरक्षा प्रदान करना है।
ऑनलाइन गेमिंग (प्रचार और विनियमन) नियम, 2026 के मुख्य बिंदु:
- खेलों का वर्गीकरण: नियमों के तहत, गेम्स को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा गया है:
- ऑनलाइन सोशल गेम्स (Permissible) जो मनोरंजन के लिए हैं और जिसमें कोई सट्टा (Money) शामिल नहीं है।
- ई-स्पोर्ट्स (E-sports) जिन्हें संवर्धन (Promotion) मिलेगा, लेकिन पंजीकरण अनिवार्य होगा।
- ऑनलाइन मनी गेम्स (Prohibited) जिन गेम्स में मौद्रिक दांव (Real Money) शामिल हैं, उन्हें प्रतिबंधित करने के लिए कड़े नियम हैं।
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भारतीय ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण (OGAI): सरकार ने एक समर्पित नियामक, Online Gaming Authority of India (OGAI) की स्थापना की है।
- इसकी अध्यक्षता इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) के अतिरिक्त सचिव करेंगे, जिसमें गृह, वित्त, सूचना एवं प्रसारण, और खेल मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
- यह अथॉरिटी इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्रालय (MeitY) के तहत एक ‘डिजिटल ऑफिस’ के रूप में काम करेगी, जिससे अनुपालन और पंजीकरण प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध होगी।
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पंजीकरण: अधिकांश सोशल गेम्स के लिए पंजीकरण अनिवार्य नहीं है, जिससे स्टार्टअप्स पर नियामक बोझ कम होगा। ई-स्पोर्ट्स और उच्च जोखिम वाले खेलों के लिए पंजीकरण अनिवार्य है। सफल पंजीकरण पर 10 साल की वैधता वाला डिजिटल प्रमाणपत्र दिया जाएगा।
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दंडात्मक प्रावधान: नियमों के उल्लंघन पर सख्त सजा का प्रावधान है: अवैध मनी गेम्स पर 3 साल तक की जेल और ₹1 करोड़ तक का जुर्माना, भ्रामक विज्ञापन पर मनी गेम्स का विज्ञापन करने पर 2 साल की जेल और ₹50 लाख का जुर्माना और वित्तीय लेनदेन बैंकों और पेमेंट गेटवे को अवैध गेमिंग प्लेटफॉर्म के लिए भुगतान संसाधित करने से प्रतिबंधित किया गया है।
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उपयोगकर्ता सुरक्षा: बच्चों की सुरक्षा के लिए सख्त आयु सत्यापन और पैरेंटल कंट्रोल तंत्र अनिवार्य है। उपयोगकर्ताओं के लिए द्वि-स्तरीय शिकायत निवारण प्रणाली होगी, जिसमें पहले प्लेटफॉर्म और फिर प्राधिकरण (OGAI) स्तर पर सुनवाई होगी।
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अधिसूचना के अनुसार, केंद्र सरकार ने साइबर सेल के अधिकारियों को इन नियमों के तहत जांच और कार्रवाई करने के लिए अधिकृत किया है।