भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता | India-New Zealand Free Trade Agreement

संदर्भ:
27 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को अगले पांच वर्षों में दोगुना कर 5 बिलियन डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा जाना प्रस्तावित है।
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के मुख्य बिंदु:
- भारतीय निर्यात को बढ़ावा: न्यूजीलैंड भारत के 100% निर्यात उत्पादों (8,284 टैरिफ लाइन) पर शुल्क समाप्त करने पर सहमत हुआ है। इसमें कपड़ा, चमड़ा, रत्न-आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद और फार्मास्यूटिकल्स जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्र शामिल हैं।
- न्यूजीलैंड के लिए रियायतें: भारत न्यूजीलैंड से आने वाले लगभग 95% उत्पादों पर टैरिफ को या तो पूरी तरह हटाएगा या उनमें भारी कटौती करेगा। इसमें भेड़ का मांस, ऊन, कोयला, लकड़ी और कुछ विशिष्ट फल जैसे किवीफ्रूट, एवोकैडो और चेरी शामिल हैं।
- संरक्षण: भारत ने अपनी कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले डेयरी क्षेत्र (दूध, दही, पनीर) को इस समझौते से पूरी तरह बाहर रखा है। इसके अलावा, निम्नलिखित उत्पादों को भी सुरक्षात्मक दायरे में रखा गया है: चीनी, प्याज, दालें और मक्का, खाद्य तेल और कुछ अन्य पशु उत्पाद।
- निवेश प्रतिबद्धता: न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत के बुनियादी ढांचे, विनिर्माण और तकनीक क्षेत्र में 20 बिलियन डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की प्रतिबद्धता जताई है।
- वीजा और गतिशीलता: भारतीय पेशेवरों के लिए 5,000 कार्य वीजा का एक समर्पित वार्षिक कोटा निर्धारित किया गया है, जो आईटी, इंजीनियरिंग और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में काम कर सकेंगे।
- विशेष वीजा: भारतीय रसोइयों (Chefs), योग प्रशिक्षकों और संगीत शिक्षकों के लिए भी विशेष वीजा मार्ग खोले गए हैं। साथ ही, भारतीय छात्रों के लिए पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा की सुविधा को मजबूत किया गया है।
- पारंपरिक चिकित्सा: न्यूजीलैंड ने पहली बार किसी FTA के तहत भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों जैसे आयुर्वेद और योग के लिए एक विशेष अनुबंध (Annex) पर हस्ताक्षर किए हैं, जो इन क्षेत्रों में वैश्विक पहुंच को बढ़ावा देगा।
महत्व:
- प्रशांत द्वीपीय देशों के लिए ‘प्रवेश द्वार’: यह समझौता भारत के लिए दक्षिण प्रशांत क्षेत्र (Oceania) की अर्थव्यवस्थाओं में भारत की गहरी पैठ का माध्यम बनेगा। न्यूजीलैंड की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का उपयोग करके भारतीय कंपनियां पापुआ न्यू गिनी, फिजी और वनुआतु जैसे द्वीपीय देशों के बाजारों तक अपनी पहुंच आसान बना सकेंगी।
- ‘फाइव आइज’ देशों के साथ रणनीतिक पुनर्संतुलन: ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के बाद, न्यूजीलैंड तीसरा ‘फाइव आइज’ (एक प्रमुख वैश्विक खुफिया गठबंधन) देश है जिसके साथ भारत ने हाल ही में FTA किया है। यह वैश्विक व्यापार में भारत के बढ़ते भू-राजनीतिक प्रभाव और विकसित देशों के साथ आर्थिक संबंधों के ‘संरचनात्मक पुनर्गठन’ को दर्शाता है।
- 2024-25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 1.3 बिलियन डॉलर (वस्तु) और कुल 2.4 बिलियन डॉलर (वस्तु एवं सेवा) था, जिसे इस संधि के माध्यम से नया विस्तार मिलेगा।
- आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण और समुद्री सुरक्षा: वर्तमान वैश्विक अनिश्चितताओं (जैसे पश्चिम एशिया संकट) के बीच, यह समझौता भारत को एक स्थिर और विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला प्रदान करता है। दोनों देश समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और बंदरगाह सेवाओं (Port Services) में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं, जो भारत के इंडो-पैसिफिक विजन का एक प्रमुख स्तंभ है।
- पारंपरिक ज्ञान और ‘आयुष’ को वैश्विक मान्यता: इतिहास में पहली बार, न्यूजीलैंड ने किसी FTA के तहत भारतीय पारंपरिक चिकित्सा (Ayurveda, Yoga, Unani) के लिए एक समर्पित ‘Annex’ पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे न केवल इन सेवाओं का निर्यात बढ़ेगा बल्कि ‘मेडिकल वैल्यू ट्रैवल’ के माध्यम से भारत एक वैश्विक वेलनेस हब के रूप में उभरेगा।