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नई राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित प्रतिबद्धताएं

नई राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित प्रतिबद्धताएं | New Nationally Determined Commitments

New Nationally Determined Commitments

संदर्भ:

हाल ही में भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) को अपनी नई राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित प्रतिबद्धताएं (NDC 3.0) सौंपी हैं। यह अद्यतन (Update) 2031-2035 की अवधि के लिए भारत की जलवायु रणनीति को रेखांकित करता है।

भारत के अद्यतन NDC (2031-2035) के मुख्य स्तंभ:

  • गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता (Non-Fossil Capacity): वर्ष 2035 तक कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 60% गैर-जीवाश्म स्रोतों (सौर, पवन, जल विद्युत, परमाणु और बायोमास) से प्राप्त करना।
    • वर्तमान स्थिति: फरवरी 2026 तक भारत ने पहले ही 52.57% गैर-जीवाश्म क्षमता हासिल कर ली है, जो 2030 के पिछले लक्ष्य (50%) से कहीं अधिक है।
  • उत्सर्जन तीव्रता में कमी (Emissions Intensity): 2035 तक अपनी जीडीपी की उत्सर्जन तीव्रता को 2005 के स्तर के मुकाबले 47% तक कम करना। भारत ने 2020 तक पहले ही 36% की कमी दर्ज की थी।
  • कार्बन सिंक (Carbon Sink) का विस्तार: वन और वृक्ष आवरण के माध्यम से 2035 तक 3.5 से 4 बिलियन टन CO2 के बराबर अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाना। 

महत्व:

  • विकसित भारत @2047: ये लक्ष्य भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने और 2070 तक नेट-जीरो (Net-Zero) लक्ष्य को प्राप्त करने के मार्ग पर अग्रसर करते हैं।
  • ग्लोबल साउथ का नेतृत्व: भारत और अर्जेंटीना दिसंबर 2025 तक NDC 3.0 जमा करने वाले अंतिम G20 देश थे। यह देरी भारत द्वारा अपनी घरेलू क्षमताओं और ऊर्जा सुरक्षा का गहन विश्लेषण करने के बाद उठाए गए एक नपे-तुले कदम को दर्शाती है।

प्रमुख नीतिगत पहल:

  • ग्रीन हाइड्रोजन मिशन: उद्योगों के डीकार्बोनाइजेशन के लिए।
  • पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना: सौर ऊर्जा के विकेंद्रीकरण और घरेलू स्तर पर अपनाने के लिए।
  • लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट (LiFE): इसे एक जन आंदोलन बनाकर सतत जीवन शैली को बढ़ावा देना।
  • एक पेड़ माँ के नाम: वृक्षारोपण को समुदाय-आधारित जलवायु कार्रवाई में बदलना। 

चुनौतियाँ:

  • वित्त और प्रौद्योगिकी: भारत ने स्पष्ट किया है कि इन लक्ष्यों की पूर्ण प्राप्ति विकसित देशों से कम लागत वाले अंतर्राष्ट्रीय वित्त और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर काफी हद तक निर्भर रहना पड़ेगा।
  • ग्रिड स्थिरता: 60% नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड में एकीकृत करने के लिए उन्नत बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) और पंप स्टोरेज (PSP) की आवश्यकता है।

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